Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

देश की रीढ़ कृषि क्षेत्र

देश की रीढ़ कृषि क्षेत्र किसान भागीदारी, प्राथमिकता हमारी और नवोन्वेषी कृषि अभियान सहित कृषि विकासोन्मुख अभियानों को युद्ध स्तर …


देश की रीढ़ कृषि क्षेत्र

एड किशन भावनानी
किसान भागीदारी, प्राथमिकता हमारी और नवोन्वेषी कृषि अभियान सहित कृषि विकासोन्मुख अभियानों को युद्ध स्तर पर चलाना समय की मांग

कृषि क्षेत्र के लिए विकसित प्रौद्योगिकियों को कृषक समुदाय तक पहुंचाने अथक मेहनत, वैज्ञानिक कौशलता व हितैषी नीतियों का अभूतपूर्व संगम ज़रूरी – एड किशन भावनानी

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर प्रौद्योगिकियों के बढ़ते अति उन्नत नवाचारों, तकनीकों, क्रियाकलापों के कारण हर देश हर, क्षेत्र को वर्तमान प्रौद्योगिकियों के अनुसार परिवर्तित करने, इंफ्रास्ट्रक्चर को अपडेट करने सहित अपनी विस्तारित निर्णयों, नीतियों, रणनीतिक साझेदारीयों को विस्तारित परिपेक्ष में अमल में लाने को मजबूर हो गए हैं। क्योंकि आधुनिकता के दौर में कन्वर्ट नहीं होने से तेजी से पिछड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता यही कारण है कि भारत भी तेजी के साथ नवाचारों, नवोन्वेषी से भारत के हर क्षेत्र में प्रौद्योगिकी अनुसार बदलाव करते जा रहा है क्योंकि भारत एक ग्रामीण व कृषि प्रधान देश है इसलिए हमारे लिए यह प्राथमिकता है कि हम कृषि क्षेत्र को पहले प्रौद्योगिकी की सहायता से अति आधुनिक करें ताकि अधिकतम आबादी को लाभ हो के दायरे में लाया जा सके
साथियों बात अगर हम कृषि क्षेत्र में आधुनिकता की करे तो यह काम करीब एक दशक से शुरू है परंतु उस परिपेक्ष में इस क्षेत्र को अति आधुनिक नहीं किया जा सका है जितना करने की जरूरत है जिसका कारण है कृषक समुदाय में जागरूकता, शिक्षा और जानकारी की कमी!! हमारे बड़े बुजुर्गों का कहना सच ही है कि जब तक किसी बात, जानकारी या तकनीकी को अपने दिलो-दिमाग और हृदय में नहीं बसाते वह तुमसे नहीं हो सकेगा चाहे कितनी भी कागजों पर तुम प्लानिंग कर लो!! बात बिल्कुल सच है याने दूसरी भाषा में हम कहेंगे तो इसी योजना तकनीकी प्रौद्योगिकी का अगर हम अभियान चलाकर उस क्षेत्र में उसे संचालित कर उसके फायदे को कृषि समुदाय से अवगत नहीं कराएंगे तब तक उसको क्रियान्वयन करने में कठिनाई होगी। बस!! यही बात और कृषि क्षेत्र की नस सरकार के पकड़ आई है और सही दिशा में कदम बढ़ाना चालू किया है जो पिछले कुछ वर्षों से हम देख रहे हैं कि किसानोंको लाभान्वित योजनाओं का अभियान चलाकर कृषक समुदाय को जनजागृत कर समझाया जा रहा है।
साथियों बात अगर हम इस परिपेक्ष में किसान भागीदारी प्राथमिकता हमारी अभियान की करें तो 25 अप्रैल से 30 अप्रैल 2022 तक बातचीत कर कृषक समुदाय को विभिन्न परियोजनाओं, तकनीकों की जानकारी प्रदान कर उपलब्धियों, किसी को मिलने वाले लाभों को जमीनी स्तर पर आकलन करना है।
साथियों बात अगर हम 26 अप्रैल 2022 को केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा इस अभियान की शुरुआत कर संबोधन की करें तो पीआईबी के अनुसार, कृषक समुदाय को मजबूत करने के लिए ‘किसान भागीदारी प्रथमिकता हमारी’’ अभियान समर्पित किया जा रहा है। इसमें देश भर के 731 कृषि विज्ञान केंद्रों और अन्य कृषि संस्थानों में लाखों किसानों, कई सांसदों और अन्य जन प्रतिनिधियों और वैज्ञानिकों ने मेलों के माध्यम से भाग लिया। उन्होंने किसानों से कहा कि वे समय के साथ प्रयोग करने और बदलने के लिए तैयार रहें, उन्हें नई किस्म के बीजों का उपयोग करने, अपनी मिट्टी की गुणवत्ता का परीक्षण करने, किसान उत्पादक संगठनों में शामिल होने और ड्रोन सहित प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के लिए तैयार रहना चाहिए। किसानों को पीएम फसल बीमा योजना के सुरक्षा कवच के तहत आने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। प्राकृतिक खेती पर उन्होंने कहा कि इसे बढ़ावा दिया जा रहा है और आईसीएआर इसे पाठ्यक्रम में शामिल कर रहा है।
