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kishan bhavnani, poem

नम्रता का आभूषण धारण करना होगा

 भावनानी के भाव नम्रता का आभूषण धारण करना होगा अपना जीवन सुखी बनाना है तो  अटके काम बनाना है तो  …


 भावनानी के भाव

नम्रता का आभूषण धारण करना होगा

अपना जीवन सुखी बनाना है तो 
अटके काम बनाना है तो 
सुकून से जीवन व्यतीत करना है तो 
नम्रता का आभूषण धारण करना होगा
पड़ोसियों का मन जीतना है तो 
समाज में प्रतिष्ठा बढ़ाना है तो 
संयुक्त परिवार बनाए रखना है तो 
नम्रता का आभूषण धारण करना होगा
भ्रष्टाचारी को रंगे हाथ पकड़वाना है तो 
हिम्मत जज्बे संयमता का गुण पाना है तो 
भ्रष्टाचारी कर्मचारियों को सबक सिखाना है तो 
नम्रता का आभूषण धारण करना होगा
ठसन वाले का भ्रष्टाचार लेके बाबू काम नहीं करता 
मीठी छुरी से उनको पकड़वाना है तो 
अपनी प्रतिष्ठा कायम रखना है तो 
नम्रता का आभूषण धारण करना होगा
अपना व्यापार व्यवसाय मजबूत करना है तो 
मां लक्ष्मी सरस्वती का आश्रय पाना है तो 
आजीवन समृद्धि लाना है तो 
नम्रता का आभूषण धारण करना होगा

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कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 


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