भावनानी के भाव
नम्रता का आभूषण धारण करना होगा
भावनानी के भाव नम्रता का आभूषण धारण करना होगा अपना जीवन सुखी बनाना है तो अटके काम बनाना है तो …
अपना जीवन सुखी बनाना है तो
अटके काम बनाना है तो
सुकून से जीवन व्यतीत करना है तो
नम्रता का आभूषण धारण करना होगा
पड़ोसियों का मन जीतना है तो
समाज में प्रतिष्ठा बढ़ाना है तो
संयुक्त परिवार बनाए रखना है तो
नम्रता का आभूषण धारण करना होगा
भ्रष्टाचारी को रंगे हाथ पकड़वाना है तो
हिम्मत जज्बे संयमता का गुण पाना है तो
भ्रष्टाचारी कर्मचारियों को सबक सिखाना है तो
नम्रता का आभूषण धारण करना होगा
ठसन वाले का भ्रष्टाचार लेके बाबू काम नहीं करता
मीठी छुरी से उनको पकड़वाना है तो
अपनी प्रतिष्ठा कायम रखना है तो
नम्रता का आभूषण धारण करना होगा
अपना व्यापार व्यवसाय मजबूत करना है तो
मां लक्ष्मी सरस्वती का आश्रय पाना है तो
आजीवन समृद्धि लाना है तो
नम्रता का आभूषण धारण करना होगा
Related Posts
Ab aur na aise satao sanam
February 14, 2021
poem जब से तुझ से जुड़ा फूल सा खिल गया सूखे मधुबन में जैसे कँवल खिल गया अकेले पन में
Sach pagli hme tumhi se pyar hai
February 8, 2021
कविता जब देखता हूं जिधर देखता हूं दिख जाती हो मोटे मोटे किताबों के काले काले शब्दों में दिख जाती
Har vade par asha kiya na kro
February 8, 2021
ग़ज़ल हर वादे पर आशा किया ना करो पराधीन होकर जिया ना करो लगी है
Peele Peele phoolon me ab jakar gungunana hai
February 8, 2021
ग़ज़ल पीले पीले फूलों में अब जाकर गुनगुनाना हैरोने वाले को हंसाना है सोने वाले को जगाना है समय के
