Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Aalekh, Bhawna_thaker, lekh

देश को जलाने में मीडिया कितना जिम्मेदार’/desh ko jalane me media kitna jimmedar

‘देश को जलाने में मीडिया कितना जिम्मेदार’/desh ko jalane me media kitna jimmedar आज देश की दुर्दशा पर रामधारीसिंह दिनकरजी …


‘देश को जलाने में मीडिया कितना जिम्मेदार’/desh ko jalane me media kitna jimmedar

देश को जलाने में मीडिया कितना जिम्मेदार'/desh ko jalane me media kitna jimmedar

आज देश की दुर्दशा पर रामधारीसिंह दिनकरजी की चंद पंक्तियाँ याद आ रही है कि,

“भारत धूलों से भरा, आंसुओं से गीला, भारत अब भी व्याकुल विपत्ति के घेरे में।

दिल्ली में तो है खूब ज्योति की चहल-पहल, पर, भटक रहा है सारा देश अँधेरे में” 

हमारा देश इतना सशक्त है कि एकजुट बन जाए तो महासत्ता बनकर विश्व पर राज कर सकता है पर जातिवाद, धर्मांधता और सियासती खेलों ने नींव को खोखला करके रख दिया है। जग सिरमौर बनने के लायक देश तमस की गर्ता में डूबता जा रहा है।

बीते कुछ सालों में राजनीतिक ध्रुवीकरण तेजी के साथ बढ़ा है, सामाजिक संघर्ष, आंतकवाद, आगजनी, दंगे और हर छोटी बड़ी बातों पर विद्रोह की घटनाएं तेजी के साथ बढ़ रही है। साथ ही इंटरनेट और सोशल मीडिया पर अपलोड हो रही आधी अधूरी जानकारियों के जरिए हिंसात्मक घटनाओं में तब्दील होती जा रही हैं। युवा पीढी सोशल मीडिया और इंटरनेट के इस्तेमाल से अच्छी चीज़ें सीखने की बजाय अतिवाद और हिंसात्मक रवैया अपना रही हैं। 

“मैं बूढ़ा प्रहरी उस जग का जिसकी राह अश्रु से गीली, मुरझा कर ही जहाँ शरण

पाती दुनिया की कली फबीली”

प्रहरी अकेला क्या करें करोड़ों की आबादी में सभी की विचारधारा अलग-अलग एकजुट कैसे करें? हर बात में नुक्श निकालना जनता की फ़ितरत बनती जा रही है।

सोने की चिड़िया के पर काटकर रक्त रंजीत कर दिया ये कौन सी छुरी बाज़ार में आई जिसने कत्ले-आम कर दिया। ये मीडिया नाम की बला का चिंगारी को हवा देने का काम है। खासकर टीवी न्यूज़ चैनल वालों ने देश के हर मुद्दे को धार्मिक रंग देकर पेश करने की मानों कसम उठाई है। मीडिया आजकल अपनी जिम्मेदारी को परे रखते अराजकता की आग लगाकर निरंतर हिंसा को भड़काने का काम कर रही है।

माना की आज के ज़माने में मीडिया संचार, प्रसार और किसी भी विषय वस्तु के बारे में जानकारी उपलब्ध करने का एक अहम और सशक्त माध्यम है, मीडिया के ज़रिए बहुत सारे काम आसान बन गए है। पर जैसे हर चीज़ के दो पहलू होते है वैसे मीडिया के भी दो पहलू है। मीडिया ने जनता को निर्भीकता पूर्वक जागरूक करने, भ्रष्टाचार को उजागर करने, सत्ता पर तार्किक नियंत्रण एवं जनहित कार्यों की अभिवृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, वहीं हर मुद्दे को धर्म के तराजू में तोल कर लोगों की धार्मिक भावना से ख़िलवाड़ करते दो कोमों के बीच वैमनस्य फैला कर देश में अराजकता का माहौल पैदा करने का काम भी किया है। लालच, भय, द्वेष, स्पर्धा, दुर्भावना और राजनैतिक कुचक्र के जाल में फंसकर अपनी भूमिका को कलंकित किया है। यलो जर्नलिज़्म को अपनाकर चटपटी खबरों को तवज्जों देना और खबरों को तोड़-मरोड़कर पेश करना, दंगे भड़काने वाली खबरे प्रकाशित करना, घटनाओं एवं कथनों को द्विअर्थी रूप प्रदान करना, भय या लालच में सत्तारूढ़ दल की चापलूसी करना, अनावश्यक रूप से किसी की प्रशंसा करना और हर मुद्दे पर दंगल करवाते विशेषज्ञों और धर्म गुरुओं की फौज बुलाकर परिचर्चा के नाम पर जनता के दिमाग में ज़हर घोलने का काम किया है। हर संभावना पर नकारात्मक प्रश्नार्थ चिन्ह लगाकर जनता के दिमाग में शक का कीड़ा छोड़ देता है।

