Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Prem Thakker

प्रेम इंतज़ार कर रहा है | kavita prem intezar kar raha hai

कविता : प्रेम इंतज़ार कर रहा है सुनो दिकु…दिल के दर्द की पीड़ा अब नहीं सही जा रहीमेरे होंठों पर …


कविता : प्रेम इंतज़ार कर रहा है

प्रेम इंतज़ार कर रहा है | kavita prem intezar kar raha hai

सुनो दिकु…
दिल के दर्द की पीड़ा अब नहीं सही जा रही
मेरे होंठों पर पहले-सी खिलखिलाहट अब नहीं आ रही
बस करो, अब और ना तड़पाओ
प्रेम इंतजार कर रहा है, चले आओ

सांसे रुक-रुक कर चलती हैं
बस अब ऐसे ही मेरी हर शाम ढलती हैं
क्यों दूर हो मुझ से, कारण तो बताओ
प्रेम इंतजार कर रहा हैं, चले आओ

में जानता हूँ कि तुम्हें भी प्रेम हैं प्रेम से
पर बंधी हुई हो ज़िम्मेदारी से
में तुम्हारे हर निर्णय से सहमत हूँ
बस सिर्फ एक बार प्रेम की हालत देख जाओ
प्रेम इंतजार कर रहा हैं दिकु, प्लीज़ चले आओ

प्रेम का इंतज़ार अपनी दिकु के लिए

About author

प्रेम ठक्कर | prem thakker

प्रेम ठक्कर
सूरत ,गुजरात 

ऐमेज़ॉन में मैनेजर के पद पर कार्यरत  

Related Posts

प्रकृति की गोदी- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 15, 2021

प्रकृति की गोदी ध्यान साधना वरदान प्रकृति की,हम शोध खोज न कर पाते हैं ,पूर्ण प्रकृति हमारी ध्यान मग्न है

एक समय था – अनीता शर्मा

December 15, 2021

एक समय था एक समय था–जब साथ सभी रहते थे। चाचा चाचाजी और बच्चे–ताऊ ताई और बच्चे। कितना बड़ा परिवार

अगले जनम मोहे नारी ही कीजो – डॉ. माध्वी बोरसे

December 13, 2021

अगले जनम मोहे नारी ही कीजो! अगले जनम मोहे नारी ही कीजो,दोबारा मेरे माता-पिता को, प्यारी सी बिटिया ही दीजो,फिर

ना होता मासिक धर्म, ना होता तेरा जनम- डॉ. माध्वी बोरसे

December 13, 2021

ना होता मासिक धर्म, ना होता तेरा जनम! कुदरत से दी गई चीजें, कभी खराब नहीं होती, अगर मासिक धर्म

श्रद्धांजलि-नंदिनी लहेजा

December 10, 2021

श्रद्धांजलि नम हैं हिंदुस्तान आज , जो खोया वीर सपूत।जीवन साथी संग उनके,जाबांज़ वीर भी, क्षति हुई अभूत।इक ज़लज़ला आया

अपना एक घर- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 10, 2021

अपना एक घर बहुत आलीशान न भी हो,मामूली-सी छत के नीचे होचाहे साधारण सा एक कमरा,घांस-फूस से बनी झोंपड़ी होअथवा

Leave a Comment