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kishan bhavnani, poem

दे दो दर की नौकरी सतगुरु जी एक बार

भज़नदे दो दर की नौकरी सतगुरु जी एक बार दे दो दर की नौकरी सतगुरु जी एक बार बस इतनी …


भज़न
दे दो दर की नौकरी सतगुरु जी एक बार

दे दो दर की नौकरी सतगुरु जी एक बार
दे दो दर की नौकरी सतगुरु जी एक बार

बस इतनी तनखा देना तेरा होता रहे दीदार

तेरे काबिल नहींहूं सतगुरु फिरभी काम चला लेना
जैसा भी हूं तेरा हूं मेरे सारे अवगुण हर लेना
बस तेरी कृपा होगी सतगुरु तेरी कृपा होगी
मेरा सुधरेगा संसार…

सारे जगत के दाता हो तुम मेरी क्या औकात है
तेरे दर की सेवा करना तो किस्मत की बात है
मानूंगा तेरा कहना सतगुरु दिल में मेरे रहना
तेरा करता रहूं दीदार…

संकट हरता मंगल करता सतगुरु तेरा नाम है
यह तन मन यह जीवन सतगुरु अब तो तेरे नाम है
चरणों में सतगुरु रखना दिल में हमको बसाना
और देना हमको प्यार…

मांगने की आदतहै सतगुरु लाज़ तेरेदर आती नहीं
परवाह करूं क्यों दुनिया की मैं दुनिया तो बिगड़ी
बनाती नहीं तेरा काम है बिगड़ी बनाना भटकों
को राह दिखाना दर पर आता रहूं हर बार..

ओ मेरे दाता सतगुरु दानी तू है कृपालु वरदानी
भीख दे देना हमको सतगुरु नौकर हम अज्ञानी
निखिल की है विनती सारी संगत की है विनती
कृपा करते रहो हर बार…

-लेखक – कर विशेषज्ञ, साहित्यकार कानूनी लेखक, चिंतक, कवि, एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


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