Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Aalekh, kishan bhavnani, lekh

बारिश बाढ़ का कहर / badh ka kahar

 बारिश बाढ़ का कहर  मानसून की बारिश से तबाही, प्राकृतिक आपदा या फ़िर सिस्टम की नाकामी?  मानसून की बारिश में …


 बारिश बाढ़ का कहर 

बारिश बाढ़ का कहर / badh ka kahar

मानसून की बारिश से तबाही, प्राकृतिक आपदा या फ़िर सिस्टम की नाकामी? 

मानसून की बारिश में जनता की परेशानी – क्या सिस्टम की नाकामी? – एड किशन भावनानी 

गोंदिया – मानसून की बारिश में बीते कई वर्षोंसे हर वर्ष हम अपने शहर, जिले और राज्य सहित देश में भारी बारिश के चलते नदियों नालों का जलस्तर बढ़ने से तटीय इलाकों में तबाही और मंदिर, मकान, सार्वजनिक स्थलों के डूबने की जानकारी टीवीसमाचार चैनलों में देखते सुनते प्राप्त करते हैं जिसमें हम मान सकते हैं कि यह एक प्राकृतिक आपदा का रूप है हो सकता है। परंतु अत्यंत सोचनीय बात यह है कि हर वर्ष कई मेट्रो सिटी में मानसून की बारिश से पानी रोड ऊपर भर जाता है ट्रैफिक बुरी तरह बाधित होता है, जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है और कई मकान, दुकान, मंदिर सर्वजनिक स्थल और उसमें रखे सामान नष्ट हो जाते हैं!! जो स्वाभाविक रूप से हमें रेखांकित करने पर मजबूर होना पड़ता है कि यह मानसून की बारिश से तबाही है या फिर सिस्टम की नाकामी से? गुनाहगार कौन है ? प्राकृतिक आपदा या सिस्टम? क्योंकि हर वर्ष उन मेट्रो या सामान्य शहरों की एक जैसी तबाही मात्र प्राकृतिक आपदा का संयोग नहीं हो सकता हैं ? कुछ सिस्टम की नाकामी का परिणाम भी हो सकता है? जिसपर आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे। 

साथियों बात अगर हम मानसून की बारिश की करें तो हम टीवी चैनलों पर देखते हैं कि बड़ी-बड़ी मेट्रो सिटीयां, शहर जो नियोजित तरीके से अनुमति देकर बनाए बताए गए हैं, बसाए गए हैं, उनमें पानीका अभूतपूर्व भारी जमावड़ा और भारी माल, जन, हानि वह भी हर वर्ष होना मात्र प्राकृतिक या संयोग नहीं हो सकता क्योंकि यदि ऐसी घटनाएं जो 4-6 वर्षों में हो तो ठीक!! पर बीते कई वर्षों से हर वर्ष समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है यह स्वभाविक नहीं हो सकता!!क्योंकि हम अपनीअपनी सिटियों में जलभराव से नुकसान का विश्लेषण कर मूल्यांकन करें तो इसमें सिस्टम की खामियां हमें नजर आ जाएगी ? जबकि हमेशा हर वर्ष की तरह इस वर्ष की प्राकृतिक आपदा को दोषी ठहरा कर फाइल बंद कर दी जाती है। 

साथियों बात अगर हम मानसून की बारिश से तबाही की करें तो, भारत में मानसून के आते ही प्राकृतिक आपदाओं की बाढ़ आ जाती है। मानसून के साथ ही आई बाढ़ कई राज्यों की तबाही को कई गुना बढ़ा देती है। हर साल लाखों लोग बेघर हो जाते हैं, हजारों घर नष्ट हो जाते हैं, कई हजार हेक्टयर में फसल तबाह हो जाती है, काफी संख्या में लोग भी मारे जाते हैं, साथ ही आर्थिक नुकसान भी बेइंतहा होता है, इसीलिए हम देश में बाढ़ से आई आर्थिक तबाही और 6 दशक के सैलाब काल की व्याख्या कर रहे हैं,और ये समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है या फिर सिस्टम की नाकामी है ? 

