Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, news

पीपल्स कल्चरल सेंटर के सहयोग से स्पिड संस्था द्वारा बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार के विरुद्ध जागरूकता: डॉ. माध्वी बोरसे!

पीपल्स कल्चरल सेंटर के सहयोग से स्पिड संस्था द्वारा बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार के विरुद्ध जागरूकता: डॉ. माध्वी बोरसे! …


पीपल्स कल्चरल सेंटर के सहयोग से स्पिड संस्था द्वारा बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार के विरुद्ध जागरूकता: डॉ. माध्वी बोरसे!

पीपल्स कल्चरल सेंटर के सहयोग से स्पिड संस्था द्वारा बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार के विरुद्ध जागरूकता: डॉ. माध्वी बोरसे!
देश में बच्चे कितनी विकट स्थितियों से गुजर रहे हैं, इसका अंदाजा केवल कुपोषण और अशिक्षा के आंकड़ों से नहीं लगाया जा सकता। कुछ ऐसे मामले हैं जहां आंकड़े खामोश हो जाते हैं या फिर उनकी आवाज इतनी मद्धिम हो जाती है कि कुछ सुनाई नहीं देता। बच्चों का यौन शोषण ऐसा ही एक मामला है, बच्चों के अधिकार व बाल शोषण के विरुद्ध नेशनल एक्शन कोआर्डिनेशन ग्रुप के माध्यम से जागरूकता अभियान का आयोजन केंद्रीय दिल्ली के क्षेत्र में पीपल्स कल्चरल सेंटर के सहयोग से स्पिड संस्था द्वारा विभिन्न वर्गो जैसे आंगनवाड़ी व आशा वर्कर, अध्यापक, मीडिया, पुलिस व डॉक्टर आदि के साथ बाल शोषण के विरुद्ध सही व अधिक जानकारी हेतु जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन कर रही है | दिल्ली के करोल बाग स्थित होटल हेरिटेज में मीडिया कर्मचारियों के साथ एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया |
कार्यशाला की शुरुआत श्री अवधेश यादव (मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष-स्पिड) द्वारा कार्यशाला में उपस्थित सभी प्रतिभागियों वह अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला की कार्यसूची पर प्रकाश डालते हुए की गई |
जिसके बाद सीडब्ल्यूसी के पूर्व मेंबर मोहम्मद मोहतमिम द्वारा कार्यशाला के विषय में बात करते हुए बताया गया कि बच्चों को पोक्सो एक्ट के विषय में अधिक से अधिक जानकारी देनी चाहिए वह साथ ही पोक्सो एक्ट के अनुसार कितने प्रकार के अपराध होते हैं यह भी बताया साथ ही इन्होंने अपने अनुभव के आधार पर यह भी साझा किया कि बच्चों को बाल यौन से संबंधित शिक्षा भी देनी चाहिए जिससे कि बच्चे बाल यौन जैसे विषयों पर अधिक जानकारी रख सकें वह अपने आप को मजबूत बना सकें |
मो. मोहतमिम द्वारा निर्भया कांड के बाद बाल कानून में आए बदलाव के विषय में भी सभी के साथ साझा किया गया |
मो. मोहतमिम के सत्र के बाद मीडिया प्रतिभागियों में से सवाल पूछा गया कि “क्या हमेशा लड़कियां ही पीड़ित होती है या लड़के भी पीड़ित हो सकते हैं ?” जिसका जवाब देते हुए बताया गया कि बाल यौन शोषण के अंतर्गत लड़कियां ही नहीं बल्कि लड़के भी पीड़ित हो सकते हैं |
जिसके बाद श्री अवधेश यादव ने एडवोकेट स्वाति रॉय का स्वागत करते हुए आग्रह किया जिसके बाद एडवोकेट रॉय ने भी पोक्सो एक्ट के बारे में बताते हुए साझा किया कि पोक्सो एक्ट के अनुसार यदि किसी बच्चे के साथ किसी प्रकार का शोषण होता है और यदि कोई व्यस्क व्यक्ति बच्चे के साथ शोषण होते हुए देख रहा है या बच्चे ने उस व्यक्ति को उसके साथ होने वाले शोषण के बारे में बताया है | और यदि वह व्यक्ति उस बच्चे की सहायता ना करते हुए 24 घंटे के भीतर बच्चे के साथ हो रहे शोषण की जानकारी पुलिस में नहीं देता तो वह व्यक्ति भी दोषी माना जाता है और उसके ऊपर कानूनी कार्यवाही की जाती है साथ ही एडवोकेट रॉय ने मीडिया साथियों को यह राय दी कि किसी भी बच्चे से संबंधित केस में रिपोर्टिंग करते हुए बच्चे की जानकारी मीडिया में अधिक साझा ना करें क्योंकि इससे उस बच्चे व परिवार पर अच्छा प्रभाव नहीं पड़ता है| बल्कि बच्चे के साथ संवेदनशीलता अपनाते हुए बच्चे की गोपनीयता वह गौरव को बनाए रखने पर अधिक बल देना चाहिए | जबकि रिपोर्ट लिखते समय आरोपी के विषय में अधिक से अधिक लिखना चाहिए जिससे कि पीड़ित बच्चे को जल्द से जल्द इंसाफ मिल सके |
साथ ही एडवोकेट रॉय ने बाल शोषण के शिकार हुए बच्चों के लिए मिलने वाले कंपनसेशन आदि के विषय में भी मीडिया को जानकारी साझा की |
एडवोकेट स्वाति रॉय के सत्र के बाद मीडिया साथियों के द्वारा भी अनेकों सुझाव दिए गए व सवाल पूछे गए जैसे: मीडिया साथियों ने , साथ ही युवा क्रांतिकारी लेखक डॉ. विक्रम चौरसिया ने भी विभिन्न एक्ट को ध्यान में रखते हुए कई सुझाव दिए और निम्न कारण भी बताएं, सुझाव दिया कि टीवी पर बहुत से विज्ञापन बार-बार दिए जाते हैं जोकि बच्चों पर बुरा प्रभाव डाल सकते हैं ऐसे विज्ञापन पर रोक लगाना चाहिए |
वही डॉ. माध्वी बोरसे ने अपनी बात रखी की अखबार में भी बहुत सी अनुचित फोटो अधिक मात्रा में होती है जिससे भी बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ता है और अक्सर लड़कियों के साथ होने वाले शोषण को तो मीडिया में दिखाया जाता है परंतु लड़कों के साथ होने वाले शोषण को बहुत कम मीडिया में दिखाया जाता है जबकि लड़कों के साथ होने वाले शोषण को भी दिखाना चाहिए जिससे कि लड़के भी उस पीड़ा के प्रति संवेदनशील हो सके!


