Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

बिपरजॉय जैसे चक्रवात बनाम मूक पशु पक्षी जानवरों की सुरक्षा, चिकित्सा सुनिश्चिता

बिपरजॉय जैसे चक्रवात बनाम मूक पशु पक्षी जानवरों की सुरक्षा, चिकित्सा सुनिश्चिता प्राकृतिक आपदाओं में मूक पशुओं की सुरक्षा, चिकित्सा …


बिपरजॉय जैसे चक्रवात बनाम मूक पशु पक्षी जानवरों की सुरक्षा, चिकित्सा सुनिश्चिता

पितृ देवो भव: पिताजी दिवस 18 जून 2023 पर विशेष

प्राकृतिक आपदाओं में मूक पशुओं की सुरक्षा, चिकित्सा सुनिश्चिता पर नीतिगत योज़ना ज़रूरी

वर्तमान जलवायु परिवर्तन युग में हर मौसम में प्राकृतिक आपदाओं की संभावनाओं में मूक पशु पक्षी जानवरों की सुरक्षा चिकित्सा योजना ज़रूरी – एडवोकेट किशन भावनानी गोंदिया

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर पूरी दुनियां की नजरें वर्तमान में भारत के कुछ राज्यों में 15 जून 2023 को प्रवेश करने वाले भयंकर चक्रवात तूफान बिपरजॉय की ओर लगी हुई है जिनके कराची में मुड़ जाने की संभावनाओं के बीच इसका रुख़ मौसम विभाग ने सौराष्ट्र सूरत सहित गुजरात महाराष्ट्र गोवा के कुछ तटीय शहरों में आने का अंदेशा जताया है जिसकी तीव्रता 150 केएमपीएच हो सकती है जिसका रौद्र रूप धारण करने को देखते हुए माननीय पीएम द्वारा 12 जून 2023 को एक उच्च स्तरीय बैठक कर जानकारी ली गई तो 13 जून 2023 को गृह मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री द्वारा भी मौके की नजाकत को देखते हुए उच्च स्तरीय बैठक कर दिशानिर्देश जारी किए। इस भयंकर तूफान की तीव्र गति से तैयारियां शुरू की गई है और तटीय इलाकों से करीब 28 हज़ार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है। मेरा मानना है कि यह अति सुशासन की निशानी है परंतु इस बिपरजॉय जैसे अनेकों चक्रवात और प्राकृतिक आपदाएं भारत ने देखी है, परंतु मुझे इनके खतरोंसे मूक पशुपक्षियों जानवरों के लिए व्यवस्था रणनीति या योजना का कहीं उल्लेख नहीं मिलता है, जो किया जाना ज़रूरी है। अभी हमने टीवी चैनलों पर सुने 28 हज़ार लोगों कोसुरक्षित निकाल लिया गया है परंतु पशु पक्षियों जानवरों के बारे में जानकारी नहीं आई। मेरा मानना है कि बौद्धिक क्षमता का धनी मानवीय जीव मौके की नजाकत को पहले से ही भांपते हुए प्राकृतिक आपदा स्थल से दूर जाने की सोचने में सक्षम है परंतु बेचारे अबोध पशुधन जानवरों को स्थिति का चूंचौपट भी नहीं होता वे तो केवल मानवीय पक्ष पर ही निर्भर रहते हैं इसलिए केंद्र व राज्य स्तरपर सरकारों के इस संबंध में नीतियां योजनाओं को मजबूत करने की जरूरत है। चूंकि अभी 15 जून 2023 को बिपरजॉय से बचने जोरों से तैयारियां शुरू है, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, प्राकृतिक आपदाओं में मूक पशुओं पक्षियों जानवरों की सुरक्षा, चिकित्सा शिक्षा पर नीतियां, योजनाएं बनाना जरूरी हैं।
साथियों बात अगर हम प्राकृतिक आपदाओं में पशु पक्षी जानवरों की करें तो,मानव पीड़ितों की तुलना में पशुहताहत लगभग हमेशा अधिक होते हैं।जब प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जानवरों की मृत्यु हो जाती है, तो इसका वन्यजीवों और उन लोगों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ता है जो साहचर्य और आर्थिक स्थिति के लिए उनपर निर्भर होते हैं। जंगल में रहने वाले पशु प्राकृतिक आपदा के समय आघात योग्य है । भूकंप,तूफान,ज्वालामुखी विस्फोट , सुनामी,जंगल की आग का पशुओं पे विनाशकारी परिणाम हो सकता है । कई जानवरों की मौत हो जाति है, कुछ डूब जाते हैं,या धूल,राख लावा , या बर्फ़ में जि़न्दा दफ्न हो जाते हैं । कोई ढह गया हुआ या जला दिए गए बिलों में मर जाते हैं,कुछ की पेडो़ या चट्टानों से टकराव के कारण या फिर ओलों के गिरने के वजह से मृत्यु हो जाति है । उनमें से कुछ घातक चोट झेलते हैं,जैसे आँखों ,पंखों और गिल्समें छोटा घाव याघर्षन ,श्वसन और पाचन संबंधी विकार,घिसे हुए दांत,कुपोषण; और दूषित भोजन और पानी से विषाक्तता । भिषण ज्वालामुखी विस्फोट और आग ,क्षेत्रीय मौसम को अस्थायी रूप से बदल सकते हैं,हवा को ठंडा या गर्म करके , हवाओं को दिशा को बदलके या बारिश का कारण बनके । ज्वालामुखी, तूफान और बाढ़ सीधे समुद्री जानवरों को मार सकते हैं या मलबे को जमा करने और पानी के तापमान और लवणता को प्रभावित करके दीर्घकालिक समस्याओं का कारण बन सकते हैं। प्राकृतिक आपदाओं में सरकारें और वैश्विक आपदा प्रतिक्रिया समुदाय जानते हैं कि जानवरों की रक्षा करने से लोगों को आपदा के बाद अपने जीवन का पुनर्निर्माण करने में मदद मिलती है।