Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

परिवारवाद

परिवारवाद वंशवाद परिवारवाद भाई भतीजावाद से प्रतिभावान काबिलियत के सर्वोपरि सामर्थ्य को क्षति परिवार के व्यापार व्यवसाय पेशे का अनुसरण …


परिवारवाद

वंशवाद परिवारवाद भाई भतीजावाद से प्रतिभावान काबिलियत के सर्वोपरि सामर्थ्य को क्षति

परिवार के व्यापार व्यवसाय पेशे का अनुसरण करना स्वाभाविक है, परंतु प्रतिभावान काबिलियत का बाधक भाई भतीजावाद परिवारवाद एक बुराई – एडवोकेट किशन भावनानी

गोंदिया – सदियों पुराने भारतीय इतिहास के पन्नों में दर्ज वंशवाद परिवारवाद के किस्से राजा महाराजाओं के स्तरपर हम बहुत पढ़ें हैं कि यह फलाने वंशज का है, यह राजशाही परिवार का है जो वर्तमान रूप में कुछ दूसरे रूपों में यह फलाने नेता का रिश्तेदार है, ढिकानें उद्योगपति का रिश्तेदार है, इत्यादि अनेक वंशवाद परिवारवाद से शब्दों की बात होती है। हालांकि किसी भी परिवार या वंश का उनके किसी भी घरेलू पेशे व्यापार व्यवसाय का अनुसरण करना स्वाभाविक ही है क्योंकि वह मनीषी जीव उसी परिवार में जन्म लेकर बल्य काल से ही उस पेशे व्यापार व्यवसाय के माहौल में छोटे से बड़ा होता है इसको हम, एक उदाहरण के तौर पर अगर कोई एक इंजिनियर, सीए है तो क्या इसी कारण उसके पुत्र को इंजीनियर सीए नही बनने दिया जाएगा ?अगर इंजीनियर का बेटा भी इंजीनियर बने तो वंशवाद को बढ़ावा देने जैसा है क्या ? किसी वकील का बेटा क्या वकालत नही कर सकता है क्योंकि ये वंश वाद को बढ़ावा देना होगा?? अगर वह अच्छा वकील ही नही है तो उसके पक्षकार ही उसे अपने आप ही ठुकरा देंगे। इसमे वंशवाद कहा से आ टपका ?? ठीक वैसे ही अगर पिताश्री मंत्री था या विधायक था तो बेटे को भी भी मंत्री या विधायक बनने से रोकने वाला कानून देश में या दुनिया मे कहि नही है।
साथियों जैसे काबिल न होने पर बड़े नामचीन वकील का बेटा बड़ा वकील नही बन पाता है वैसे ही नेताजी के बेटे नाकाबिल है तो जनता अपने आप ही उसे ठुकरा देगी।सवाल तो क़ाबिलियत का है नकि पिताश्री क्या थे इस बात का है, और व्यवसाय में तो ऐसे ही होता है, उत्तराधिकारी कोई परिवार से ही होता है। वंशवाद अपने आप मे कोई चुनौती नही है। नाही वंशवाद में कोई बुराई भी है। केवल एक वंश का कोई है इस बात के लिए सही योग्यता है या नही इसे देखे बगैर ही उसे चुनना या उसे किसी भी पद पर बैठाना जरूर गलत है अन्याय और बुराई है।
साथियों बात अगर हम पौराणिक काल के वंशवाद की तुलना आज के परिवारवाद भाई भतीजावाद से करें तो,कुछ विशेषयज्ञ वंशवाद की तुलना राजशाही से करते हैं, उनके अनुसार फर्क है तो इतना ही कि पहले राजे महाराजे अपने उत्तराधिकारी की घोषणा करते थे, भारत के लोकतंत्र में आज यह काम उनके लिए चाहे, अनचाहे ढंग से जनता या वोटर करते हैं। इसी तर्क को लेकर कुछ नेता यह दोहराने से नहीं थकते कि उनके परिवार के लोग राजनीति में चुनाव जीत कर आए हैं, किसी की मेहरबानी या खैरात से नहीं है।
साथियों बात अगर हम कुछ वर्षों से परिवारवाद भाई भतीजावाद पर बढ़ते विरोधी ट्रेंड की करें तो, वर्तमान समय में पीएम के कटु आलोचक भी मानते हैं कि उन्होंने भारतीय राजनीति के व्याकरण को कई मायनों में बदला दिया है। आज परिश्रम, दक्षता और योग्यता रूपी मानवीय गुणों ने तेजी से चाटुकारिता और परिवारवाद वाली राजनीति की जगह ले रही है। वैसे भी जो पार्टी लंबे समय तक सत्ता में रहती है, वही भविष्य के लिए खेल के नियम तय करती है। सभी छोटे खिलाड़ी उस फामरूले का अनुकरण करते हैं। एक पार्टी भी लंबे समय तक सत्ता में रही है। लिहाजा अधिकांश पार्टियों ने उसका अनुकरण किया। उस पार्टी ने भारतीय राजनीति को वंशवाद की राजनीति का सूत्र सिखाया। बाल गंगाधर तिलक, मदन मोहन मालवीय, सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी सरीखे दिग्गजों ने पार्टी को एक आंदोलन के रूप में चलाया, लेकिन स्वतंत्रता के बाद वह उनकी मात्र बनकर रह गई। उसने समय के साथ खुद को देश के प्रथमपरिवार के रूप में स्थापित कर लिया ऐसा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आया है हालांकि उसकी पुष्टि नहीं की गई है।
साथियों बात अगर हम माननीय पीएम द्वारा दिनांक 15 अगस्त 2022 को लाल किले की प्राचीर से परिवारवाद भाई भतीजावाद मुद्दे पर क्षणिक संबोधन की करें तो पीआईबी के अनुसार उन्होंने कहा दूसरी एक चर्चा मैं करना चाहता हूं भाई-भतीजावाद, और जब मैं भाई-भतीजावाद परिवारवाद की बात करता हूं तो लोगों को लगता है मैं सिर्फ राजनीति क्षेत्र की बात करता हूं। जी नहीं, दुर्भाग्‍य से राजनीति क्षेत्र की उस बुराई ने हिन्‍दुस्‍तान की हर संस्‍थाओं में परिवारवाद को पोषित कर दिया है। परिवारवाद हमारी अनेक संस्‍थाओं को अपने में लपेटे हुए है। और इसके कारण मेरे देश के talent को नुकसान होता है। मेरे देश के सामर्थ्‍य को नुकसान होता है। जिनके पास अवसर की संभावनाएं हैं वो परिवारवाद भाई-भतीजे के बाद बाहर रह जाता है। भ्रष्‍टाचार का भी कारण यह भी एक बन जाता है, ताकि उसका कोई भाई-भतीजे का आसरा नहीं है तो लगता है कि भई चलो कहीं से खरीद करके जगह बना लूं। इस परिवारवाद से भाई-भतीजावाद से हमें हर संस्‍थाओं में एक नफरत पैदा करनी होगी, जागरूकता पैदा करनी होगी, तब हम हमारी संस्‍थाओं को बचा पाएंगे।संस्‍थाओं के उज्ज्वल भविष्‍य के लिए बहुत आवश्‍यक है। उसी प्रकार से राजनीति में भी परिवारवाद ने देश के सामर्थ्‍य के साथ सबसे ज्‍यादा अन्‍याय किया है। परिवारवादी राजनीति परिवार की भलाई के लिए होती है उसको देश की भलाई से कोई लेना-देना नहीं होता है और इसलिए लालकिले की प्राचीर से तिरंगे झंडे के आन-बान-शान के नीचे भारत के संविधान का स्‍मरण करते हुए मैं देशवासियों को खुले मन से कहना चाहता हूं, आइये हिन्‍दुस्‍तान की राजनीति के शुद्धिकरण के लिए भी, हिन्‍दुस्‍तान की सभी संस्‍थाओं की शुद्धिकरण के लिए भी हमें देश को इस परिवारवादी मानसिकता से मुक्ति दिला करके योग्‍यता के आधार पर देश को आगे ले जाने की ओर बढ़ना होगा। यह अनिवार्यता है। वरना हर किसी का मन कुंठित रहता है कि मैं उसके लिए योग्‍य था, मुझे नहीं मिला, क्‍योंकि मेरा कोई चाचा, मामा, पिता, दादा-दादी, नाना-नानी कोई वहां थे नहीं। यह मन:स्थिति किसी भी देश के लिए अच्‍छी नहीं है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि परिवारवाद!!वंशवाद परिवारवाद भाई भतीजावाद से प्रतिभावान काबिलियत के सर्वोपरि सामर्थ्य को क्षति है ।परिवार के व्यापार व्यवसाय पेशे का अनुसरण करना स्वाभाविक है परंतु प्रतिभावान काबिलियत का बाधक भाई भतीजावाद परिवारवाद एक बुराई है।

