Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

बयानवीरों की आफ़त – युवा नेता को दो वर्षों की सजा फ़िर ज़मानत

आओ लफ़्ज़ों को जुबां से संभलकर निकालें बयानवीरों की आफ़त – युवा नेता को दो वर्षों की सजा फ़िर ज़मानत …


आओ लफ़्ज़ों को जुबां से संभलकर निकालें

बयानवीरों की आफ़त – युवा नेता को दो वर्षों की सजा फ़िर ज़मानत

बयानवीरों की आफ़त - युवा नेता को दो वर्षों की सजा फ़िर ज़मानत

सार्वजनिक जीवन में शब्दों की मर्यादा का बंधन जरूरी – आर्टिकल 19 (2)प्रतिबंध को रेखांकित करना समय की मांग – एडवोकेट किशन भावनानी

गोंदिया – अंतरराष्ट्रीय स्तरपर किसी भी देश को सुचारू रूप से चलाने के लिए संविधान की आवश्यकता पड़ती है।संविधान, कानूनों का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो सरकार की मूल संरचना और इसके कार्यों को निर्धारित करता है, जो सरकार के अंगों तथा नागरिकों के आधारभूत अधिकारों को परिभाषित तथा सीमांकित करता है।भारत में भी संविधान पारित – 29 अगस्त 1947 को वी एन राव द्वारा तैयार किए गए संविधान के प्रारूप पर विचार विमर्श करने के लिए डॉ भीमराव आंबेडकर की अध्यक्षता में प्रारूप समिति का गठन किया गया। 21 फरवरी 1948 को समिति ने अपनी रिपोर्ट संविधान सभा में पेश की। पहले और दूसरे वाचन के बाद 7,635 संशोधन पेश किए गए, जिनमें से 2,437 को स्वीकार कर लिया गया। तीसरा वाचन 14-26 नवंबर 1949 को पूरा हुआ और संविधान सभा द्वारा संविधान को पारित कर दिया गया।
साथियों बात अगर हम दिनांक 23 मार्च 2023 को लोकसभा में विपक्ष के युवा नेता को दो वर्ष की सजा की करें तो, उन्होंने 2019 में कर्नाटक की चुनावी रैली में विवादित बयान दिया था। रैली कर्नाटक के कोलार में थी और उन्होंने मोदी सरनेम पर टिप्पणी की थी। एक नेता और विधायक ने उनके बयान के खिलाफ मानहानि का केस सूरत में किया था। बयान था, सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है। इस बयान से जुड़े मानहानि केस में युवा नेता को सूरत कोर्ट ने गुरुवार को दोषी करार दिया। इस फैसले के 27 मिनट बाद कोर्ट ने उन्हें दो साल की जेल की सजा सुनाई और 15 हजार का जुर्माना भी लगाया। इसके कुछ देर बाद कोर्ट ने उन्हें जमानत भी दे दी। साथ ही सजा को 30 दिन के लिए स्थगित कर दिया। सुनवाई के दौरान युवा नेता कोर्ट में मौजूद रहे। उनको आईपीसी की धारा 499 और 500 के तहत दोषी करार दिया गया है। इसमें 2 साल की सजा का प्रावधान है। उनके वकील ने कोर्ट से कहा- इस पूरी घटना में कोई घायल नहीं हुआ। इससे किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। इसलिए हम किसी प्रकार की दया की याचना नहीं करते हैं। युवा नेता कोर्ट में अपना पक्ष रखा। उनके वकील के मुताबिक, उन्होंने कहा कि बयान देते वक्त मेरी मंशा गलत नहीं थी। मैंने तो भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई थी।’ उधर, कोर्ट के बाहर विधायक और याचिकाकर्ता और उनके समर्थकों ने नारे लगाए। सजा के बाद युवा नेता बोले- सत्य मेरा भगवान है। उनकी बहन ने कहा- मेरे भाई न कभी डरे हैं, न कभी डरेंगे। युवा नेता पर पिछले 4 साल से मानहानि का मामला चल रहा था। कोर्ट ने 17 मार्च को इस मामले में सभी दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।इसके पूर्व भी यूपी के एक बहुत बड़े नेता को 2 वर्ष की सजा सुनाई गई है।
साथियों हम अधिकारों को लेकर बहुत सतर्क, सजग और चौकस रहते हैं। संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों की बात आते ही हमारा लहजा शिकायती हो जाता है। सही मुंह और मूड को बुरा सा बनाकर सरकारों और संवैधानिक संस्थाओं पर तोहमत लगाने लगते हैं। हमें यह नहीं मिल रहा है हमें वो नहीं हासिल है। हमें इसकी आजादी चाहिए हमें उसकी आजादी चाहिए। बहुत खूब! दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के नागरिकों का यह जोश और जज्बा किसी को भी उनकी जागरूकता की डिग्री पर सोचने को विवश कर सकता है। सोच का दूसरा पहलू भी देखिए, जिस संविधान ने हमें मौलिक अधिकारों को उपहार के रूप में नवाजा है, उसी ने कर्तव्यों के दायित्वबोध की टोकरी का बोझ और आर्टिकल 19(2) भी सिर पर लाद दिया है जिसकी तरफ हमारा ध्यान शायद कम जाता है। अगर हम आर्टिकल 19 के मौलिक अधिकार दिए हैं तो आर्टिकल 19 (2) के अंतर्गत सम्मेलन के इस अधिकार को निर्बंधित भी किया जा सकता है। इस अधिकार पर प्रतिबंध निम्नांकित आधारों पर किया जा सकता है। किसी भी नागरिक को ऐसी सभा या सम्मेलन आयोजित करने की स्वतंत्रता नहीं दी जा सकती जिससे लोग शांति भंग हो अथवा देश की प्रभुता एवं अखंडता या लोक व्यवस्था संकट में पड़ जाए। चूंकि दिनांक 3 जनवरी 2023 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने डब्ल्यूपी (सी) 113/2016 कौशल किशोर बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के मामले में, पांच जजों की संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी पर संविधान के अनुच्छेद 19 (2) में दी गई शर्तों के अलावा अतिरिक्त प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दूरगामी परिणाम वाला फैसला तथा संविधान के आर्टिकल 19 (2) अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिबंध है को रेखांकित करना समय की मांग है।
साथिया बात अगर हम दिनांक 3 जनवरी 2023 को आए सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ में पारित फैसले की करें तो, पीठ ने 4:1 के बहुमत से फैसला सुनाया है कि मंत्रियों के बयानों के लिए सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। पीठ ने जिन प्रश्नों पर विचार किया गया उनमें से एक यह था कि क्या राज्य के किसी भी मामले या सरकार की सुरक्षा के लिए मंत्री द्वारा दिए गए बयान को विशेष रूप से सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है? सवाल का जवाब देते हुए जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यन के बहुमत ने कहा है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक याचिका में सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के लिए बोलने की आजादी पर गाइडलाइन बनाने की मांग की गई थी। दरअसल, नेताओं के लिए बयानबाजी की सीमा तय करने का मामला 2016 में बुलंदशहर गैंग रेप केस में उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री की बयानबाजी से शुरू हुआ था। उन्होंने जुलाई 2016 के बुलंदशहर गैंग रेप को राजनीतिक साजिश कह दिया था। इसके बाद ही यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि आओ लफ़्ज़ों को जुबां से संभलकर निकालें। बयानवीरों की आफ़त – युवा नेता को दो वर्षों की सजा फ़िर ज़मानत।सार्वजनिक जीवन में शब्दों की मर्यादा का बंधन जरूरी – आर्टिकल 19 (2) प्रतिबंध को रेखांकित करना समय की मांग है।

