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mainuddin_Kohri, poem

नी बखत री बात-मईनुदीन कोहरी”नाचीज़ “

नी बखत री बात धोरां री आ ” धरती , धीरज री धरा सांतरी । सोनै सी गोरी बाळू रेत …


नी बखत री बात

नी बखत री बात-मईनुदीन कोहरी"नाचीज़ "

धोरां री आ ” धरती , धीरज री धरा सांतरी ।

सोनै सी गोरी बाळू रेत , अबै उजड़ी जाय।।
बढ़तै मानखै रै कारणै ,भाव आकाशां जाय ।
जमीं आळा सामां जोवै , सोधा रबड़ी खाय ।।
ऊंचै धोरां झूंपड़ी , बखत- बखत री बात ।
हैरिटेज-होटलां अबै,पौंची झुंपडली रै मांय।।
मीठो तेजो कुण गावै,कठै बाजै अळगोंजा ।
गावणियां नुमायशां में ,सुणीजै कदैई-कदाय।।
कठै गय्यी फागणियै री रातां ,कुण उगैरै गीत।
टीवी-टैपां उद्बुदा गीत,अबै अणुता सुणाय।।
चूंदड़ी-मोंठडां रा पेच,सिणगार करता छैला ।
ब्याव-ऐढे एक्को-दुक्को,साफै निजर आय।।
राबड़ी अर् खीचड़ो,हरख्यां करतो हो हिंवड़ो ।
सुपनै जियां हुय्य गय्या वार-तिंवारां ही खाय।।
“नाचीज़”कठै गई कांकड़ां ,कठै गय्यो धीणो।
अबै टाबर तरसै दूध नैं ,दूध टँकी सूं आय ।।

मईनुदीन कोहरी”नाचीज़ “
मो .9680868028
मौहल्ला कोहरियान् बीकानेर


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