Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

नए साल में नई शुरुआत-डॉ. माध्वी बोरसे!

नए साल में नई शुरुआत! नया-नया सा साल, नई नई सी बातें,नया नया सब कुछ है, नई नई सौगातें,नए-नए से …


नए साल में नई शुरुआत!

नए साल में नई शुरुआत-डॉ. माध्वी बोरसे!

नया-नया सा साल, नई नई सी बातें,
नया नया सब कुछ है, नई नई सौगातें,
नए-नए से दिन लगते है, नई नई सी रातें,
नई शुरुआत कैसे करेंगे, हे स्वयं को समझाते!
नया है सब कुछ, नया है हर दिन, नया है अब हर पल,
नया सा लगता, नींद से जगता, पुष्प महकता, खुशी से चमकता, आने वाला हे कल,
निकले अतीत से, क्यों व्यतीत है, नया भविष्य हो उज्जवल,
नया सवेरा, नई धूप है, नई नई सी हलचल!
नए नए कपड़े, नया नया आहार, हर दिन हो खुशियों का त्योहार,
ना कोई झगड़े, ना कोई बिछड़े, त्याग दे सारे लोभ, अहंकार,
नया सा प्रेम, नया सा आदर्श, चलो बनाए स्वयं को होनहार,
खुद की कमजोरियों पर करें प्रहार,
शुद्ध करें स्वयं के आचार विचार!
नया-नया सा साल, नई नई सी बातें,
नया नया सब कुछ है, नई नई सौगातें,
नए-नए से दिन लगते है, नई नई सी रातें,
नई शुरुआत कैसे करेंगे, हे स्वयं को समझाते!

डॉ. माध्वी बोरसे!
(स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

गलतियां दोहराने की सजा- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

गलतियां दोहराने की सजा देश में कोरोना की पहली लहरहमारी सरकारों ने विदेशों से खुद ब खुद हीबुलाई थी,जब इतनी

राजनीति के सियार- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

राजनीति के सियार पैसा किसी के हथियार है,लालच किसी का हथियार है,इसी सनातन मोह कोसत्ता तक पहुंचने की सीढ़ी बनातेआजकल

श्रेष्ठता के मानक- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

श्रेष्ठता के मानक यह गवारा नहीं समाज कोकि सिर्फ अपनी प्रतिभा, लगन औरमेहनत के आधार पर कोई इंसानसमाज में उच्चतम

किस मुगालते में हो?- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

किस मुगालते में हो? एक बात सच – सच बताओ..अभी तक नहीं हुए हो क्या तुमव्यवस्थागत अथवा व्यक्तिगतकिसी बेइंसाफी के

नेताजी – डॉ. इन्दु कुमारी

January 25, 2022

नेताजी सुभाष चंद्र बोस तू ,गये तो गएभारत माँ के भाल, सजा के गएस्वर्णाक्षरों में नाम, लिखा के गएलाल थे

सबसे ख़तरनाक जहर- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

सबसे ख़तरनाक जहर वो बहुत अच्छे से जानते हैंकि जहर की कितनी मात्रा रोज देने सेमर जाती हैं एक इंसान

Leave a Comment