Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Garima-Khandelwal, poem

फरेबी मुस्कान-गरिमा खंडेलवाल

फरेबी मुस्कान मुहब्बत में कोई सौदा वफ़ा का वादा नहीं होताहोता है प्यार जब कोईचाहत का इरादा नहीं होता एक …


फरेबी मुस्कान

फरेबी मुस्कान-गरिमा खंडेलवाल
मुहब्बत में कोई सौदा

वफ़ा का वादा नहीं होता
होता है प्यार जब कोई
चाहत का इरादा नहीं होता

एक फरेबी मुस्कान
से लूट ले जाता है
प्यार के नाम पर ख्वाब
झूठे वादे कर जाता है
फिर कोई एहसास प्यार पर
विश्वास नही होता

फूल महकते है
बहार के आने पर
तारे छुप जाते है
बादल के छा जाने पर
जब कोई बिना बात
के मुस्कुराए जरूरी नही
वो मुहब्बत में होगा।

चलते है कदम बिना
जाने मंजिल का पता
जाने कहा जायेगे हम
बेवफा नाम पा कर
प्यार के बदले प्यार मिले
मुहब्बत में ऐसा
रिवाज नहीं होगा।

नमक से धूल जाते है दाग
बेवफा का
दाग हटता ही नहीं
आखों में आसू आए
सताए याद तेरी क्या होगा
होगा बस इतना पानी
समुंदर का खारा होगा ।

स्वरचित एवं मौलिक 
गरिमा खंडेलवाल
उदयपुर राजस्थान


Related Posts

बंद कमरों की घुटन-सुधीर श्रीवास्तव

May 9, 2022

 बंद कमरों की घुटन आधुनिकता की अंधी दौड़ में हमने खुद ही खुद को कैद कर लिया है कंक्रीट के

कविता डिजिटल भारत मेक इन इंडिया

May 9, 2022

कविता डिजिटल भारत मेक इन इंडिया रचनात्मक नवाचार से जुड़ा विज्ञान आम आदमी के लिए जीवन में सहजता लाता है

शोहरतों का परचम- सुधीर श्रीवास्तव

May 9, 2022

 शोहरतों का परचम शोहरतों के परचम  लहराने का गर इरादा है तो कुछ ऐसा कीजिए जो अलग हो औरों से

ज़िंदगी- सुधीर श्रीवास्तव

May 9, 2022

 ज़िंदगी वाह री जिंदगी तू भी कितनी अजीब जाने क्या क्या गुल खिलाती है कभी हंसाती, कभी रुलाती है और

कविता – ख्वाब – सिद्धार्थ गोरखपुरी

May 9, 2022

 कविता – ख्वाब  ये ख्वाब न होते तो क्या होता? झोपड़ी में रहने वाले लोग जब थोड़े व्यथित हो जाते

जलियांवाला बाग-

May 9, 2022

 जलियांवाला बाग बैशाखी का पावन दिन तारीख तेरह अप्रैल उन्नीस सौ उन्नीस एक सभा हो रही थी रौलेट एक्ट का

PreviousNext

Leave a Comment