Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

नाक लीला | Nak leela

नाक लीला हमें भगवान ने सुंदर शरीर तो दिया ही है,साथ में उन्हे ऋतुओं के प्रहार से बचाने के उपाय …


नाक लीला

नाक लीला | Nak leelaहमें भगवान ने सुंदर शरीर तो दिया ही है,साथ में उन्हे ऋतुओं के प्रहार से बचाने के उपाय भी दिए हैं।गर्मी में तो खास जरूरत नहीं पड़ती बचाव की न ही बारिशों में,सिर्फ छाता या रेनकोट काफी हो जाता है।सर्दियों की खास अहमियत है,हाथों को मोजे,शरीर पर स्वेटर,गले में गुलु बंद , कान और सर के लिए कान टोपी पैरों में भी जुराबें और बाकी न रह जाएं आंखे तो उसे चश्मों से ढक कर ठंड से बचाया जा सकता है।लेकिन संवेदनशील नाक,उसे सामाजिक तरीके से भी बचाना मुश्किल है,जब भी देखोंं नाक का सवाल तो खड़ा ही रहता है।किसी से बहस हो तब नाक का सवाल,खाने में किसी को पहले परोसा जाएं तो नाक आड़े आ जाता है।पत्नी से बहस,बच्चों से बहस बस नाक आड़े आता ही रहता है।

लेकिन इसे तो सर्दी से बचाना आवश्यक बन जाता है।सोचा उसको भी टोपी पहनाने की तो लेकिन सांस कैसे ली जाएं? फिर सोचा हाथ में रूमाल रख नाक पर रख दिया जाएं किंतु कितनी देर? हाथ ही थक जाना है।स्वास की गति में अवरोध स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध होगा।पत्नी से इतनी बहस के बाद झल्ला कर बोली,” नाक में बाम भरलो।” अपने राम तो सुझाव सुन खुश हो गए ,उंगली पर बाम लगा कर नाक के नजदीक ले ही गया था कि एक जलन के एहसास से रूह तक कांप गई थी।अब तो जो होना था हो ही गया।नाक को ठंड का सांप सूंघ ही गया।घर का नल खराब होता है जैसे नाक में से अविरत जल धारा बहने लगी।और निच्छों का सिलसिला लगातार,बार बार चालू हो गया।मेरे नाक की हालत देख आंखें भी रो पड़ी।अब परेशान हो गर्म चाय का आसरा लिया किंतु कुछ देर बाद वही ढाक के तीन पात।बेताबी से उस जलप्रपात के रुकने की राह हाथ में रूमाल ले देखता रहा।और ये क्या जल प्रपात रुका तो ऐसा कि नाक के दरवाजों को बंद,तालाबंदी सा बंद कर दिया।जैसे लोग हड़ताल पर बैठे हो,जरा सी भी जगह नहीं दे रहे थे हवा को अंदर प्रवेश के लिए।अब क्या मुखद्वार खोल हवा को प्रवेश तो दे दिया लेकिन कितनी देर? बस अब तो बहुत हुआ लेकिन क्या करें?नाक पर तो जैसे भारी तालें लग गए थे।कितनी भी जोर से स्वास लो किंतु सिसकारों की ही आवाज आ रही थी हवा का प्रवेश बंद था।बस अपने आप मुखद्वार खुल हवा की आपूर्ति कर लेता था।साथ में किलों भर के सर में भी नौ ग्राम के नाक से सर्दी का अतिक्रमण हो चुका था।अब नाक में बाम तो नहीं लगाया किंतु रूमाल में लगा नाक के नजदीक रखा तो कुछ अच्छा लगा।आंखें बंद कर सोने की कोशिश में हाथ नाक से हट गया और नाक की दोनों टनल अलग अलग व्यवहार करने लगी ,एक बंद तो दूसरी खुली,आंख खुल ही गई और हाथ से रूमाल फिर नाक पर रख दिया।मेरी इस तकलीफ की बात कॉलोनी में वायु के वेग से प्रसारित हो गई, मैंने समझा टीवी के समाचार में प्रसारित हुई होगी।चार चार पड़ोसी एकसाथ आए और सब के पास दो तीन उदाहरण के साथ सुजाव थे।किसी की सास,तो किसी की साली या साले को मेरी जैसी तकलीफ हुई थी और उन्होंने क्या क्या किया उसके बखान हो रहे थे। स्टीम लेने से लेकर गर्म काढ़ा पीने तक,और तो और मैंने इतनी सर्दी में अपने आप को बचाया क्यों नहीं तक के उलाहना मिल ने लगी।सब चले गए तो खाना खाया तो लगे जैसे रोज नाक से ही खाना खाता रहा हूं शायद जरा भी स्वाद नहीं आ रहा था।फिर भी थोड़ा बहुत खा कर सो गया।सुबह जब आंख खुली तो जैसे बारिशों में भरे नालें बारिश बंद होने के कुछ देर बाद खाली हो जातें है वैसे अपने नाक को हल्का फुल्का आसानी से हवा ग्रहण कर त्याग करता महसूस कर खुशी से झूम उठा मैं।

जयश्री बिरमी

अहमदाबाद

About author  

Jayshree birimi
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद (गुजरात)


Related Posts

Lekh jeena jaruri ya jinda rahna by sudhir Srivastava

July 23, 2021

 लेखजीना जरूरी या जिंदा रहना        शीर्षक देखकर चौंक गये न आप भी, थोड़ा स्वाभाविक भी है और

Ram mandir Ayodhya | Ram mandir news

July 21, 2021

 Ram mandir Ayodhya | Ram mandir news  इस आर्टिकल मे हम जानेंगे विश्व प्रसिद्ध राम मंदिर से जुड़ी खबरों के

umra aur zindagi ka fark by bhavnani gondiya

July 18, 2021

उम्र और जिंदगी का फर्क – जो अपनों के साथ बीती वो जिंदगी, जो अपनों के बिना बीती वो उम्र

mata pita aur bujurgo ki seva by bhavnani gondiya

July 18, 2021

माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा के तुल्य ब्रह्मांड में कोई सेवा नहीं – एड किशन भावनानी गोंदिया  वैश्विक रूप से

Hindi kavita me aam aadmi

July 18, 2021

हिंदी कविता में आम आदमी हिंदी कविता ने बहुधर्मिता की विसात पर हमेशा ही अपनी ज़मीन इख्तियार की है। इस

Aakhir bahan bhi ma hoti hai by Ashvini kumar

July 11, 2021

आखिर बहन भी माँ होती है ।  बात तब की है जब पिता जी का अंटिफिसर का आपरेशन हुआ था।बी.एच.यू.के

Leave a Comment