Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh, , Veena_advani

बलात्कार गुनाह और स्वैच्छिक बलात्कार नहीं

बलात्कार गुनाह और स्वैच्छिक बलात्कार नहीं बलात्कार शब्द एक ऐसा शब्द है जिसे सुनकर दिल क्रोध से भर जाता है …


बलात्कार गुनाह और स्वैच्छिक बलात्कार नहीं

बलात्कार गुनाह और स्वैच्छिक बलात्कार नहीं

बलात्कार शब्द एक ऐसा शब्द है जिसे सुनकर दिल क्रोध से भर जाता है । बलात्कार के अंतर्गत बलात्कारी अब यह भी नहीं देखते कि जिसका बलात्कार हो रहा वो किस उम्र , किस लिंग का है सिर्फ अपने हवस की भूख मिटाने के लिए किसी की जिंदगी , भावनाओं , रिश्तों को तार-तार कर देते हैं , उनको तो सिर्फ और सिर्फ बस कोई शिकार चाहिए होता है , एसे अपराधी हवस के पुजारी को सज़ा मिलनी ही चाहिए ।

 बलात्कार जो कि एक जघन्य अपराध है । एक इंसान को कोई हक नहीं बनता कि वो किसी कि इच्छा के विरूद्ध उसके जिस्म को नोचकर , छुकर उसका विनय भंग करें । हमारे भारत देश में ऐसे अपराधी के लिए सज़ा भी मुकम्मल है परंतु हां बस अफ़सोस इस बात का कि सज़ा मिलने में सालों लग जाते हैं जूतियां घिस जाती बलात्कारी को सज़ा दिलवाने मे , इस संदर्भ मे हमारे देश की सरकार को कानूनी नियम के अंतर्गत फेर-बदल कर सुधार करना चाहिए ।