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

Related Posts

ईडी, सीबीआई के कथित दुरुपयोग की याचिका सुनने से इनकार

April 6, 2023

उई बाबा! जोर का झटका धीरे से! ईडी, सीबीआई के कथित दुरुपयोग की याचिका सुनने से इनकार – 14 राजनीतिक

भविष्य अपना क्या हैं? Bhavishya apna kya hai?

April 5, 2023

 भविष्य अपना क्या हैं? हम जो आजकल विज्ञान की अद्भुत शोध का उपयोग कर के जीवन को आसान बनाने की

बाक्सिंग की दुनिया में भारत की महिलाओं के पावर पंच का कमाल

April 5, 2023

बाक्सिंग की दुनिया में भारत की महिलाओं के पावर पंच का कमाल सातत्य ही विकास का खरा स्तंभ है। नई

प्रेम क्या है ? “ आइ लव यू / लव यू ” | Prem kya hai

April 5, 2023

 प्रेम क्या है ? “ आइ लव यू / लव यू ” आज के जमाने में साधारण सी से बात

बुराई तब बढ़ती है जब अच्छे लोग कुछ नहीं करते

April 5, 2023

 “बुराई तब बढ़ती है जब अच्छे लोग कुछ नहीं करते”   अच्छे लोगों पर अपने समुदाय को बनाए रखने के

हनुमान जी – साहस, शौर्य और समर्पण के प्रतीक

April 5, 2023

 हनुमान जी – साहस, शौर्य और समर्पण के प्रतीक हनुमान, जिन्होंने सीता देवी को दिखाने के लिए अपना हृदय खोल

PreviousNext

Leave a Comment