Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh

परमाणु युद्धकाल!!!

परमाणु युद्धकाल!!! परमाणु हथियारों का उपयोग मानवता और दुनिया के लिए आपदा – मानव प्रजातियों को विलुप्तता से बचाने सामूहिक …


परमाणु युद्धकाल!!!

परमाणु युद्धकाल!!!
परमाणु हथियारों का उपयोग मानवता और दुनिया के लिए आपदा – मानव प्रजातियों को विलुप्तता से बचाने सामूहिक बातचीत प्रयास ज़रूरी

परमाणु हत्यारों के बिना दुनिया को नई दिशा हासिल करने के प्रयासों में अंतरराष्ट्रीय पारस्परिक संगठनों, परिषदों, संस्थाओं को सवांद प्रयासों में तेजी लाना ज़रूरी- एड किशन भावनानी

गोंदिया – वैश्विक मानवता के लिए 06 और 09 अगस्त 1945 एक ऐसा दुखद दिन था, जब मानवता के खिलाफ एक भयंकर मानवीय त्रासदी हुई थी,जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता!! बस!!! कारण वही जिस के उपयोग की गड़गड़ाहट यूक्रेन-रूस युद्ध में युद्धकाल को परमाणु युद्धकाल में बदलने की आहट का एहसास हो रहा है!! वही परमाणु हथियार जो जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराया गया था जिसमें हजारों लाखों लोग मारे गए थे परंतु बात वहीं तक सीमित नहीं रही घटना के 77 साल बाद आज भी उसके प्रभाव मानवों में संचरित होकर विषमता पैदा कर रहे हैं ऐसा मीडिया में बताया जा रहा है।
साथियों बात अगर हम वर्तमान आधुनिक डिजिटल युग की करें तो मेरा मानना है कि उस जमाने से कहीं अधिक आज शक्तिशाली और अधिक नुकसान देह परमाणु मिसाइल, परमाणु पनडुब्बी और अन्य परमाणु जखीरों की मारक शक्ति है जो हिरोशिमा नागासाकी से कई गुना अधिक त्रासदी मचा सकती है और आज इसी के उपयोग की बातें वर्तमान युद्धकाल में हो रही है!! यह कैसी मानवता है??
साथियों बात अगर हम परमाणु हथियारों की करें तो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अनुसार, युद्ध में परमाणु हथियारों का उपयोग करने की संभावना को आमतौर पर दो उपसमूहों में विभाजित किया जाता है, जिनमें से प्रत्येक का अलग-अलग प्रभाव होता है और संभावित रूप से विभिन्न प्रकार के परमाणु हथियारों से लड़ा जाता है।पहला, एक सीमित परमाणु युद्ध (कभी-कभी हमला या विनिमय ), दो (या अधिक) जुझारू लोगों द्वारा परमाणु हथियारों के छोटे पैमाने पर उपयोग को संदर्भित करता है। एक सीमित परमाणु युद्ध में सैन्य सुविधाओं को लक्षित करना शामिल हो सकता है – या तो एक रक्षात्मक उपाय के रूप में, या पारंपरिक बलों द्वारा आक्रमण की प्रस्तावना के रूप में, एक आक्रामक उपाय के रूप में दुश्मन की क्षमता को पूर्व-खाली रूप से अपंग करने के प्रयास के रूप में!!
यह शब्द परमाणु हथियारों के किसी भी छोटे पैमाने पर उपयोग पर लागू हो सकता है जिसमें सैन्य या नागरिक लक्ष्य (या दोनों) शामिल हो सकते हैं। दूसरा, एक पूर्ण पैमाने पर परमाणु युद्ध , जिसमें सैन्य, आर्थिक और नागरिक लक्ष्यों सहित पूरे देश के उद्देश्य से किए गए हमले में बड़ी संख्या में परमाणु हथियार शामिल हो सकते हैं। इस तरह के हमले से निश्चित रूप से लक्षित राष्ट्र के संपूर्ण आर्थिक, सामाजिक और सैन्य बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया जाएगा, और संभवतः पृथ्वी के जीवमंडल पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा।
साथियों बात अगर हम मानव प्रजातियों को विलुप्तता से बचाने, सामूहिक प्रयत्नों की करें तो परमाणु हथियारों का उपयोग मानवता और दुनिया के लिए आपदा है। हालांकि आपदाएं दो प्रकार की होती है प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदा परंतु, मानव विलुप्ति या तो प्राकृतिक कारणों से मानव प्रजातियों का काल्पनिक अंत है, जैसे कि उप-प्रतिस्थापन प्रजनन क्षमता के कारण जनसंख्या में गिरावट , एक क्षुद्रग्रह प्रभाव या बड़े पैमाने पर ज्वालामुखी , या मानवजनित कारण, जिसे सर्वनाश भी कहा जाता है । उत्तरार्द्ध के लिए, कई संभावित योगदानकर्ताओं में से कुछ में जलवायु परिवर्तन , वैश्विक परमाणु विनाश , जैविक युद्ध और पारिस्थितिक पतन शामिल हैं। अन्य परिदृश्य उभरती प्रौद्योगिकियों पर केन्द्रित हैं, जैसे कि उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी , या स्वयं-प्रतिकृति नैनोबॉट्स। वैज्ञानिकों का कहना है कि प्राकृतिक कारणों से निकट भविष्य में मानव विलुप्त होने का जोखिम अपेक्षाकृत कम है। हालांकि, अपनी गतिविधियों के माध्यम से मानव विलुप्त होने की संभावना, अनुसंधान और बहस का एक वर्तमान क्षेत्र है। विशेषज्ञ आम तौर पर इस बात से सहमत हैं कि मानवजनित अस्तित्व संबंधी जोखिम प्राकृतिक जोखिमों की तुलना में (बहुत) अधिक है।
साथियों बात अगर हम वर्तमान यूक्रेन-रूस युद्ध की करें तो, यूक्रेन पर जोरदार हमले करने के बाद भी पुतिन रुक नहीं रहे। रविवार को उन्होंने एक और फैसला लेकर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। उन्होंने रूसी परमाणु बलों को हाई अलर्ट पर रखने का आदेश दिया है, इसका मतलब यही है कि यह युद्ध कभी भी परमाणु युद्ध में बदल सकता है। साल 2018 में आई एक डॉक्यूमेंट्री में राष्ट्रपति पुतिन ने टिप्पणी की थी कि, अगर कोई रूस का सफ़ाया करने का फ़ैसला करता है तो हमें जवाब देने का क़ानूनी अधिकार है। हां, ये मानवता और दुनिया के लिए आपदा होगी, लेकिन मैं रूस का नागरिक हूं और इस देश का राष्ट्रपति भी, हमें ऐसी दुनिया की ज़रूरत क्यों है जिसमें रूस न हो?
साथियों बात अगर हम इस युद्ध काल में भारत की करें तो,वभारत ने इस मामले में सभी देशों के उचित सुरक्षा हितों को भी रेखांकित किया।संयुक्त राष्ट्रसुरक्षा परिषद में यूक्रेन पर रूसी हमले के ख़तरे को लेकर चर्चा होनी चाहिए या नहीं, इस पर वोटिंग हुई और भारत इस वोटिंग से बाहर रहा, यह दूसरी बार है, जब भारत ने यूक्रेन संकट को राजनयिक और रचनात्मक वार्ता के ज़रिए सुलझाने के लिए कहा है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत ने कहा,भारत इस संकट का समाधान चाहता है और यह तत्काल तनाव में कमी लाकर हासिल किया जा सकता है।इसमें सभी देशों को सुरक्षा हितों का ख़्याल रखना चाहिए, इसका लक्ष्य इस इलाक़े में लंबी अवधि के लिए शांति और स्थिरता होना चाहिए। भारत सभी संबंधित पक्षों के संपर्क में है। 20 हज़ार से ज़्यादा भारतीय छात्र और अन्य लोग यूक्रेन और उसके सीमाई इलाक़ों में रहते हैं।
साथिया बात अगर हम परमाणु हथियारों के निर्माण,संरक्षण उपयोग पर प्रतिबंध के प्रयासों की करें तो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दर्ज जानकारी के अनुसार इस संबंध में कई अंतरराष्ट्रीय संधियों, निजी संगठनों, अन्तर्राष्ट्रीय मेडिकल संगठन सहित ऐसी अनेक संस्थाएं हैं जो इस पर प्रतिबंध के लिए जागृति लाने का काम कर इसके दुष्प्रभावों को रेखांकित कर जन जागरण लाने का काम करते हैं जो, परमाणु हथियारों से उत्पन्न मानवीय खतरे पर ध्यान केंद्रित करने के लिए निरस्त्रीकरण बहस को स्थानांतरित करना चाहता है, उनकी अनूठी विनाशकारी क्षमता, उनके विनाशकारी स्वास्थ्य और पर्यावरणीय परिणामों, उनके अंधाधुंध लक्ष्यीकरण, चिकित्सा बुनियादी ढांचे और राहत उपायों पर एक विस्फोट के दुर्बल प्रभाव पर ध्यान आकर्षित करना, और आसपास के क्षेत्र पर विकिरण के लंबे समय तक चलने वाले प्रभाव।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि परमाणु युद्धकाल!! परमाणु हथियारों का उपयोग मानवता और दुनिया के लिए आपदा है!! मानव प्रजातियों को विलुप्तता से बचाने सामूहिक बातचीत प्रयास ज़रूरी है तथा परमाणु हथियारों के बिना दुनिया को नई दिशा हासिल करने के प्रयासों में अंतरराष्ट्रीय पारस्परिक संगठन, परिषदों, संस्थाओं को प्रयासों में तात्कालिक तेजी लाने की ज़रूरत है।

