Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kanchan chauhan, poem

बुआ -भतीजी |kavita -bua bhatiji

बुआ -भतीजी बात भले फर्ज़ी लगे, लेकिन इस में सच्चाई है। बुआ होती है भतीजी का आने वाला कल, और …


बुआ -भतीजी

बुआ -भतीजी |kavita -bua bhatiji

बात भले फर्ज़ी लगे, लेकिन इस में सच्चाई है।
बुआ होती है भतीजी का आने वाला कल,
और भतीजी होती अपनी बुआ की परछाईं है।
बुआ के जैसे भतीजी भी तो ,
हो जाती एक दिन पराई है।
एक ही घर दोनों का मायका,
है एक ही घर की बेटी दोनों ,
नहीं कोई फर्क है दोनों में।
एक पापा की लाडली बेटी,
है दुसरी साथी बचपन की,
हर राखी पर रस्ता देखे पापा,
बुआ है रौनक त्यौहारों की।
भतीजी उसी आंगन की शोभा,

जिस में कभी बुआ खेली थी,
पापा की है वो प्यारी बहना,
भतीजी की प्यारी बुआ है,
कोई माने या न माने लेकिन,
भतीजी होती अपनी बुआ की परछाईं है।
बुआ होती है भतीजी का आने वाला कल
भतीजी होती है बुआ का बीता हुआ बचपन।
इसीलिए तो भतीजी होती, बुआ को प्यारी है।

About author

कंचन चौहान,बीकानेर

</


Related Posts

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर,(14 अप्रैल ) विशेष

April 27, 2022

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर,(14 अप्रैल ) विशेष एक महान नायक! समानता का अधिकार दिलाया,ज्ञान का प्रकाश चमकाया,किया संघर्ष मानवता के अधिकार

स्वयं को पहचाने!

April 27, 2022

स्वयं को पहचाने! चलो आज स्वयं को पहचाने,अपनी कमजोरियों को जाने,जग की आलोचना बहुत की,अब खुद को भी दे, थोड़े

जीवन में द्वंद का समापन!

April 27, 2022

जीवन में द्वंद का समापन! कभी पाऊं खुद को अनजान,तो कभी महान,कभी अज्ञानी, तो कभी ज्ञानी,मुझ में हे अच्छाई या

मोहब्बत का मरहम़ लगा

April 27, 2022

 मोहब्बत का मरहम़ लगा फ़रेब दिया तूने चाहे , रूह में मेरी तू ही समाता है ये दिल तो कायल

जो जैसा करेगा , वैसा भरेगा

April 27, 2022

जो जैसा करेगा , वैसा भरेगा दुनिया का दस्तूर हे ये जो जैसा करेगा वैसा भरेगाआज हसे दुनिया चाहे कल

वीणा के सुर खामोश हो रहे

April 27, 2022

 वीणा के सुर खामोश हो रहे मेरी तमन्नाओं के कातिल बता तूने हमें वफा क्यों न दी।। कभी मांगा न

PreviousNext

Leave a Comment