Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

नारी सम्मान

नारी सम्मान सब ही चाहते हैं कि उन्हें सम्मान मिले, और वाजिब भी हैं सब को पात्रता के हिसाब से …


नारी सम्मान

सब ही चाहते हैं कि उन्हें सम्मान मिले, और वाजिब भी हैं सब को पात्रता के हिसाब से मान से नवाजा जाएं फिर नर हो या नारी या हो बालक।लेकिन पात्रता भी तो होनी चाहियें।बच्चा अगर जिद्दी और शरारती हैं तो वह मान नहीं पा सकेगा डांट फटकार का ही हकदार रहेगा।वैसे ही नर यानी पुरुष जिसमें सिर्फ अहम भरा हुआ हैं खुद किसी का मान सम्मान नहीं दे सकता उसे सम्मान प्राप्ति होने की संभावनाएं कम हैं या सामने थोड़ी बहुत इज्जत मिल भी जाएं तो पीछे तो लोग बुराइयां ही करेंगे।

 वैसे ही नारी यानी कि स्त्रियों के बारे में कहा जाता हैं।नारी में सुंदरता का भी महत्व होता हैं,सुंदर नारी को ज्यादा ही सम्मान मिल जाता हैं।बुद्धिमत्ता के हिसाब से देखें तो भी सम्मान तो मिलता ही हैं लेकिन बुद्धिमत्ता का परिचय बाद में होता हैं,सौंदर्य तो सामने दिख जाता हैं।लेकिन स्त्रियों में दाक्षिण्य होता हैं जो उसे मान मर्यादाओं में रखता हैं,इज्जत बनाएं रखता हैं।लेकिन आज कल के (शो बिजनेस) दिखावे की मानसिकता वाले दौर में स्वातंत्र्य की बातें कर स्त्री के आभूषण जो मर्यादा और शर्म हैं उसका हनन हो जाता हैं।स्त्री कभी भी मर्यादा से बाहर होने की नहीं सोचती किंतु आधुनिकता और देखा देखी के चक्कर में कुछ ज्यादा ही छूट ले लेती हैं।आधुनिकता कम वस्त्रों का पहनना ही हो तो फिर वस्त्रों की जरूरत ही क्या रह जाती हैं,आदि मानव ने भी वस्त्रों की जरूरत महसूस की तभी तो पत्ते आदि का प्रयोग वस्त्र की तरह उपयोग कर लिया करते थे।क्या हम वस्त्रों को कम करके उसी युग में प्रवेश कर रहें हैं जो बीत चुका हैं? कोई भी पत्रिका या अखबार देखो एक पृष्ट तो ऐसी अर्धनग्न नारियों की तस्वीरों से ही भरा मिलेगा ही।इश्तेहारों में भी,चाहे किसी भी चीज का हो वहां कम कपड़ों वाली नारी की हाजरी जरूर होगी।सर में लगाने वाले तेल की जाहेरात में कपड़ों को हवा में उड़ाने की क्या जरूरत हैं वह तो डायरेक्टर या तो वह नारी ही जानें।ये अपनी कीमत आप ही कम करने की बात हो जाती हैं।जब हम खुद अपनी मर्यादा छोड़ देते हैं फिर सम्मान की आशा ही कैसे रख सकते हैं? देवी का दर्जा मिलता हैं नारी को अपने देश में,कन्या पूजन का भी चलन हैं फिर भी नारियों को वो सम्मान नहीं मिलता जो उसे मिलना चाहिएं।जो घर संसार की घुरी हैं वही अगर चरित्र से गिर जाएं तो अपने बच्चों को वह क्या सीखा पाएगी? घर में संस्कार और मूल्यों को कैसे दे पाएगी? आधुनिकता मानसिक और बौद्धिक हो तब तक ही सही हैं जैसे ही भौतिक हो गईं समाज की मानसिकता का स्तर गिरता जायेगा।पाश्चत्य देशों के जीवन मूल्यों और अपने देश के जीवन मूल्यों में बहुत ही तफावत हैं।उनकी संस्कृति और अपनी संस्कृति में बहुत अंतर हैं।वे प्यार शारीरिक सुख पाने के लिए ही करते हैं जब अपने देश में प्यार को पाना ही मुख्य हैं।त्याग और बलिदानों की हमारी भूमि हैं जिसके मूल्यों का जतन करना हमारी नैतिक जिम्मेवारी बनती हैं

About author

Jayshree birimi
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद (गुजरात)

Related Posts

 ऐसे थे जननायक प्रधानमंत्री चंद्रशेखर

 ऐसे थे जननायक प्रधानमंत्री चंद्रशेखर

July 7, 2025

“चाह गई चिंता मिटी मनुआ बेपरवाह जाको कछु ना चाहिए वो शाहन के शाह” कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्रद्धेय द्वारिका

साहित्य, टेक्नोलाॅजी और हम

साहित्य, टेक्नोलाॅजी और हम

June 10, 2025

साहित्य की रचना में टेक्नोलाॅजी की बात अब जरा भी नई नहीं है। भविष्य में अनेक मोर्चे पर टेक्नोलाॅजी और

सावधानी से चुने माहौल, मित्र एवं जीवनसाथी

सावधानी से चुने माहौल, मित्र एवं जीवनसाथी

May 26, 2024

सावधानी से चुने माहौल, मित्र एवं जीवनसाथी अगर आप विजेता बनना चाहते हैं, तो विजेताओं के साथ रहें। अगर आप

विचारों की भी होती है मौत

विचारों की भी होती है मौत

May 26, 2024

प्रत्येक दिन दिमाग में 6,000 विचार आते हैं, इनमें 80% नकारात्मक होते हैं। इन नकारात्मक विचारों से दूर रहने के

स्पष्ट लक्ष्य, सफलता की राह

स्पष्ट लक्ष्य, सफलता की राह

May 26, 2024

स्पष्ट लक्ष्य, सफलता की राह तीरंदाज एक बार में एक ही लक्ष्य पर निशाना साधता है। गोली चलाने वाला एक

जो लोग लक्ष्य नहीं बनाते हैं, | jo log lakshya nhi banate

जो लोग लक्ष्य नहीं बनाते हैं, | jo log lakshya nhi banate

May 26, 2024

 जो लोग लक्ष्य नहीं बनाते हैं, वे लक्ष्य बनाने वाले लोगों के लिए काम करते हैं। यदि आप अपनी योजना

Leave a Comment