साथियों बात अगर हम नवोन्वेषी कृषि पर दिनांक 25 अप्रैल 2022 को हुई राष्ट्रीय कार्यशाला में केंद्रीय कृषि मंत्री के विचारों की करे तो पीआईबी के अनुसार उन्होंने कहा कि हमारी परंपराएं हैं, हमारे सिद्धांत है लेकिन युग के साथ चलना भी हमें आता है। हम लकीर के फकीर नहीं है। सभी को आगे बढ़ने की ललक है। समय के साथ हम अपने-आप को दुरुस्त करें, यह बात देश में आध्यात्मिक व व्यापारिक दृष्टि से स्थापित रही है, जो अब कृषि क्षेत्र में भी प्राकृतिक खेती को अपनाने के रूप में होना चाहिए। प्रकृति से संतुलन बैठाने वाली पद्धति के माध्यम से हम तेजी के साथ आगे बढ़ सकेंगे, जो समयानुकूल भी है। आज आवश्यकता इस बात की भी है कि कृषि क्षेत्र के माध्यम से रोजगार की उपलब्धता बढ़ें, पढ़े-लिखे युवाओं को गांवों में ही रोजगार मिलें। प्राकृतिक खेती के माध्यम से भूमि की सेहत तो ठीक होगी ही, नए रोजगार भी सृजित होंगे।
रसायनिक खेती के दुष्प्रभावों का आंकलन करते हुए केंद्र सरकार ने पीएम के मार्गदर्शनमें प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का निश्चय किया है। उन्होंने कहा कि यह हमारी देशी प्राचीन पद्धति ही है, जिसमें खेती की लागत कम आती है और प्राकृतिक संतुलन स्थापित होने से किसानों को फायदा पहुंचता है। प्राकृतिक खेती रसायनमुक्त व पशुधन आधारित है, जिससे लागत में कमी के साथ ही किसानों की आय में वृद्धि स्थिर पैदावार होगी तथा पर्यावरण व मृदा स्वास्थ्य सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि कृषि मंत्रालय द्वारा भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति की उप -योजना के माध्यम से किसानों को प्रेरित-प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप प्राकृतिक खेती का रकबा बढ़ रहा है, जो अभी लगभग चार लाख हेक्टेयर क्षेत्र तक पहुंच चुका है।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए पीएम नें देशव्यापी अभियान प्रारंभ किया है और इस दिशा में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग भी मिशन मोड में कार्य करने जा रहा है। कृषि संबंधी पाठ्यक्रमों में भी प्राकृतिक खेती का विषय शामिल करने को लेकर बनाई गई समिति ने भी काम शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से हमारा प्रकृति के साथ तालमेल बढ़ेगा, जिसके कृषि क्षेत्र में- गांवों में ही रोजगार बढ़ने सहित देश को व्यापक फायदे होंगे।
साथियों बात अगर हम किसान भागीदारी प्राथमिकता हमारी जन-जागरण कार्य शालाओं की करें तो यह आयोजन 28 अप्रैल 2022 को भी किया गया जो एक व्यापक श्रृंखला के रूप में था। अभियान के हिस्से के रूप में, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय कल देश के विभिन्न स्थानों पर उनके एफटीटीआई (कृषि यंत्र प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान) के माध्यम से कृषि मशीनरी प्रदर्शन का आयोजन किया। एफटीटीआई इसके साथ साथ महिला कृषकों को भी प्रशिक्षण प्रदान किया। वास्तविक रूप से प्रक्षेत्र दौरों के साथ साथ, नवोन्मेषकों तथा उद्योगों के बीच तालमेल उपलब्ध कराने के लिए ऑनलाइन वेबिनारों का आयोजन भी किया।
वर्तमान में जारी ‘किसान भागीदारी प्राथमिकता हमारी‘ अभियान के हिस्से के रूप में विभिन्न कार्यकलापों का आयोजन भी कर रहे हैं जिनमें जैव फोर्टिफिकेशन, पोषक अनाज, बाजरा की खेती तथा फसल विविधीकरण पर आईसीएआर के संस्थानों के माध्यम से एक राष्ट्रव्यापी अभियान शामिल है। भूमि संसाधन विभाग का वाटरशेड प्रबंधन प्रभाग ‘‘समेकित वाटरशेड विकास, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग, आजीविका तथा किसानों की आय को बढ़ाने की दिशा में इसका योगदान‘‘ विषय पर एक वेबिनार का आयोजन कर रहा है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि देश की रीढ़ कृषि क्षेत्र। किसान भागीदारी प्राथमिकता हमारी नवोन्वेषी कृषि सहित कृषि विकासोन्मुख अभियान युद्ध स्तरपर चलाना समय की मांग हैं। कृषि क्षेत्र के लिए विकसित प्रौद्योगिकियों को कृषक समुदाय तक पहुंचाने अथक मेहनत, कौशलता व हितैषी नीतियों का भूतपूर्व संगम ज़रूरी है।

