Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh, Veena_advani

नया बाजार लाईक , कमेंट लाओ इनाम पाओ , शोषण करवाओ

नया बाजार लाईक , कमेंट लाओ इनाम पाओ , शोषण करवाओ आप सभी सोच में पड़ गए होंगे कि अरे …


नया बाजार लाईक , कमेंट लाओ इनाम पाओ , शोषण करवाओ

नया बाजार लाईक , कमेंट लाओ इनाम पाओ , शोषण करवाओ

आप सभी सोच में पड़ गए होंगे कि अरे ये कौन सा बाज़ार है और ये बाज़ार कहां है , जहां सिर्फ लाईक और कमेंट लाना है सभी से दुकान के लिए और इनाम पाना है । अरे वाह सभी सोचे ये तो बहुत ही आसान काम है इनाम पाने का । अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा बाजार कहां है ? हमनें तो देखा ही नहीं और सुना भी नहीं एसी दुकान या बाजारों के बारे मे । फिर ये वीना किस बाजार की बात कर रही । अरे इतना ना सोचो भाई । चलो वीना आपके मन मे उठे भूचाल से भरे , लालच से भरे , आतुर हो रहे जो उनके प्रश्नों का उत्तर देती हूं । 

वो बाज़ार ओर कहीं नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर ही है । जी हां आप सभी सोच रहे ना कैसे ? तो सुनिए , ये बाज़ार है सोशल मीडिया के अंतर्गत विभिन्न लोगों कि व्यक्तिगत वेबसाइट , यूट्यूब चैनल , फेसबुक पेज़ , इंस्टाग्राम वगैरह-वगैरह । इन बाजारों के दुकान के मालिकों द्वारा आए दिन कोई ना कोई प्रतियोगिता रखी जाती है जैसे की लेखक , विडियो काव्य प्रतियोगिता , नृत्य प्रतियोगिता वगैरह । अब इस प्रतियोगिता के लिए ग्राहक कहां से लाएं , तो ग्राहक को फसाने का का सबसे अच्छा जो एप है वो है वाट्स अप जहां पर हर कोई ऐरा-गैरा नत्थू खैरा वाट्स अप पर बहुत ही आसान तरीके से ग्रुप बनाते , लोगों को जोड़ते और प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए ईनाम नाम के लालच का दाना फैंक जाल बिछाते , जैसे ही कोई लालची ग्राहक आता उसे दबोच लेते और शुरू हो जाता यहां से ग्राहक का शोषण । जी हां हे ना वाट्स अप सबसे सरल एप जहां ग्राहक फट से फंसते हैं । 
दुकान के मालिक द्वारा निकाली गई प्रतियोगिता के अंतर्गत सबको क्या करना होता है अब आप पढ़ियेगा और सोचियेगा वीना कड़वा लिखती पर सच लिखती । प्रतियोगिता के अंतर्गत जो भी प्रतियोगिता है जैसे विडियो कविता पढ़ते बोलना , या नृत्य या दूसरी तरह की प्रतियोगिता जिसके अंतर्गत आप वैसा ही करना जैसा मालिक ने आदेश दिया , अब आपने वैसा कर दिया , अब यहां से आपका शोषण शुरू आप सभी के भेजें विडियो वगैरह की ये अपनी दुकान से एक लिंक(रसीद) बना कर दे देते , अब आप सभी को रसीद लिंक सभी के पास लेकर जानी है और उस पर लाईक , कमेंट मांग-मांग कर लाना है उफ्फ आप सौ लोगों के पास गये तब जाकर दस लोगों ने आपको लाईक-कमेंट दिये । आप बहुत विनती करते रहते बार बार आग्रह कर अपना ही वजूद कम करते किसी दूसरे की दुकान चलाने के लिए मात्र लालच के चक्कर में। हुआ ना आपका शोषण । जो सबसे ज्यादा लाईक वोट लाता मालिक के लिए उसे तो मान लो दस हजार रूपये मिले और उसने इनाम के नाम पर आपको दिये 501/ रूपये या इससे भी कम या आजकल तो सोशल मीडिया पर ही ई-सर्टिफिकेट की धूम मची है वहीं थमा देते प्रथम , द्वितीय, तृतीय लिख कर आप भी खुश अपने हाथ से अपना वजूद गिराकर , शोषण करवाकर और दुकान का मालिक तो आप से भी अधिक लाख गुना खुश की वो आप सभी को बेवकूफ बना दस हजार का मालिक बन गया । अब सोचना , समझना आपको है मुझे नहीं । अपना शोषण नहीं करने दें किसी को भी , आप जो प्रतियोगिता के नाम पर लाईक कमेंट मांगते फिरते हैं ना सोशल मीडिया के जरिए लोगों से लोग इसमें आपके मुंह पर तो वाहवाही करते पर पीठ पीछे आपको नीचा दिखाने मे चूकते नहीं , प्रतियोगिता में भाग लें जरूर लें आप विजयी भी होऐं , परंतु इस तरह की लाइक और कमेंट वाली प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपना शोषण न करें। शेष शुभ ।

#online_pratiyogita

About author

Veena advani
वीना आडवाणी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र

Related Posts

हमारे पवित्र सोलह संस्कार- जयश्री बिरमी

December 27, 2021

हमारे पवित्र सोलह संस्कार हिंदू धर्म कोई व्यक्ति विशेष द्वारा स्थापित धर्म नहीं हैं,ये प्राचीन काल से आस्थाएं और ऋषि

विश्वविख्यात विलियम शेक्सपियर-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 23, 2021

विश्वविख्यात साहित्यकार विलियम शेक्सपियर विलियम शेक्सपियर यकीनन सभी समय के सबसे प्रसिद्ध लेखकों में से एक है। उन्होंने 38 नाटकों,

रिश्तों की कद्र- अनीता शर्मा

December 22, 2021

 एक चिन्तन!!   * रिश्तों की कद्र* मैंने पिछले दिनों फेसबुक पर एक फोटो देखी जिसमें पिछले साल किसी कार्यक्रम में

वजूद– ए– कुर्सी- जयश्री बिरमी

December 21, 2021

 वजूद– ए– कुर्सी चर्चे तो बहुत सुने हैं किस्सा–ए–कुर्सी के लेकिन भौतिकता से देखें तो कुर्सी एक तैयार सिंहासन हैं

उत्कृष्ट कवियों की उपस्थिति में काव्य पाठ

December 21, 2021

राष्ट्रीय नव साहित्य कुंभ द्वारा हुआ उत्कृष्ट कवियों की उपस्थिति में काव्य पाठ साहित्यिक सांस्कृतिक सामाजिक संस्था राष्ट्रीय नव साहित्य

भ्रष्टाचार की शून्य सहिष्णुता-किशन सनमुखदास भावनानी

December 20, 2021

नए भारत, आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना में भ्रष्टाचार की शून्य सहिष्णुता, पारदर्शी व्यवस्था तथा नागरिकों की मुख्य सहभागिता की प्रतिबद्धता

Leave a Comment