Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel
नम्रता और सुंदरता

poem

नम्रता और सुंदरता

विषय- नम्रता और सुंदरता दो सखियाँ सुंदरता व नम्रता, बैठी इक दिन बाग़ में। सुंदरता को था अहम स्वयं पर, …


विषय- नम्रता और सुंदरता

दो सखियाँ सुंदरता व नम्रता,
बैठी इक दिन बाग़ में।
सुंदरता को था अहम स्वयं पर,
इतराती हर इक बात में।
कहने लगी नम्रता से वह,
देख मैं सबको कितना भाती हूँ।
हो मानव ,प्रकृति और उपवन,
सब पर मैं छा जाती हूँ।
मेरा साथ पाने हर नर नारी आतुर,
दीवाना में कर देती
नयन के रास्ते करूँ ह्रदय को आतुर ,
सबको मतवाला कर देती।
नम्रता मुस्कुरा रही है,
कहती है, सुंदरता को बड़े प्रेम से।
हां सखी मोहे भी तू भाती,
मेरा अस्तित्व दिखता है तुमसे।
मैं चाहती सबको आदर और प्रेम देना,
पर कोई मुझे जाने ना।
जब तक ना रहती संग तू मेरे,
मुझे कोई पहचाने ना।
मेरा नहीं कोई बैर किसी से,
ना द्वेष ना टकराव।
व्यवहार के जरिये में मिलती सबसे,
न देना चाहूँ किसी ह्रदय को घाव।
पर शायद नयनों से कोई,
अस्तित्व को मेरे, नहीं पहचान पाता।
तू नहीं होती जब सखी सुंदरता,
कोई न मुझको सन्मुख लाता।
हो जाती जब अकेली मैं,
तब मित्र शब्द आकर कहते मुझसे,
तो क्या हुआ ,आज सुंदरता नहीं संग तेरे ,
मैं भी तो सखा हूँ तेरा।
तेरे साथ से तो पहचान बनती मेरी,
तेरे साथ से बढ़ता मान मेरा।

नंदिनी लहेजा
रायपुर छत्तीसगढ़
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित


Related Posts

कैसे कोई गीत सुनाये-आशीष तिवारी निर्मल

January 6, 2022

कैसे कोई गीत सुनाये कितने साथी छूट गएसब रिश्ते नाते टूट गएपल-पल मरती आशाएंजब अपने ही लगें परायेकैसे कोई गीत

प्रणय जीवन- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

January 6, 2022

प्रणय जीवन प्रेम जीवन में प्रवाहित,प्रेम से जीवन जुड़ा है,प्रेम का परिणाम हम हैं,प्रेम को जीवन समर्पित ।। जिंदगी पर्याय

जीने का अनुराग नहीं – डॉ हरे कृष्ण मिश्र

January 6, 2022

जीने का अनुराग नहीं प्यासी है नदियां प्यासा है सावन,बर्षा की बेला प्यासा है चातक ,प्यासी है धरती प्यासा है

राधा की पीड़ा- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

January 6, 2022

राधा की पीड़ा चल केशव बरसाना जाना,रूठ गयी जहां राधा रानी ,वृंदावन को भूल गयी है ,अपनों से भी रूठ

देर लगेगी- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 6, 2022

देर लगेगी बदल गया जमाना है…. जरा देर लगेगीन कोई ठौर ठिकाना है…..जरा देर लगेगीतुम होते जो कुत्ते! तो लेते

बताओ न कैसे रहते हो ?–सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 6, 2022

सड़क किनारे रहने वाले ग़रीब बेघरों को समर्पित रचना-बताओ न कैसे रहते हो मौसम ठंडा सूरज मद्धमऊपर से बदन पर

Leave a Comment