अब यहां बात करते हैं दूसरे तरह का बलात्कार जिसे मैं नाम देती हूं स्वेच्छिक बलात्कार। जो कि बलात्कार तो है , परंतु इच्छा के विपरित नहीं बल्कि स्वेच्छा से या ये मुहावरा सीधे से बैठता है कि *आ बैल मुझे मार* जब बैल ने मार दिया तो डंडे लेकर उसके पीछे भागना कहां तक उचित है ।
स्वैच्छिक मतलब जो आपकी सहमती से हुआ और जब सब हो गया तो उसे बलात्कार का नाम देकर अदालत के दरवाजे खटखटाना सरासर बेवकूफी । इस स्वैच्छिक बलात्कार कि जो शिकार बनती हैं वो हैं , महामूर्ख वो महिलाएं जो अपने पैर पर खुद कुल्हाड़ी से वार करती है और अपने साथ-साथ दूसरों कि जिंदगी संग भी खिलवाड़ करती हैं । आज वर्तमान युग मे ये देखा गया है कि वैवाहिक रिश्ते पहले की तरह मिठास भरे नहीं होते हैं , वैचारिक मतभेद , सहन शक्ति कि कमी , अहंकार , जवाब देना आदि बहुत से कारण हैं वैवाहिक जिन्दगी में मतभेद के । जिसके चलते बहुत सी औरतें सोशल मीडिया पर या अपने परिचित मित्रों के संपर्क मे रह कर उनसे नजदीकियां बड़ा लेती है । उन्हें अपने वैवाहिक जीवन में घटित छोटी सी छोटी बात बताना शुरू कर देती हैं जिससे बाहर के पुरुष मित्र इसका फायदा उठाते हुए आग मे घी डालते हुए महिलाओं को उनके ही परिवार के खिलाफ करते हुए अपने कांधे का सहारा देते हैं । महिलाएं या ये कहूं बेवकूफ महिलाएं तो ये कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी ऐसे पुरुषों कि मीठी चुपड़ी बातों मे इस कदर उलझ जाती हैं कि अपना सर्वोपरि उन पराए मर्दों पर न्यौछावर करती चली जाती हैं । धीरे-धीरे ये दोस्ती प्रगाढ़ता कि हद तक पहुंच कर उस हद कि मर्यादा को भी तार-तार कर जिस्मानी ताल्लुकात तक पहुंच जाती है । जब सब लुट जाता है और पुरुष प्रधान को जो चाहिए होता है वो तो वो पा चुका होता है और फिर लग जाता नये शिकार की तलाश मे, मन भर जाने पर वो उस महिला को त्याग आगे बढ़ जाता है और महिला उसके प्यार मे दीवानी हो आंसुओं से घिर टूटी और बेजार सी हो जाती है । जब इनको होंश आता है तो इन्हें समझ आता है कि इनके पति बेहतर थे और उनकी छांव मे वो सुरक्षित भी थी । परंतु सिर्फ अहम् का भाव रिश्तों को तार-तार कर गया । बाद मे बहुत सी महिलाएं तो इस अंधे प्यार अवैधानिक रिश्ते के कारण अपने परिवार , पति , बच्चों को भी छोड़ देती हैं सिर्फ पराए पुरुष के लिए , कुछ सब लुटा के खाली हाथ खामोशी धारण कर लेती हैं । तो कुछ बलात्कार का इल्ज़ाम लगाकर केस कर देती हैं । और समाज को यही कहती फलाने ने मेरे साथ गलत किया फिर छोड़ दिया । जब कि ऐसे रिश्ते को बलात्कार नाम देना उचित है ? जवाब है नहीं । क्यों कि ये जो भी होता है वो दोनों तरफ के राज़ी नामे से ही होता है । महिला कोई दूध पीती छोटी बच्ची नहीं है और ना ही कोई कुंवारी कन्या , बस फर्क इतना है स्वैच्छिक बलात्कार मे जो महिला अहंकार मे डूब पर भ्रमित है उसे और अधिक पथ भ्रमित पराए मर्द ने किया । और फिर उसने शारिरीक शोषण कर मज़े भी लूटे और मन भरने पर या दूसरा शिकार मिलने पर त्याग दिया। एसी महिलाएं *ना तो घर कि रही ना घाट की* और फिर चली देती केस करने पर महिलाओं ये नहीं जानती कि जो हुआ उसमें आपकी मूर्खता संलग्न होती है इसमें केस कर आप पूरी दुनिया के लिए भी हंसी का पात्र बनती साथ ही आपके अपने जो दिल से अपने थे आपका बहिष्कार करते । बस फिर क्या आपके पास पश्चाताप के अलावा कुछ शेष नहीं रह जाता आप जैसी महिलाओं पर एक गाना बिल्कुल सटीक बैठता *सब कुछ लुटा के होंश में आए तो क्या हुआ* । इसलिए अहम् की भावना त्याग अपने अपनों को पहचाने आज कल ऐसे जघन्य अपराध में लिप्त हमारे आसपास के या सोशल मीडिया के लोग हर पल घात लगाए रहते शिकार के लिए । समझदारी से काम करें भावनाओं और मिठी बातों मे ना फंसें ।

About author

Veena advani
वीना आडवाणी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र

Related Posts

Shradh lekh by Jay shree birmi

September 22, 2021

 श्राद्ध श्रद्धा सनातन धर्म का हार्द हैं,श्रद्धा से जहां सर जुकाया वहीं पे साक्षात्कार की भावना रहती हैं।यात्रा के समय

Hindi divas par do shabd by vijay lakshmi Pandey

September 14, 2021

 हिन्दी दिवस पर दो शब्द…!!   14/09/2021           भाषा  विशेष  के  अर्थ में –हिंदुस्तान की भाषा 

Hindi divas 14 september lekh by Mamta Kushwaha

September 13, 2021

हिन्दी दिवस-१४ सितम्बर   जैसा की हम सभी जानते है हिन्दी दिवस प्रति वर्ष १४ सितम्बर को मनाया जाता हैं

maa ko chhod dhaye kyo lekh by jayshree birmi

September 13, 2021

 मां को छोड़ धाय क्यों? मातृ भाषा में व्यक्ति अभिव्यक्ति खुल के कर सकता हैं।जिस भाषा सुन बोलना सीखा वही

Hindi maathe ki bindi lekh by Satya Prakash

September 13, 2021

हिंदी माथे की बिंदी कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, साक्षर से लेकर निरीक्षर तक भारत का प्रत्येक व्यक्ति हिंदी को

Jeevan aur samay chalte rahenge aalekh by Sudhir Srivastava

September 12, 2021

 आलेख        जीवन और समय चलते रहेंगें              कहते हैं समय और जीवन

Leave a Comment