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Garima-Khandelwal, poem

फरेबी मुस्कान-गरिमा खंडेलवाल

फरेबी मुस्कान मुहब्बत में कोई सौदा वफ़ा का वादा नहीं होताहोता है प्यार जब कोईचाहत का इरादा नहीं होता एक …


फरेबी मुस्कान

फरेबी मुस्कान-गरिमा खंडेलवाल
मुहब्बत में कोई सौदा

वफ़ा का वादा नहीं होता
होता है प्यार जब कोई
चाहत का इरादा नहीं होता

एक फरेबी मुस्कान
से लूट ले जाता है
प्यार के नाम पर ख्वाब
झूठे वादे कर जाता है
फिर कोई एहसास प्यार पर
विश्वास नही होता

फूल महकते है
बहार के आने पर
तारे छुप जाते है
बादल के छा जाने पर
जब कोई बिना बात
के मुस्कुराए जरूरी नही
वो मुहब्बत में होगा।

चलते है कदम बिना
जाने मंजिल का पता
जाने कहा जायेगे हम
बेवफा नाम पा कर
प्यार के बदले प्यार मिले
मुहब्बत में ऐसा
रिवाज नहीं होगा।

नमक से धूल जाते है दाग
बेवफा का
दाग हटता ही नहीं
आखों में आसू आए
सताए याद तेरी क्या होगा
होगा बस इतना पानी
समुंदर का खारा होगा ।

स्वरचित एवं मौलिक 
गरिमा खंडेलवाल
उदयपुर राजस्थान


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