Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

प्रथम नारी जासूस को नमन/pratham naari jasoos ko naman

 प्रथम नारी जासूस को नमन/pratham naari jasoos ko naman       २६ जुलाई को जिनकी पुण्य तिथि है ,उन …


 प्रथम नारी जासूस को नमन/pratham naari jasoos ko naman

प्रथम नारी जासूस को नमन/pratham naari jasoos ko naman

      २६ जुलाई को जिनकी पुण्य तिथि है ,उन नीरा आर्य को शत शत नमन।५ मार्च १९०२ को उत्तर प्रदेश के मेरठ के खेकड़ा गांव में कुलीन जाट परिवार में जन्मी थी।

 माता– पिता की बीमारी के कारण बहुत कर्ज होने की वजह से सारी मिल्कियत साहूकारी द्वारा कुर्क कर ली गई और अपने छोटे भाई बसंत कुमार साथ दर दर भटक ने की नौबत आ गई।इसी भटकन के दौरान हरियाणा के सेठ छज्जूमल मिले जो बड़े व्यापारी थे और वैश्य समाज में उनका बहुत बड़ा नाम था।वैसे वह खुद हरियाणवी जाट समाज से थे।छज्जूराम दानवीर और देशभक्त थे।उन्हों ने दोनों भाई–बहन को गोद ले लिया और अच्छे से लालन पालन करने लगे।कलकत्ता में उनका बहुत बड़ा कारोबार था और वे पक्के आर्यसमाजी भी थे।वीर भगतसिंह भी एकबार पुलिस से छिपते हुए उनके वहां महीना भर रहे थे।सेठजी ने नीरा का ब्याह श्रीकांत जयरंजन दास जो शिक्षित और धनवान भी थे।किंतु वह ब्रिटिश खुफिया विभाग में अफसर थे ये उनकी जानकारी में नहीं आया था।बाद में जब नीरा को पता लगा उनका पति देशद्रोही हैं और अंग्रेजो के तलवे चाट ने वाला गुलाम हैं तो वह बहुत दुखी हुई।पहले उसे राजा महेंद्र प्रताप और बाद में सुभाष चंद्र बोस की जासूसी में अंग्रेजो ने लगा रखा था।जब नीरा ने आवाज उठाई कि देशद्रोह का काम छोड़ ने के लिए कहा तो उसे कहा गया कि उनको वहां से जितना पैसा मिलता हैं उससे उनकी आने वाली कई पीढ़ियां बिना कमाए ही ऐश करेगी।तब देश भक्ति में रंगी नीरा ने पति का साथ छोड़ चले जाने की बात कही तो जवाब मिला कि पैसे हैं तो पत्नियां बहुत मिल जायेगी।और नीरा छज्जूरामजी के घर लौट आई।

 उनके कई रिश्तेदार आजाद हिंद फौज में शामिल थे उनसे सुना की नेताजी ने झांसी रेजिमेंट बनाई हैं तो वह खुश हो गई और मुंहबोले भाई रामसिंह को बताया कि वह भी नेताजी के सैन्य में भर्ती होने इच्छा रखती है ,तो उनके साथ वह भी आजाद हिंद सेना में भर्ती हो गई।झांसी रेजिमेंट में उसे नेताजी ने अंग्रजों की जासूसी का काम दिया।अपने साथियों के साथ भेष बदल अंग्रेजो की छावनियों में जासूसी करने जाती थी।उन्हे आदेश था कि जासूसी करते पकड़े जाने पर अपने आप को गोली मार मर जाना किंतु जिंदा अंग्रेजों के हाथ नही लगना।एक बार उनकी एक साथी जिंदा अंग्रेजों के हाथ लग गई,उसे छुड़ाने अपने साथियों के साथ छावनी पर हमला कर दिया राजमणि को बचा तो लिया लेकिन पांव में गोली लगने से सदा के लिए लंगड़ी हो गई।

 एकबार नेताजी अपने साथियों के साथ टेंट में सो रहे थे और नीरा को वहा का पहरा देने का कार्य मिला था।वह बंदूक लिए निडर खड़ी थी कि एक साया नजर आया एक आहट के साथ ,देखा तो उनका पति श्रीकांत ,जो नेताजी को मार लाख रूपिए का इनाम लेने की फिराक में था,वह दिखा।तो उसे वहां से चले जाने के लिए बोला लेकिन वह नेताजी की ओर बढ़ रहा था,उसने सोचा भारतीय नारी अपने पति को नहीं मार सकती,नीरा ने अपनी बादुक में लगा छुर्रा उसके पेट में दे मारा तो श्रीकांत ने उन पर गोली चलादी।एक गोली कान के पास से और दूसरी गर्दन को छू कर गुजर गई। बेहोश रखी बहन नीरा को स्वयं नेतेजी ने उठा जीप में डाला और डॉक्टर के पास ले गए और उसे कुछ नहीं होना चाहिए ऐसा बोल इलाज करवाया।

