Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

पश्चाताप की अग्नि सुधीर श्रीवास्तव-

पश्चाताप की अग्नि स्तब्ध रह गया धरा गगन मौन हो गये जन के बोल, निष्ठुर ईश्वर तूने खेलाक्यों ऐसा अनचाहा …


पश्चाताप की अग्नि

पश्चाताप की अग्नि सुधीर श्रीवास्तव-
स्तब्ध रह गया धरा गगन

मौन हो गये जन के बोल,

निष्ठुर ईश्वर तूने खेला
क्यों ऐसा अनचाहा खेल।

माना तू करता रहता है
ऐसे निष्ठुर अनगिन खेल,

तू भी तो हैरान हुआ होगा
किया क्यों मैंनें ऐसा खेल।

निश्चय ही तेरे मन में भी
आज हुआ होगा पश्चाताप

व्यथित हृदय से सोच रहा होगा
अब न करुंगा ऐसे खेल।

पश्चाताप की अग्नि में तू
आज स्वयं में जलता होगा,

ऐसा खेल किया क्यों मैंने
खुद को धिक्कार रहा होगा।

आखिर मैंनें क्या कर डाला
तू भी यही सोचता होगा,

पश्चाताप के आँसू का प्याला
तू भी आज पी रहा होगा।

सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उ.प्र.
8115285921
©मौलिक, स्वरचित,


Related Posts

ठंडी हवा में तुम्हारी खुशबू-सतीश सम्यक

February 7, 2022

ठंडी हवा में तुम्हारी खुशबू रात के सफर मेंजयपुर से नोहर तकआने वाली बसके अंन्दर बैठा था मैं। लगभग भागपाटी

चंद्रमा, चांद, शशि!

February 7, 2022

चंद्रमा, चांद, शशि! सूर्य के बाद सबसे चमकीला ग्रह,सबसे बड़ा प्राकृतिक उपग्रह,रात्रि को शीतलता प्रदान करता,यह चंद्रमा, चंद्र, शशि के

पृथ्वी बोल पड़ी!

February 7, 2022

 पृथ्वी बोल पड़ी! मैं हूं सौरमंडल की सबसे सुंदर ग्रह, जहां जीव जंतु का जीवन है संभव, निवास करती है

क्या गवायां हैं आज

February 7, 2022

क्या गवायां हैं आज हर करम अपना करेंगे ए वतन तेरे लिएकहने वाली वह आवाज जो शांत हो गई हैंभर

विश्व प्रसिद्ध भारत के अनमोल संस्कार

February 7, 2022

कविताविश्व प्रसिद्ध भारत के अनमोल संस्कार विश्व प्रसिद्ध भारतीय संस्कार अनमोल मोती है रोज़ माता-पिता चरण स्पर्श से शुरुआत होती

दिल्ली शहर-डॉ. माध्वी बोरसे

February 7, 2022

दिल्ली शहर! भारतीय गणराज्य की राजधानी,इसका इतिहास है गौरवशाली,एक विशेष केंद्र शासित प्रदेश,महाभारत काल से इसका उल्लेख रहा विशेष! देश

Leave a Comment