पृथ्वी बोल पड़ी!
पृथ्वी बोल पड़ी! मैं हूं सौरमंडल की सबसे सुंदर ग्रह, जहां जीव जंतु का जीवन है संभव, निवास करती है …
डॉ. माध्वी बोरसे!
Related Posts
कन्यादान नहीं, कन्या-सम्मान।
August 30, 2022
कन्यादान नहीं, कन्या-सम्मान। यह कैसा शब्द है कन्यादान, कौन करता है अपनी जिंदगी को दान,माता- पिता की जान से बढ़कर,कैसे
हां मैं हूं नारीवादी!
August 28, 2022
हां मैं हूं नारीवादी! नारीवाद के प्रमुख प्रकार, स्त्रियों को पुरुषों के समान अधिकार,ऐसा विश्वास या सिद्घांत,भेदभाव का हो देहांत,और
खुद गरीब पर बच्चों को अमीर बनाते हैं पिता
August 28, 2022
कविता: खुद गरीब पर बच्चों को अमीर बनाते हैं पिता खुद गरीब पर बच्चों को अमीर बनाते हैं पिता कभी
मार्ग स्वतः ही बनेगा।
August 25, 2022
मार्ग स्वतः ही बनेगा। प्रारंभ कर जीवन का सफर,त्याग दे आलस का जहर,बस एक बार आरंभ करना है जरूरी,तेरे हित
कब प्रशस्त होगी हर नारी
August 25, 2022
“कब प्रशस्त होगी हर नारी” अब एक इन्कलाब नारियों की जिजीविषा के नाम भी हो, तो कुछ रुकी हुई ज़िंदगियाँ
वजह-बेवजह रूठना
August 25, 2022
वजह-बेवजह रूठना। वजह-बेवजह क्यों बार-बार रूठना,छोटी-छोटी बातों पर बंधनों का टूटना,क्यों ना जीवन में समझदारी दिखाएं,शिष्टाचार, प्रेम और स्वाभिमान के