Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr-indu-kumari, poem

देश के वीर सपूतों में वीरांगना- डॉ. इन्दु कुमारी

देश के वीर सपूतों में वीरांगना वीरता की श्रृंखला में जुड़करप्रहरी बन आ रही है बहनाभाई हिम्मत नहीं है हारनाचल …


देश के वीर सपूतों में वीरांगना

देश के वीर सपूतों  में  वीरांगना-  डॉ. इन्दु कुमारी

वीरता की श्रृंखला में जुड़कर
प्रहरी बन आ रही है बहना
भाई हिम्मत नहीं है हारना
चल चला चल अपने पंंथ

दुश्मन के छक्के छुड़ाने हैं
जौहर दिखा रही वीरांगना
खुशहाल हुई है तेरे कारण
राष्ट्र की ये सुन्दर अंगना

सदियों से भाई जवानों तू
देश की कमान संभाली है
निकल पड़ी है देखो जहाँ में
सर पे कफन बाँध तेरी ललना

समर में कुद पड़ी है वो
पीछे मुड़कर ना देखेगी
तिरंगे में लिपट रूकसत
होगी वो।

वीरता की सिन्दुर माथे पर
सदा दमकती रहेगी
चाँद सूरज की बिन्दी से
लीलार सजती रहेगी

पहन निकल गई शहादत
की कंगना
शेरों में वीर भैया की शेरनी
वीरांगना बहना।

डॉ. इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार


Related Posts

उलझे-बिखरे सब”- अनीता शर्मा

December 8, 2021

उलझे-बिखरे सब” कितने उलझे-उलझे हुए सब , कितने बिखरे-बिखरे हुए सब। बनावटी दुनिया में उलझे हुए सब, दिखावटी सब सज-धज

चल चला चल राही तू-डॉ माध्वी बोरसे!

December 4, 2021

चल चला चल राही तू! चल चला चल राही तू, मुसाफिर तू कभी रुकना ना,रुकना ना, कभी झुकना ना,तेरेते रह

ऐ उम्मीद -सिद्धार्थ गोरखपुरी

December 3, 2021

ऐ उम्मीद ऐ उम्मीद! मैं तुमसे छुटकारा चाहता हूँ। क्योंकि मैं खुश रहना ढेर सारा चाहता हूँ।तुम न होती तो

बेमानी- जयश्री बिरमी

December 3, 2021

बेमानी उम्रभर देखी हैं ये दुनियां की रस्मेंन ही रवायतें हैं निभाने की कसमेंजब भूले गए थे वादे और तोड़ी

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल”-हेमलता दाहिया.

December 3, 2021

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल” बात बात में शामिल हैं,जाति धर्म के बोल.खोखले वादे खोल रहे हैं,हैं विकास

ना लीजिए उधार-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

ना लीजिए उधार! ना लीजिए उधार, बन जाओ खुद्दार,लाए अपनी दिनचर्या में, थोड़ा सा सुधार, अपने कार्य के प्रति, हो

Leave a Comment