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

वाह रे प्याज ! अब आंसुओं के सरताज

October 28, 2023

वाह रे प्याज ! अब आंसुओं के सरताज किचन के बॉस प्याज ने दिखाया दम ! महंगाई का फोड़ा बम

दिवाली की सफाई और शापिंग में रखें स्वास्थ्य और बजट का ध्यान

October 28, 2023

दिवाली की सफाई और शापिंग में रखें स्वास्थ्य और बजट का ध्यान नवरात्र पूरी हुई और दशहरा भी चला गया,

शरद पूर्णिमा एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण

October 28, 2023

शरद पूर्णिमा एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण हिंदू कैलेंडर में सभी व्रत त्यौहार चंद्रमा की कलाओं के अनुसार निर्धारित तिथियों पर मनाए

दशानन: एक वैचारिक अध्ययन | Dashanan: A Conceptual Study

October 23, 2023

दशानन: एक वैचारिक अध्ययन नवरात्रों के अवसर पर माता के पंडालों के दर्शन हेतु बाहर जाना होता था तो बाजार

बदलती रामलीला: आस्था में अश्लीलता का तड़का

October 23, 2023

बदलती रामलीला: आस्था में अश्लीलता का तड़का जब आस्था में अश्लीलता का तड़का लगा दिया जाता है तो वह न

कन्या-पूजन नहीं बेटियों के प्रति दृष्टिकोण बदलने की जरूरत

October 22, 2023

कन्या-पूजन नहीं बेटियों के प्रति दृष्टिकोण बदलने की जरूरत नवरात्रि का पर्व नारी के सम्मान का प्रतीक है। नौ दिनों

PreviousNext

Leave a Comment