Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh, Veena_advani

बहू आएगी तो ये खुद ब खुद सुधर जाएगा

बहू आएगी तो ये खुद ब खुद सुधर जाएगा हम तो हार गए इसको सुधारते सुधारते चलो ब्याह देते बेटे …


बहू आएगी तो ये खुद ब खुद सुधर जाएगा

बहू आएगी तो ये खुद ब खुद सुधर जाएगा

हम तो हार गए इसको सुधारते सुधारते चलो ब्याह देते बेटे को इसकी नकेल तो बहू ही आकर कसेगी ,
कितनी सरलता से ये शब्द कोई मां बाप कह देते अपने बिगड़े बेटे के लिए
पर वो ये नहीं जानते कि वो जिस भविष्य के लिए सुनहरे सपने संजोते बेटे के सुधरने के लिए , वो किसी ओर की औलाद को एक उम्मीद के साथ उसे नरक मे धकेल देते ।।
जिस औलाद बेटे को सुधारने मे जिंदगी की बाजी हार गये मां बाप, वो कैसे किसी ओर की औलाद की जिंदगी बर्बाद कर सकते । पर एसी सोच संग बहुत से मां बाप बेटे की शादी करवा देते और बेटा यदि बहू को प्रताड़ित करे चाहे मानसिक या शारीरिक तो कहते बहू कि ही कोई ग़लती होगी और जीते-जी मार देते किसी ओर की औलाद को अपने बिगड़े बेटे की शादी करवाकर । बहू तो हर संभव प्रयास करती , ओर करती ही जाती पर उसे क्या पता कि उसे दर्द की आग में जबरदस्ती , जान बूझकर धकेला सास-ससुर ने , लोगों ने बस फिर इतना ही कहा तेरी किस्मत ही खराब थी। कुछ व्यंग्य कसे तो कुछ , कुछ ओर बस कहते चले गये पिसी तो वो बेगुनाह जो बहुत सपने संजोए थी जिसके सपनों कि डोली को अर्थी में तब्दील कर तमाशा बना मूकदर्शक बन वही सास ससुर देखते रहे ना कोई सांत्वना और ना साथ । बहुत आसान है किसी ओर से उम्मीद लगाना पर जब खुद पर बात आती तो तब पता चलता । अंत बस यही वेदना से भरी ख्वाबों कि डोली अर्थी में तब्दील हो खामोशी ताने या सोचे भाड़ मे जाओ खाओ पियो मौज करो या आंखें सर्वदा के लिए मूंद जाती । इस तरह के विचारों के प्रति मेरी सोच यह हमारी कि कोशिश करो ना समझे कोई तो खाओ पियो मौज करो भाड़ मे जाए रिश्ते नाते , भाड़ मे जाए कहां से कमा के लाता मस्त जिंदगी जियो अपनी बच्चों संग।

About author

Veena advani
वीना आडवाणी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र

Related Posts

कुछ भी, सब कुछ नहीं!

April 20, 2022

कुछ भी, सब कुछ नहीं! अक्सर हमने देखा है, कि हम सब कभी कभार यह कहते हैं, यह मेरा सब

अपनी किस्मत अपने हाथ!

April 20, 2022

अपनी किस्मत अपने हाथ! जुआरी करते हैं,किस्मत की आजमाइश,निकम्मे करते हैं,बैठे-बैठे फरमाइश,पर जीवन की हकीकत,परिश्रम करने से ही होती हैपूरी,

भारत की गाथा

April 20, 2022

भारत की गाथा प्रधानमंत्री संग्रहालय – स्वतंत्रता के बाद सभी प्रधानमंत्रियों के जीवन और योगदान पर लिखी भारत की गाथा

हमारी आस्था, संस्कृति की धारा, सद्भाव, समभाव, समावेश की है

April 20, 2022

हमारी आस्था, संस्कृति की धारा, सद्भाव, समभाव, समावेश की है देश की बुनियादी नीव अमन चैन, सौहार्दपूर्ण वातावरण, भाईचारा तात्कालिक

आजकल संतति से विमुख हो रहे हैं युवा

April 20, 2022

आजकल संतति से विमुख हो रहे हैं युवा जब हम लोग छोटे थे तो सभी घरों में एक ही रिवाज

चीन-पाकिस्तान से निपटने के लिए हमें सीमाओं को मजबूत रखना होगा।

April 20, 2022

चीन-पाकिस्तान से निपटने के लिए हमें सीमाओं को मजबूत रखना होगा। 1970 और 80 के दशक में चीन और पाकिस्तान

Leave a Comment