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kishan bhavnani, poem

नारी पर कविता | Naari par kavita

भावनानी के भाव  नारी पर कविता  नारी ऐसी होती है जो सभी रिश्तो को एक धागे में पिरोती हैमां बहन …


भावनानी के भाव

 नारी पर कविता 

नारी पर कविता | Naari par kavita

नारी ऐसी होती है जो सभी
रिश्तो को एक धागे में पिरोती है
मां बहन पत्नी बेटी बन
हर रिश्ते को संजयोती है

भारतीय संस्कृति में नारी
लक्ष्मी सरस्वती पार्वती की रूप होती है
समय आने पर मां रणचंडी दुर्गा,
काली का स्वरूप होती है

मत समझ अब अबला
नारी सबला होकर जीती है
हर क्षेत्र में नारी आगे
भारत कि अब यह नीति है

सम्मान करो नारी का वो
ममता प्यार वात्सल्य का स्वरूप होती है
अपमान न करना नारी का
आज की नारी सबला होती है

कौन कहता है इस युग में
नारी अबला होती है
आज की दुनिया में
नारी सबला होती है

करुणा दया नम्रता ममता से
उसकी परख होती है
इसका मतलब यह ना समझना
वह कमजोर होती है

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट 
किशन सनमुख़दास भावनानी 
गोंदिया महाराष्ट्र 


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