Related Posts

जाने के बाद।

August 5, 2022

जाने के बाद। कुछ हो जाने के बाद,उसके बारे में क्यों सोचना,कुछ खो जाने के बाद,उसे सोच कर क्यों रोना।

ईयर टू हियर ने की महिला सशक्तिकरण की दिशा में सार्थक पहल।

August 5, 2022

ईयर टू हियर ने की महिला सशक्तिकरण की दिशा में सार्थक पहल। ,,ईयर टू हियर का वर्ष 2022 का वार्षिक

पीपल्स कल्चरल सेंटर के सहयोग से स्पिड संस्था द्वारा बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार के विरुद्ध जागरूकता: डॉ. माध्वी बोरसे!

August 5, 2022

पीपल्स कल्चरल सेंटर के सहयोग से स्पिड संस्था द्वारा बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार के विरुद्ध जागरूकता: डॉ. माध्वी बोरसे!

पहले नवोदित आईटूयूटू शिखर सम्मेलन का जबरदस्त आगाज़

August 5, 2022

 पहले नवोदित आईटूयूटू शिखर सम्मेलन का जबरदस्त आगाज़  छह महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं की पहचान कर सकारात्मक साझा हित

हजार है!/hazar hai

August 5, 2022

 हजार है! मोहब्बत की तलाश है, गम देने वाले हजार है! सच्चाई की तलाश है, झूठ बोलने वाले हजार है!

स्वयं के जीवन के निर्णय स्वयं से लीजिए!/swayam ke jeevan ke nirnay swayam se lijiye

July 23, 2022

 स्वयं के जीवन के निर्णय स्वयं से लीजिए!/swayam ke jeevan ke nirnay swayam se lijiye  हम सभी को आम तौर

PreviousNext

Leave a Comment