Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel
पापा की परछाई

kanchan chauhan, poem

पापा की परछाई | Papa ki parchhayi

पापा की परछाई पापा ये कभी कह नहीं पाते, कितना प्यार है लाडले बेटे से। देखें हर दम अपनी परछाईं …


पापा की परछाई

पापा ये कभी कह नहीं पाते,
कितना प्यार है लाडले बेटे से।
देखें हर दम अपनी परछाईं ,
अपने लाडले बेटे में।
बिना मांगे ही कुछ भी दे दें,
मांगे तो कितनी बात सुनाते,
नासमझी का आरोप लगाते,
हर पल बस यही जतलाते,
इसे समझ नहीं आनी है।
बेटा भी कभी समझ ना पाए,
पापा, मुझसे क्यों गुस्सा रहते हैं,
मां को बेटा हर बात बताएं,
पापा को कुछ कह ना पाए ।

बाप बेटे के बीच की दूरी,
बस यूं ही बढ़ती जाती है।
संवाद की ये कमी हमेशा,
रिश्तों में दूरी ही लाती है।
पापा का वो लाडला बेटा,
कभी समझ नहीं पाता है ,
क्यों पापा कभी कह नहीं पाते,
कितना प्यार वो करते हैं।
जीवन के अंतिम पड़ाव पर,
जब ये रिश्ता आ जाता है,
इस रिश्ते की गहराई को ,
हर बेटा समझ ही जाता है।
बिन बोले क्यों समझ ना पाया,
ये सोच कर वो पछताता है।

पापा का है लाडला बेटा,
ये सोच कर वो इतराता है,
पापा की हर जिम्मेदारी,
बिन कहे पूरी निभाता है।
पापा का वो लाडला बेटा,
पापा की परछाई बन जाता है।

About author

कंचन चौहान,बीकानेर

Related Posts

Bharat varsh by arun kumar shukla

June 27, 2021

 शीर्षक- भारत वर्ष मस्तक दिव्य हिमालय जिसका, पांव धुले नितसागर इसका। हृदय भाग में बहती है नित , गंगा यमुना

karm hi Ishwar by kamal siwani bihar

June 27, 2021

                      कर्म ही ईश्वर   क्या ईश्वर  मिलता  है  हमको ,

kavita Sandeh by sudhir srivastav

June 27, 2021

 संदेह संदेह के बादल एक बार घिर आये, तो सच मानिए कि फिर कभी न छंट पाये,  मान लिया छंट

bihadon ki bandook by priya gaud

June 27, 2021

 “बीहड़ों की बंदूक” बीहड़ों में जब उठती हैं बंदूकें दागी जाती हैं गोलियां उन बंदूकों की चिंगारी के बल पर

Rajdaar dariya by priya gaud

June 27, 2021

 राज़दार दरिया दरिया  सबकी मुलाकातों की गवाह रहती है कुछ पूरी तो कुछ अधूरी किस्सों की राजदार रहती है आँखे

sawam ki rachyita by priya gaud

June 27, 2021

 “स्वयं की रचयिता” तुम्हारी घुटती हुई आत्मा का शोर कही कैद न हो जाये उलाहनों के शोर में इसलिए चीखों

Leave a Comment