Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Laxmi Dixit, lekh

बड़े काम का रेजोल्यूशन

बड़े काम का रेजोल्यूशन एक बार फिर रेजोल्यूशन बनाने का दिन आ ही गया, नए साल के साथ। बिहेवियर साइकोलॉजी …


बड़े काम का रेजोल्यूशन

एक बार फिर रेजोल्यूशन बनाने का दिन आ ही गया, नए साल के साथ। बिहेवियर साइकोलॉजी कहती है कि इंसान को रेजोल्यूशन बनाने की फीलिंग दो बार आती है या तो न्यू ईयर पर या फिर अपने बर्थडे पर। और रेजोल्यूशन चाहे कितने भी दिन निभाया जाए लेकिन बनाने जरूर चाहिए क्योंकि इससे जीवन में एक उत्साह और नयापन आता है। जीवन को एक गति मिलती है।एक नियमित दिनचर्या में ढल जाता है जीवन। जो की न केवल लक्ष्य को पूरा करने के लिए जरूरी होता है बल्कि हेल्दी और फिट रहने के लिए भी बहुत आवश्यक है। यह हमारे व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। रेजोल्यूशन सिर्फ एक शब्द नहीं, एक संकल्प है और इसके पीछे जो इच्छाशक्ति काम करती है वही निर्णायक होती है कि यह पूरा होगा या नहीं। संकल्प शक्ति और इच्छा शक्ति का महत्व न केवल हमारे व्यक्तित्व विकास में है बल्कि यह जीवन की दिशा और दशा दोनों को निर्धारित करता है। यह हमारी कार्य प्रणाली को एक सकारात्मक इंपल्स (धक्का) प्रदान करता है जिससे कि जीवन का मोमेंटम (गति) सुचारू रूप से प्रगति की राह पर चल सके।

बिहेवियर साइकोलॉजी में भी कहा गया है की रेजोल्यूशन चाहे थोड़े समय के लिए ही कायम रखे जाएं पर उन्हें बनाना जरूर चाहिए क्योंकि इससे कुछ महीने के लिए ही सही पर जीवन में एक नियमत्ता, डिसिप्लिन आता है और हमें यह पता चलता है कि हमारी इच्छाशक्ति कितनी प्रबल है और जब हमारी इच्छाशक्ति प्रबल होती है तो उसका सकारात्मक परिणाम यह होता है कि यह हमें भीतर से एक साहस प्रदान करती है जिसकी चमक न केवल हमारे व्यक्तित्व में बल्कि हमारे चेहरे, हमारी आंखों में झलकती है।

मशहूर बिहेवियर साइकोलॉजिस्ट और चॉइसोलॉजी पॉडकास्ट की होस्ट कैटी मिल्कमैन अपनी राष्ट्रीय बेस्ट सेलर बुक ‘हाउ तो चेंज: द साइंस फ्रॉम वियर यू आर टू वियर यू वांट टू बी’ में लिखती हैं की परिवर्तन तब सबसे आसानी से आता है जब आप यह समझते हैं कि आपके और सफलता के बीच में बाधा क्या है और आप उसके उन्मूलन के लिए सतत प्रयास करते हैं। जैसे कि अगर आप व्यायाम करने को अपना रूटीन बनाना चाहते हैं लेकिन यह काम आपको उबाऊ लगता है और आप कुछ ही दिनों में इसे नियमित जारी रखने में स्वयं को असमर्थ पाते हैं तो लक्ष्य निर्धारण फिटनेस एप डाउनलोड करने से वांछित परिवर्तन नहीं आएगा। क्या हो अगर आप वर्कआउट को बदलकर इसे कामकाज के बजाय आनंद का साधन बना दें।

मानव मस्तिष्क के लिए कोई काम तब उबाऊ और बोझ बन जाता है जब वह इसे काम समझ कर करता है लेकिन अगर इसे वह आनंद, मौज-मस्ती का साधन मानकर करें तो वही काम उसके लिए आनंद का स्रोत बन जाता है।और तब दिमाग से स्राव होता है एक केमिकल का जिसका नाम है डोपामिन जो हमें खुशी और आनंद का बोध कराता है। एक कठिन लड़ाई को ढलान पर ले जाना ही सफलता है।सोरेन कियरकेगार्ड ने कहा है – ‘जीवन की सबसे ऊंची और खूबसूरत चीज को ना कभी हम सुन पाते हैं, ना देख पाते हैं, ना पढ़ पाते हैं। अगर ऐसी कोई चीज है तो वह हम जीते हैं।’ तो आइए एक रेजोल्यूशन लेते हैं और उसको अपनी दिनचर्या में शामिल कर जीते हैं।

About author 

Laxmi Dixit
लक्ष्मी दीक्षित
(लेखिका, आध्यात्मिक गाइड)

Related Posts

मणिपुर चीरहरण विशेष | Manipur Chirharan Special

July 23, 2023

मणिपुर चीरहरण विशेष | Manipur Chirharan Special चीरहरण को देख कर, दरबारी सब मौनप्रश्न करे अँधराज पर, विदुर बने वो

Manipur news today :महिलाओं की सुरक्षा पर राजनीति गरमाई

July 22, 2023

मणिपुर मामले का आकार – मानसून सत्र लाचार – हंगामे का वार पलटवार महिलाओं की सुरक्षा पर राजनीति गरमाई –

Manipur news:महिलाओं के साथ दरिंदगी

July 21, 2023

Manipur news:महिलाओं के साथ दरिंदगी  140 करोड़ देशवासियों के लिए शर्मिंदगी  संवैधानिक लोकतंत्र में महिलाओं के साथ शर्मसार दरिंदगी अस्वीकार

पीड़ा जाते हुए उपहार दे जाएगी अगर…

July 20, 2023

पीड़ा जाते हुए उपहार दे जाएगी अगर… तड़पते– तड़पते इंसान सब्र करना सीख जाता है और यह तब होता है

State Emblem of India (Prohibition of Improper Use) Act 2005 Vs INDIA

July 20, 2023

भारत का राज्य प्रतीक (अनुचित उपयोग व निषेध) अधिनियम 2005 बनाम आई.एन.डी.आई.ए, टैग लाइन जीतेगा भारत 2024 सियासी की लड़ाई

पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं पर करेक्टर सर्टिफिकेट जल्दी लग जाता है

July 19, 2023

पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं पर करेक्टर सर्टिफिकेट जल्दी लग जाता है समाज कहता है कि पुरुष यानी तांबे का लोटा।

PreviousNext

Leave a Comment