जानवरों को शायद ही कभी राष्ट्रीय आपदा योजनाओं और निवेशों में शामिल किया जाता है, और उनकी जरूरतों को शायद ही कभी राहत कार्यों में शामिल किया जाता है।इससे निपटने के लिए बहुत कम जगह है। बता दें यदि चक्रवात की चेतावनी जारी की जाती है, तो हम अपने पालतू जानवरों को अंदर या सुरक्षित स्थान पर ले जाएं। एक चक्रवात के बाद, हम अपने पालतू जानवरों को बिजली की लाइनों के गिरने, मलबे या प्रदूषित पानी जैसे खतरों से दूर रखें। वन्यजीव किसी भी अन्य जानवर की तरह चक्रवात की हवाओं और झाड़ियों की आग की लपटों से प्रभावित होते हैं। और इसलिए भी क्योंकि जिस आवास पर वे भोजन और आश्रय के लिए निर्भर हैं, वह भी अक्सर नष्ट हो जाता है।बाढ़ जानवरों को कैसे प्रभावित करती है?हम कभी-कभी गंभीर परिस्थितियों में वन्यजीवों की समाचार छवियां देखते हैं, कई जानवर हमेशा पानी में संघर्ष करके बह जाते हैं या इतने थक जाते हैं कि वे हाइपोथर्मिया, सदमे या थकावट से मर जाते हैं।झाड़ियों में आग लगने और चक्रवात के दौरान समान चुनौतियां होती हैं। जो बच जाते हैं, उनके लिए अक्सर कोई भोजन या आश्रय शेष नहीं होता है। इस खुला वातावरण में छोटे या घायल जानवर आसान शिकार होते हैं। कई लोग भोजन की कमी, चोटों या आश्रय खोजने के लिए लगातार संघर्ष से धीमी मौत मरते हैं।चक्रवातों के दौरान, चमगादड़ और फल कबूतर जैसी प्रजातियाँ पहले प्रभाव से बच सकती हैं, लेकिन बाद में, भोजन की कमी से मर जाती हैं क्योंकि अक्सर चक्रवात नष्ट होने वाले महत्वपूर्ण चारा पेड़ों के फलने के साथ मेल खाते हैं।
साथियों बात अगर हम बिपरजॉय पर आईएमडी के महानिदेशक के बयान की करें तो, उन्होंने कहा कि 15 जून की शाम के आसपास यह चक्रवात सौराष्ट्र, कच्छ और पाकिस्तान के तटीय इलाके को पार करेगा। उस समय इसकी रफ्तार 125-135 किमी प्रति घंटा रहेगी, इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। 14 और 15 जून को भारी बारिश होगी।
साथियों बात अगर हम बिपरजॉय चक्रवात से मुकाबले को उच्च स्तरीय तैयारियों और बैठकों की करें तो पीएमने वरिष्ठअधिकारियों को निर्देश दिया कि संवेदनशील स्थानों पर रहने वाले लोगों को सरकार द्वारा सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए और बिजली, दूरसंचार, स्वास्थ्य, पेयजल आदि सभी आवश्यक सेवाओं का रखरखाव सुनिश्चित किया जाए। नुकसान की स्थिति में ये सेवाएं तुरंत बहाल की जाएं। पीएम ने निर्देश दिया कि पशुओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने नियंत्रण कक्षों को 24 घंटे कार्य करने का निर्देश भी दिया। वहीं केन्द्रीय गृहमंत्री ने कहा कि हमारा उद्देश्य चक्रवातीतूफानबिपारजॉय से होने वाले संभावित नुकसान को कम से कम करना और इससे जीरो कैजुअल्टी हो यह सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि पीएम की अध्यक्षता में 12 जून को हुई समीक्षा बैठक में प पीएम जी द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण निर्देशों पर तेज़ी से काम करने की आवश्यकता है। गुजरात सीएम ने चक्रवातीतूफान के संभावित मार्ग में आबादी की सुरक्षा की तैयारियों और स्थानीय प्रशासन द्वारा किए जा रहे उपायों से गृहमंत्री को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मछुआरों को समुद्र में ना जाने की सलाह दी गई है और जो समुद्र में हैं उन्हें वापस सुरक्षित स्थान पर बुला लिया गया है। अब तक कुल 21,595 नावें, 27 जहाज और 24 बड़े जहाज खड़े किए जा चुके हैं। निकासी के उद्देश्य से संवेदनशील गांवों की सूची तैयार की गई है। सीएम नें बताया कि तूफान से प्रभावित होने की आशंका वाले क्षेत्रों में 450 अस्पतालों की पहचान कर ली गयी है और जरूरी दवाइयों की आपूर्ति सुनिश्चित कर दी गयी है। पर्याप्त शेल्टर की व्यवस्था भी कर दी गयी है और बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 597 टीम तैनात की गयी है। एनडीआरएफ की 18 और एसडीआरएएफ की 12 टीमें तैनात की जा चुकी हैं।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि बिपरजॉय जैसे चक्रवात बनाम मूक पशु पक्षी जानवरों की सुरक्षा, चिकित्सा सुनिश्चिता ज़रूरी।प्राकृतिक आपदाओं में मूक पशुओं की सुरक्षा, चिकित्सा सुनिश्चिता पर नीतिगत योज़ना ज़रूरी।वर्तमान जलवायु परिवर्तन युग में हर मौसम में प्राकृतिक आपदाओं की संभावनाओं में मूक पशु पक्षी जानवरों की सुरक्षा चिकित्सा योजना ज़रूरी है।