About author

Kishan sanmukh

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

Related Posts

मध्यम वर्ग का संघर्ष कभी खत्म क्यों नहीं होता?

August 11, 2023

मध्यम वर्ग का संघर्ष कभी खत्म क्यों नहीं होता? मध्यम वर्ग के लोगों की चिंताओं का कोई अंत नहीं होता।

धंधा गैरकानूनी होगा पर जीएसटी कानूनी लगेगा !

August 10, 2023

धंधा गैरकानूनी होगा पर जीएसटी कानूनी लगेगा ! जीएसटी काउंसिल की 51 वीं बैठक में ऑनलाइन गेमिंग, कैसीनों, हॉर्स रेसिंग

ख़ुद के साथ समय बिताने में जीवन के गहरे संकेत छिपे हैं

August 10, 2023

ख़ुद के साथ समय बिताने में जीवन के गहरे संकेत छिपे हैं मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक ऊर्जा और तनाव मुक्त जीवन

फ्लाइंग किस्स बनाम मणिपुर मुद्दा

August 10, 2023

फ्लाइंग किस्स बनाम मणिपुर मुद्दा बात का बतंगड़ – आंख मारने से फ्लाइंग किस्स तक रण लोकतंत्र के मंदिर में

अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक 2023 राज्यसभा में पारित

August 10, 2023

अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक 2023 राज्यसभा में पारित – दलालों पर नकेल कसना तय सुनिए जी ! न्यायालयों, विभिन्न सरकारी प्राधिकरणों

Super quick for special vs slow for common

August 10, 2023

 24 घंटे बनाम 72 घंटे ख़ास के लिए जबरदस्त फुर्ती बनाम आम के लिए सुस्ती   सुनिए जी ! आगे से

PreviousNext

Leave a Comment