Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr-indu-kumari, poem

बलात्कार

 बलात्कार डॉ. इन्दु कुमारी  दरिंदगी की पहचान है  समाज का अभिशाप है  गंदगी की अंबार है  संकुचित विचारों का  गंदी …


 बलात्कार

डॉ. इन्दु कुमारी
डॉ. इन्दु कुमारी

 दरिंदगी की पहचान है 

समाज का अभिशाप है

 गंदगी की अंबार है 

संकुचित विचारों का

 गंदी सोच की विकृतियां है 

समाज की विसंगतियां है 

यह कोढ़ जहां पनप रहा

पाप का अंबार पड़ा

जड़ से इसे मिटाना है

 जिंदगी को बचाना है 

यह गंदगी भरी हवाएं 

भावी पीढ़ी सुरक्षित करवाएं 

प्रेम बल प्रदान करने वाला

बलात्कार शोकित करने वाला

मनुष्य मनुष्यता जब खोता है 

घर समाज की क्या कहूं 

यह विश्व पटल रोता है 

संकीर्णता के बलिवेदी पर

 जब कोई मासूम चढ़ते हैं 

जीवन अभिशाप बनते हैं

 गला घोट दी जाती है 

 सिसकियों को दबाए जाते हैं 

यही बलात्कार कहलाते हैं।

       डॉ. इन्दु कुमारी 

मधेपुरा बिहार


Related Posts

वो तैयार बैठी हैं अब- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

वो तैयार बैठी हैं अब लोकतंत्र में…चुनी गईं सरकारेंजनता की आवाज उठाने के लिए,निरंकुश हो,तैयार बैठी हैं अबजनता की ही

छोड़ दिए गये हैं मर जाने के लिए-जितेन्द्र ‘कबीर’

February 14, 2022

छोड़ दिए गये हैं मर जाने के लिए बहुत वक्त और संसाधन लग जातेकिसी देश के…इस कोरोना नामक महामारी कोपूरी

तोड़ा क्यों जाए?- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

तोड़ा क्यों जाए? गुलाब!तुम सलामत रहनाअपनी पत्तियों, टहनियों, जड़ों,परिवेश और वजूद के साथ,तुम्हारी महक और खूबसूरतीका इस्तेमाल नहीं करना है

विरोध के स्वप्न और इंसानी कायरता- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

विरोध के स्वप्न और इंसानी कायरता आज मेरे स्वप्न में..पेड़ों ने हड़ताल कीपरिंदों के आज़ादी सेआकाश में उड़ने परलगे प्रतिबंधों

मां शारदे वंदना- डॉ. इन्दु कुमारी

February 14, 2022

ओ शारदे मां ज्ञान ओ शारदे मां ज्ञान की गंगा बहा दे मांमैं हूं अज्ञानी नेह कीकृपा बरसाओ नातू ही

खुशियां दिखावे की- डॉ इंदु कुमारी

February 14, 2022

खुशियां दिखावे की ना तुम खुश हो ना हम खुश हैं यह खुशियां है दिखावे की यह जमाना है बड़े

Leave a Comment