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kishan bhavnani, poem

नम्र बनके रहो हर खुशहाल पल तुम्हारा है

भावनानी के भाव नम्र बनके रहो हर खुशहाल पल तुम्हारा है बुजुर्गों ने कहा यह जीवन का सहारा है सामने …


भावनानी के भाव

नम्र बनके रहो हर खुशहाल पल तुम्हारा है

बुजुर्गों ने कहा यह जीवन का सहारा है
सामने वाले से कहो तुम अज्ञानी नहीं हो
मैं ज्ञानी नहीं हूं जीत पल तुम्हारा है
नम्र बनके रहो खुशहाल पल तुम्हारा है

मैं मैं का विकार अज्ञान का ढारा है
नम्रता गहना ज्ञान का सहारा है
ज्ञानी को अज्ञानीं से भी ज्ञान का
गुण लेना गुणवत्ता का सहारा है

बड़े बुजुर्गों के जीवन का हमें अटूट सहारा है
बड़े बुजुर्गों ने अहंकार पर तीर मारा है
कहावतों में ज्ञान बहुत सारा है
नीवां होके ग्रहण करो ज्ञान तुम्हारा है

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 

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