साथियों बात अगर हम दिनांक 13 जुलाई 2022 तक मानसून बारिश से प्रभावित 25 राज्यों की करें तो हम टीवी चैनलों पर देख रहे हैं कि जनता इतनी परेशानी में है तो क्या हालातके लिए स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार है ? क्या इसके लिए पहले से तैयारी की जानी चाहिए थी ? या फिर बारिश कितनी होगी बता नहीं सकते इसमें किसी की गलती नहीं है ? इत्यादि प्रश्न आम जनता के मन में आ रहे हैं क्योंकि यह स्थिति करीब-करीब हर वर्ष की है तो इसे रेखांकित किया जाना चाहिए। 

साथियों बात अगर हम मानसून से बारिश की दिनांक 13 जुलाई तक स्थिति की करें तो टीवी चैनलों इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अनुसार, देश के ज्यादातर राज्यों में मानसून सक्रिय हो गया है। देश में हिमाचल प्रदेश से लेकर केरल तक भारी बारिश हो रही है। वहीं गुजरात के 6 जिले बाढ़ की चपेट में हैं,जिसके कारण स्कूलकॉलेजों में छूट्टी कर दी गई है। मीडिया रिपोर्ट नवसारी और वलसाड सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही गुजरात के 174 गावों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई। मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में भी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, छोटा उदयपुर में पिछले 24 घंटों में 166 मिमी से अधिक बारिश हुई है। नर्मदा जिले के बाद यह दूसरी सबसे अधिक बारिश है, जिसमें सुबह 8 बजे से पिछले 24 घंटों में 168 मिमी बारिश हो चुकी है। इसके साथ ही मौसम विभाग ने कहा है कि हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित 25 राज्यों में भारी बारिश के आसार हैं। 

आईएमडी ने उत्तरी केरल के जिलों में कन्नूर, वायनाड, कोझीकोड और कासरगोड में ऑरेंजे अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही हैदराबाद में आईएमडी ने मंगलवार के लिए रेड अलर्ट जारी किया था। पुलिस ने भारी बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों से अपील की है कि बिना जरूरी वाली यात्रा न करे। वहीं मुंबई में आज और कल भारी बारिश की संभावना बताते हुए रेड अलर्ट जारी किया था। 

क्या पहाड़ी और क्या मैदानी इलाके!! देश के कम से कम 25 राज्यों में इंद्रदेव झमाझम बरस रहे हैं। हिमाचल प्रदेश से लेकर, राजस्थान, मध्य प्रदेश और तेलंगाना, केरल तक भारी बारिश हो रही है। राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में भी बारिश का हाई अलर्ट है। वहीं दिल्ली एनसीआर में भी सुबह से भारी बारिश शुरू हो गई है। मौसम विभाग ने कहा है कि मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, तेलंगाना समेत 25 राज्यों में भारी बारिश के आसार हैं। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि बारिश बाढ़ का कहर बरस रहा है!!मानसून की बारिश से तबाही प्राकृतिक आपदा है या सिस्टम की नाकामी है ? बारिश से जनता की परेशानी क्या सिस्टम की नाकामी हैं? 

-संकलनकर्ता लेखक कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

बारिश बाढ़ का कहर / badh ka kahar

July 13, 2022

 बारिश बाढ़ का कहर  मानसून की बारिश से तबाही, प्राकृतिक आपदा या फ़िर सिस्टम की नाकामी?  मानसून की बारिश में

जन संख्या नियंत्रण कानून जल्दी से लागू हो

July 13, 2022

 “जन संख्या नियंत्रण कानून जल्दी से लागू हो” प्रतिवर्ष 10 जुलाई जनसंख्या नियंत्रण दिवस पर सबको याद आता है कि

विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई 2022 पर विशेष

July 13, 2022

 विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई 2022 पर विशेष  बेरोजगारी, भुखमरी, अशिक्षा रूपी समस्याओं से छुटकारा सहित भविष्य के अवसर, अधिकार

आओ स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर स्वच्छता अभियान को सफल बनाएं

July 13, 2022

 आओ स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर स्वच्छता अभियान को सफल बनाएं  मानव समाज समुद्र और महासागरों की प्राकृतिक संपदा से लगातार

मिशन वात्सल्य /mission vatsalya

July 13, 2022

 मिशन वात्सल्य /mission vatsalya  भारत के हर बच्चे के लिए हमें स्वस्थ खुशहाल बचपन सुनिश्चित करना, संवेदनशील समर्थनकारी और समकालीन

कमाई की होड़ में शिक्षण संस्थान,

July 13, 2022

 कमाई की होड़ में शिक्षण संस्थान, शिक्षा का बाजार या बाजार की शिक्षा। प्रियंका ‘सौरभ’ शिक्षा के व्यावसायीकरण के कारण

Leave a Comment