 अपने देश भक्ति के कई जलवे आजाद हिंद फौज में दिखा चुकी नीरा अंग्रेजो के हाथ लग ही गई जब जापानी सैनिकों ने धोखा दिया और जापान का साथ अमेरिकन हमले से की वजह से कम हो गया।कालापानी भेज बहुत यातनाएं दी गई।बहुत ही दुर्व्यवहार कर नेताजी का अता पता पूछा गया।नीरा का आंचल फ़ाड़ लुहार के प्लास से स्तनों को नोंचा गया,अंधेरी तंग कोठरी में रखा गया,मल और पेशाब से सनी कोठरी दुर्गंध से सड़ रही थी।एक हाथ से बांध कर बेहोश होने तक लटकाया गया।अन्न पानी भी कम और दूषित दिया जाता था।आर्यसमाजी शाकाहारी नीरा को मांस खिलाया जाता था।एक बड़े गोल चक्कर में खूब घुमा कर अधमरी नीरा को एक खतरनाक टापू पर फेंक दिया गया।

होश आने पर खतरनाक आदिवासियों के बीच अपने को पा नीरा डर गई।उसने भगवान को याद किया ऊं बोल के तो उन्होंने उसे देवी मान लिया।नीरा ने उन्हें अपनी भाषा में आपबीती सुनाई तो वह थोड़ा बहुत समझ आया ,लेकिन ये समझ गए की नीरा की ये हालत अंग्रेजों ने की थी।उन्हों ने एक मजबूत नांव बना कर खूब खाने की चीजे और पानी दे भेज दिया।जैसे तैसे वह हैदराबाद पहुंची तब तक आजादी का बगल बज चुका था।

 कमजोर शरीर वाली नीरा हैदराबाद में झोपड़ी बना फूल बेच कर गुजरा करने लगी।हैदराबाद मे कट्टरपंथ चरम पर था,माथे पर तिलक लगाने वाली निरा पिटाई कर फूल फेंक दिए।आर्यसमाज का सत्याग्रह अपनी आंखो से देखने वाली नीरा ने अपना तिलक नहीं हटाया।

बूढ़ी हो चुकी नीरा एकबार अपने गांव भी आइ किंतु किसी ने न पहचाना और न ही मदद की,पास के गांव के क्रांतिकारी करणसिंह तोमर ने उन्हें पहचाना और सरकारी मदद लेने के लिए अभ्यर्थना करने को कहा,लेकिन नीरा ने माना कर दिया।उनके पास रहने बोझ नहीं बनना चाहती थी वे सो हैदराबाद लौट आई।

 सरकारी जमीन पर बनी झोपड़ी भी तोड़ दी गई थी। एकदिन तेज बुखार से बेहोश बुड्ढी नीरा को हिंदी दैनिक वार्ता के पत्रकार तेजपालसिंह धामा ने देखा तो अपनी पत्नी मधु धामा के साथ मिल नीरा को अस्पताल में भर्ती करवाया।होश आने पर नीरा ने अपनी आपबीती सुनाई।२६ जुलाई १९९८ के दिन अस्पताल में धमाजी के पास अंतिम सांस ली,धामाजी उनके अंतिम संस्कार का प्रबंध करने गए वापस आए तो उनकी पत्नि नीरा का शब लिए बाहर खड़ी थी,अस्पताल वालों ने ज्यादा भीड़ होने से बाहर निकल दिया था।तिरंगे में लपेट उनका अंतिम संस्कार सम्मान के साथ किया गया।उनका अस्थि कलश,डायरी,पुराने फोटो और अन्य सामान एक मंदिर में आज भी पड़े हैं,स्मारक बन ने की प्रतिक्षा में।

देश की प्रथम महिला जासूस,आजाद हिंद फौज की महान क्रांतिकारी कैप्टन ,नेताजी की राखी बहन,देश भक्त चौधरी छज्जुराम की बेटी,कालापनी की कष्ट भरी सजा भुगतने वाली नीरा आर्य को भारत वासियों के शत शत नमन

जयश्री बिर्मी

निवृत्त शिक्षिका

अहमदाबाद


Related Posts

Lekh man ki hariyali by sudhir Srivastava

July 31, 2021

 लेखमन की हरियाली, लाए खुशहाली     बहुत खूबसूरत विचार है ।हमारे का मन की हरियाली अर्थात प्रसन्नता, संतोष और

Lekh by kishan sanmukh das bhavnani

July 31, 2021

 सत्य वह दौलत है जिसे पहले खर्च करो, जिंदगी भर आनंद पाओ- झूठ वह कर्ज़ है, क्षणिक सुख पाओ जिंदगी

janmdin jeevanyatra by Maynuddin Kohri

July 25, 2021

जन्मदिन —- जीवनयात्रा  आजादी के बाद के काले बादल छट जाने के बाद देश मे अमन चैन,गणतन्त्र भारत की सुखद

Guru govind dono khade kako lagu paye by jayshri birmi

July 23, 2021

गुरु गोविंद दोनो खड़े काको लागू पाए अपने देश में गुरु का स्थान भगवान से भी ऊंचा कहा गया है।

Naari gulami ka ek prateek ghunghat pratha by arvind kalma

July 23, 2021

नारी गुलामी का एक प्रतीक घूंघट प्रथा भारत में मुगलों के जमाने से घूँघट प्रथा का प्रदर्शन ज्यादा बढ़ा क्योंकि

OTT OVER THE TOP Entertainment ka naya platform

July 23, 2021

 ओटीटी (ओवर-द-टॉप):- एंटरटेनमेंट का नया प्लेटफॉर्म ओवर-द-टॉप (ओटीटी) मीडिया सेवा ऑनलाइन सामग्री प्रदाता है जो स्ट्रीमिंग मीडिया को एक स्टैंडअलोन

Leave a Comment