दुर्घटना और संवेदनशील मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करके सच को झूठ के रुपहले रैपर में लपेटकर सत्ताधिशों को खुश करने का काम करता है मीडिया।

छोटे से मशीन मोबाइल ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी इस मशीन में जो फाॅरवर्ड फाॅरवर्ड का खेल चलता है वो आग में घी ड़ालने का काम करता है। मैटर कोई भी हो एक बंदा विडियो बनाकर अपलोड कर देता है जो चंद पलों में विश्वभर में पहुँच जाता है। फेसबुक, वोटसएप पर देश में हो रही किसी भी गतिविधि को पोस्ट करने पर बैन लगनी चाहिए। अफ़वाहों का बाज़ार और खबरों को चटपटा बनाने की दुकान है ये सोशल मीडिया। एक टीवी कम था जो आग में घी होमने फेसबुक और वाट्सएप ने भी खाता खुलवाया है। हर छोटे बड़े मुद्दे को बढ़ा चढ़ाकर मरी मसाले छिड़ककर परोसने में माहिर है।

देश के संविधान में लोकतंत्र के चार मुख्य स्तम्भ में से एक मीडिया को माना जाता है। मीडिया की समाज के प्रति, देश के प्रति सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। मीडिया ऐसा माध्यम है जो आम जनता की हल्की सी आवाज को बुलंद करके न्यायाधीशों की बुनियाद हिला सकता है। अगर मीडिया अपनी भूमिका तटस्थ रहकर निभाता तो लोगों के दिमाग से उठती विद्रोह की ज्वाला यूँ देश को न जलाती

हमारे देश में मीडिया को विचार अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता संविधान में प्रदत्त है ताकि अपने कार्यों को बिना झिझक कर सकें परन्तु क्या मीडिया उसे मिली आजादी को पूरी जिम्मेदारी से जनहित के लिए निभा पा रही है? क्या वह पूर्णतया इमानदार है? क्या देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के लिए वह भी कहीं न कहीं जिम्मेदार नहीं है? अरे मीडिया स्वयं भ्रष्ट हो गया है। मीडिया अब सिर्फ़ अपनी कमाई और टी.आर.पी. के लिए अधिक चिंतित है देश के हालातों पर नहीं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और इंटरनेट पर फैल रही जानकारियों का तेजी के साथ फिल्टर होना बहुत जरूरी है। जिस विडियो या मैसेज पर धार्मिक और सामाजिक विभाजनकारी कंटेंट लिखा होता है उसका बड़ी तेजी के साथ प्रचार-प्रसार विभिन्न सोशल मीडिया चैनलों और इंटरनेट के ज़रिए किया जाता है।

अगर मीडिया चाहे तो अपनी सशक्त भूमिका द्वारा समाज में शांति, सौहार्द, समरसता और भाईचारे की भावना विकसित कर सकता है। सामाजिक तनाव, संघर्ष, मतभेद, युद्ध एवं दंगों के समय मीडिया को बहुत ही संयमित तरीके से काम करना चाहिये। राष्ट्र के प्रति समर्पण और एकता की भावना को उभरने में भी मीडिया की अहम भूमिका होनी चाहिए। खासकर हर मुद्दों का सही पहलू समाज के सामने रखकर अफ़वाहों का खंडन करवाते प्रस्तुतीकरण ऐसा होना चाहिए जो समाज का सही मार्गदर्शन कर सकें।

नये प्रात के अरुण तिमिर-उर में मरीचि-संधान करो, युग के मूक शैल उठ जागो, हुंकारो, कुछ गान करो।

भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर


Related Posts

zindagi aur samay duniya ke sarvshresth shikshak

July 11, 2021

 जिंदगी और समय ,दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक जिंदगी, समय का सदा सदुपयोग और समय, जिंदगी की कीमत सिखाता है  जिंदगी

kavi hona saubhagya by sudhir srivastav

July 3, 2021

कवि होना सौभाग्य कवि होना सौभाग्य की बात है क्योंकि ये ईश्वरीय कृपा और माँ शारदा की अनुकम्पा के फलस्वरूप

patra-mere jeevan sath by sudhir srivastav

July 3, 2021

पत्र ●●● मेरे जीवन साथी हृदय की गहराईयों में तुम्हारे अहसास की खुशबू समेटे आखिरकार अपनी बात कहने का प्रयास

fitkari ek gun anek by gaytri shukla

July 3, 2021

शीर्षक – फिटकरी एक गुण अनेक फिटकरी नमक के डल्ले के समान दिखने वाला रंगहीन, गंधहीन पदार्थ है । प्रायः

Mahila sashaktikaran by priya gaud

June 27, 2021

 महिला सशक्तिकरण महिलाओं के सशक्त होने की किसी एक परिभाषा को निश्चित मान लेना सही नही होगा और ये बात

antarjateey vivah aur honor killing ki samasya

June 27, 2021

 अंतरजातीय विवाह और ऑनर किलिंग की समस्या :  इस आधुनिक और भागती दौड़ती जिंदगी में भी जहाँ किसी के पास

Leave a Comment