Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kanchan chauhan, poem

परीक्षा का परिणाम | pariksha ka parinam

परीक्षा का परिणाम परीक्षा कक्ष में होता देखो,कितना अजीब नज़ारा है,प्रश्न पत्र के इंतजार में बैठे थेबच्चे, कैसे -कैसे भाव …


परीक्षा का परिणाम

परीक्षा का परिणाम | pariksha ka parinam

परीक्षा कक्ष में होता देखो,कितना अजीब नज़ारा है,
प्रश्न पत्र के इंतजार में बैठे थेबच्चे, कैसे -कैसे भाव लिए।
मची हुई है मन में हलचल, कितने मिश्रित विचार लिए,
क्या आएगा, क्या लिखेंगे, क्या हम लिख भी पाएंगे।
प्रश्न पत्र पाते ही देखो पन्ने ऐसे पलटते हैं,
एक ही पल में जांचना चाहते, क्या -क्या इनको आता है।
फिर लिखना जब शुरू हैं करते,एक पल भी रूक नहीं पाते हैं।
हाथ अगर रूकना भी चाहे, झटक-झटक कर चलाते हैं।
साल भर का पढ़ा हुआ अब, कुछ ही घंटों में लिखना है ।
लिखने से ही निर्धारित होना,परीक्षा का परिणाम है ।
किन हालातों से गुजरे बच्चे, क्या बीता है उनके साथ,
अस्वस्थ थे या घटी दुर्घटना पिछली रात,
इसका कोई जिक्र नहीं है, क्या बीता है किसके साथ।
लिखने से ही पता चलेगा, किसको कितना ज्ञान है,
इसी से निर्धारित होना परीक्षा का परिणाम है।

-कंचन चौहान


Related Posts

कैलेण्डर बदल जाएगा- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

कैलेण्डर बदल जाएगा बदलता आ रहा है जैसेसैंकड़ों सालों सेवैसे ही यह साल भी बदल जाएगा,कुछ यादें खट्टी – मीठीदर्ज

आम जनता का नसीब- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

आम जनता का नसीब आम जनता के लिएधर्मस्थलों पर ईश्वर के दर्शन हेतूप्रक्रिया अलग हैऔर ‘वी.आई.पी.’ के लिए अलग, जनता

सोचो जरा उनके बारे में भी- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सोचो जरा उनके बारे में भी तुम दुखी होकि इन सर्दियों में महंगीब्रांडेड रजाई नहीं खरीद पाए,जिन्हें मयस्सर नहींकड़कती सर्दी

इंसानियत को बचाओ- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

इंसानियत को बचाओ दुनिया मेंकहीं भी हो रहा हो अन्यायतो उसके खिलाफ आवाज उठाओ,रोकने की उसे करो पुरजोर कोशिशेंविरुद्ध उसके

सिखाने की कोशिश करें- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सिखाने की कोशिश करें सिखाने की कोशिश करेंअपने बच्चों को खाना बनाना भीपढ़ाई के साथ-साथ,वरना लाखों के पैकेज पाने वालों

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ ‘तुम्हारा साथ’ मेरे लिएहै एक तरह कीमृगतृष्णा सा,दूर कहीं झिलमिलाताहुआ साबुलाता है मुझे अपने पास,तुम्हारे दुर्निवार

Leave a Comment