Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, poem

बिना आवाज़ की लाठी मारी किया था भ्रष्टाचार

 भावनानी के भाव बिना आवाज़ की लाठी मारी किया था भ्रष्टाचार धन रहेगा नहीं दुखी करके निकलेगा यह भ्रष्टाचार  बच्चे …


 भावनानी के भाव

बिना आवाज़ की लाठी मारी किया था भ्रष्टाचार

बिना आवाज़ की लाठी मारी किया था भ्रष्टाचार
धन रहेगा नहीं दुखी करके निकलेगा यह भ्रष्टाचार 
बच्चे को एक्सीडेंट में खोए कारण था भ्रष्टाचार 
ऊपरवाला देख रहा है नहीं है वह लाचार 
बिना आवाज़ की लाठी मारी किया था भ्रष्टाचार 
चकरे खिलाकर बदुआएं समेटी करके भ्रष्टाचार 
परिवार सहित सुखी रहोगे जब छोड़ोगे भ्रष्टाचार 
अब भी सुधर जाओ मत करो इनकार 
ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार 
जीवन में दुखों का कारण का भ्रष्टाचार 
लाखों करोड़ों खर्च किए नहीं हुआ उपचार 
परिवार बिखर गया बस कारण है भ्रष्टाचार 
जैसी करनी वैसी भरनी आदिकाल से सत्य विचार 
भारत में अब आ गई है नवाचारों की बौछार 
डिजिटल पारदर्शी नीतियों से हो गए हो लाचार 
चकरे खिलाने का काम अब छोड़ दो ये औजार
ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार 

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

Related Posts

मुझको भैयाजी माफ़ करना – गल्ती मारे से हो गई

June 4, 2022

मुझको भैयाजी माफ़ करना – गल्ती मारे से हो गई  गल्ती हो जाने पर क्षमा मांगना हर समस्या का तर्कसंगत

दो दिवसीय भारत ड्रोन महोत्सव 2022

June 4, 2022

 दो दिवसीय भारत ड्रोन महोत्सव 2022  भारत में ड्रोन क्रांति की दस्तक – भविष्य का ड्रोना-चार्य भारत!! देश को नई

श्रेष्ठ और दृढ़ इच्छाशक्ति सफ़लता की चाबी है

June 4, 2022

 श्रेष्ठ और दृढ़ इच्छाशक्ति सफ़लता की चाबी है  मज़बूत इच्छाशक्ति के आगे हर समस्या छोटी होती है  प्रबल इच्छाशक्ति मुसीबतों

मानवता के लिए योग

June 4, 2022

 मानवता के लिए योग  अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस आठवें संस्करण 21 जून 2022 को यादगार बनाने तैयारियों का जबरदस्त आगाज़  75

विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2022 पर विशेष

June 4, 2022

 विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2022 पर विशेष  विश्व पर्यावरण दिवस पर हर नागरिकों को पर्यावरण सुरक्षा संबंधी छह कठोर

मां का असीम प्रेम

May 26, 2022

 मां का असीम प्रेम! सबसे भोली , प्यारी हे मां, है यह तो प्रेम की प्रतिमा, इसकी गोदी में बसा

Leave a Comment