-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ,स्तंभकार, एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

Aap beeti by Sudhir Srivastava

September 30, 2021

 आपबीतीपक्षाघात बना वरदान        सुनने में अजीब लग रहा है किंतु बहुत बार जीवन में ऐसा कुछ हो

Dekhein pahle deshhit by Jayshree birmi

September 29, 2021

 देखें पहले देशहित हम किसी भी संस्था या किसी से भी अपनी मांगे मनवाना चाहते हैं, तब विरोध कर अपनी

Saari the great by Jay shree birmi

September 25, 2021

 साड़ी द ग्रेट  कुछ दिनों से सोशल मीडिया में एक वीडियो खूब वायरल हो रहा हैं।दिल्ली के एक रेस्टोरेंट में

Dard a twacha by Jayshree birmi

September 24, 2021

 दर्द–ए–त्वचा जैसे सभी के कद अलग अलग होते हैं,कोई लंबा तो कोई छोटा,कोई पतला तो कोई मोटा वैसे भी त्वचा

Sagarbha stree ke aahar Bihar by Jay shree birmi

September 23, 2021

 सगर्भा स्त्री के आहार विहार दुनियां के सभी देशों में गर्भवती महिलाओं का विशेष ख्याल रखा जाता हैं। जाहेर वाहनों

Mahilaon ke liye surakshit va anukul mahole

September 22, 2021

 महिलाओं के लिए सुरक्षित व अनुकूल माहौल तैयार करना ज़रूरी –  भारतीय संस्कृति हमेशा ही महिलाओं को देवी के प्रतीक

Leave a Comment