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट 
किशन सनमुख़दास भावनानी 
गोंदिया महाराष्ट्र

Related Posts

आओ पांच दिन खुशियों वाले आस्था का पर्व दीपावली का उत्सव मनाए/deepawali special article in hindi

October 22, 2022

आओ पांच दिन खुशियों वाले आस्था का पर्व दीपावली का उत्सव मनाए पांच दिनों का दीपावली महोत्सव धनतेरस से शुरू

प्रकाश पर्व दीपावली की बधाईयां/Deepawali par kavita

October 22, 2022

 कविता -प्रकाश पर्व दीपावली की बधाईयां प्रकाश पर्व दीपावली की बधाई  पारंपरिक हर्ष और उत्साह लेकर आई  राष्ट्रपति प्रधानमंत्री ने

खुशियों और सौगातों का त्योहार है दीपावली/Diwali is the festival of happiness and gifts

October 22, 2022

खुशियों और सौगातों का त्योहार है दीपावली बाकी सारे त्योहारों का धार्मिक महत्व है पर दीपावली का एक व्यावसायिक महत्व

अपने लिए जिएं तो क्या जिएं

October 19, 2022

जीवन की राहें कभी कठिन कभी सरल हुआ करती हैं।सरल राहों पर तो हंसते हुए गुजर जातें हैं हम लेकिन

सुरक्षा के साथ मानवता का धर्म निभा रही कांस्टेबल सोनिया

October 19, 2022

फर्ज आखिर फर्ज ही होता है पुलिस की ड्यूटी हो या समाज में फैले तमाम बुराइयों को दूर करने का

दिल की बजाय दिमाग को शिक्षित करना शांतिपूर्ण समाज के लिए खतरा

October 19, 2022

मूल्य आधारित शिक्षाशास्त्र, अध्ययन सामग्री और कहानी सुनाने के विकास से बच्चों और समाज के दिमाग और दिल का समग्र

Leave a Comment