Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Aalekh, lekh, Megha Rathi

दुःख में कारण नहीं समाधान तलाशें

दुःख में कारण नहीं समाधान तलाशें आज के समय में अगर किसी भी व्यक्ति से पूछा जाय कि वह जीवन …


दुःख में कारण नहीं समाधान तलाशें

दुःख में कारण नहीं समाधान तलाशें

आज के समय में अगर किसी भी व्यक्ति से पूछा जाय कि वह जीवन में खुश है या नहीं तो पहले वह कहेगा कि हां सब ठीक है पर बाद में या तो स्वयं ही अपनी समस्याएं बताएगा या मन में उनके विषय में सोचेगा और खुद को दु:खी महसूस करेगा। प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी कारणवश दु:खी है और ऐसा नहीं कि यह केवल वर्तमान युग में ही है।मनुष्य अपनी परिस्थितियों या स्वभाव के कारण दुखी रहता है।

देखा जाय तो दु:ख एक स्थाई भाव बन गया है और खुश रहने के लिए व्यक्ति को कारण तलाशने पड़ते हैं। क्यों?… जब दुःख के लिए कारण नहीं ढूंढने पड़ते हैं वह स्वयमेव प्राप्त हो जाते हैं तो सुख के लिए वजह क्यों ढूंढना है? दरसल दुःख मानसिक अवस्था है। मानसिक रूप से दुर्बल व्यक्ति अन्य व्यक्तियों की अपेक्षा अधिक दुखी रहता है क्योंकि वह उस दुःख के विषय में ज्यादा सोचता है…विचार करता रहता है।

जीवन में जब भी कठिन परिस्थिति आए तो एक बार यह चिंतन अवश्य करना चाहिए कि क्या यह समस्या वास्तव में दुःख कहलाने के लायक है? …क्या वास्तव में यह इतनी बड़ी है कि इसका कोई समाधान नहीं? दूसरी बात – यह दुःख किस कारण से है?

अगर आप अपने कार्यक्षेत्र में सफल नहीं हो पा रहे हैं तो इसका अर्थ है कि आप सही दिशा में परिश्रम नहीं कर रहे…यदि परिश्रम की दिशा सही है तो आप बीच में आई बाधाओं से घबरा कर अपने लक्ष्य के अंतिम चरण तक नहीं जा रहे और हताश होकर बैठ गए हैं। फिर तो इस कष्ट के कारण आप स्वयं है और निदान भी आप ही हैं, अपने उत्साह को जीवित रख कर पूरी तरह अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए जुट जाइए, आपका दुःख सुख में अवश्य बदलेगा।

यदि आप अकेलेपन से दुःखी हैं, आपको लगता है कि आपके प्रिय आपका साथ छोड़ गए तो विचार कीजिए कि क्या कारण था? यदि आपके स्वभाव में कमी है तो आप उसे बदलिए और यदि वे प्रिय आपके सफलता के समय के साथी थे तब तो निश्चित है कि आपके बुरे दिनों में वे आपको छोड़कर जाएंगे ही क्योंकि वे सिर्फ सुख के साथी थे। ऐसे स्वार्थी लोगों के लिए क्यों दुःखी होना!… हां अगर आपके बुरे दिनों में भी जिन्होंने आपका साथ नहीं छोड़ा पर अब वे आपसे दूर हो रहे हैं तो अवश्य विचार कीजिए क्योंकि उनका जाना अवश्य ही किसी बड़े कारण से है।

सांसारिक सुविधाओं का अभाव इतना बड़ा कारण नहीं जिसके लिए दुःखी हुआ जाय। रोग दुःख के कारण है क्योंकि यह कहीं न कहीं हमारी स्वयं के प्रति लापरवाही से अर्जित किए गए हैं।
कुछ लोगों की आदत होती है दुःखी रहने की, वे हर उस बात से भी दु:खी हो जाते हैं जिसका कोई अस्तित्व है ही नहीं पर दुःखी होना उनका स्वभाव बन गया है। वे सुख की अधिकता के कारण उस बात को भी दुःख समझने की भूल कर बैठते है जो दुःख किसी भी प्रकार से नहीं है जैसे कार सस्ती है, महंगी वाली नहीं… हमारा घर तीन कमरों का ही है…मेरे पास बड़ी ब्रांड के कपड़े नहीं आदि। वे दूसरों से अपनी तुलना कर के ज्यादा दु:खी रहते हैं।

दुःख के अनेक कारण है उसी प्रकार सुखी रहने की भी अनेक वजह हैं। छोटी– छोटी बातों पर जिस तरह आप दुखी हो जाते हैं उसी प्रकार छोटी– छोटी बातों पर खुश होने की आदत डालिए। मसलन… किसी नई क्रीम या साबुन को पहली बार प्रयोग करना है तो आप इसी बात पर प्रसन्न हो सकते हैं, आज खाना अच्छा बना…सुबह जल्दी उठ कर प्रकृति का सामीप्य पाना, टीवी पर आपकी मनपसंद फिल्म आ जाना आदि… छोटी– छोटी खुशियां बिखरी हुई हैं।

कभी अचानक खुद को उपहार दें, कभी –कभी यूं ही बेवजह तैयार होकर घूमने की योजना बनाइए। आसपास के लोगों से परिचय बढ़ाइए, कोशिश कीजिए कि दिन में एक अच्छा काम जरूर करें फिर देखिए दुःख ज्यादा मात्रा में आपके समीप रहेंगे अथवा खुशी।

आपके इष्ट, जिसे भी आप मानते हैं, कुछ देर उनका ध्यान अवश्य करें। प्रार्थनाएं सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और आपको ,आपके दुःख की नकारत्मकता से हटाकर उसके समाधान खोजने की ओर प्रेरित करती हैं।

अब जब भी कभी आप महसूस करें कि आप दुखी हैं तो पहले कारण तलाशियेगा कि क्या यह वास्तव में दुःख है या मात्र एक समस्या है और यदि आप वास्तव में दुखी हैं तो भी मानसिक तौर पर कमजोर मत पड़िए क्योंकि चिंतन, प्रयास और मजबूत इच्छाशक्ति ही उसे खत्म भी करेंगे। खुद पर ध्यान दीजिए, दूसरों पर नहीं क्योंकि जीवन आपका है इसे सुखी बनाना आपके हाथ में है।

About author 

मेघा राठी भोपाल, मध्य प्रदेश
मेघा राठी

भोपाल, मध्य प्रदेश


Related Posts

वैश्विक महामंदी से हो सकता है सामना

September 26, 2023

2024 की कामना – वैश्विक महामंदी से हो सकता है सामना दुनियां में वर्ष 2024 में महामंदी छाने की संभावनां

सरकार ऐडेड विद्यालयों का राजकीयकरण

September 26, 2023

सरकार ऐडेड विद्यालयों का राजकीयकरण कर दे, 18 वर्ष पूर्व छीनी गई पुरानी पेंशन को वापस लौटा दे, आज से

कवि पृथ्वी सिंह बैनीवाल के काव्य मे पर्यावरण चेतना

September 26, 2023

कवि पृथ्वी सिंह बैनीवाल के काव्य मे पर्यावरण चेतना– डॉक्टर नरेश सिहाग एडवोकेट अध्यक्ष एवं शोध निर्देशक, हिंदी विभाग, टांटिया

ओबीसी के नाम पर बेवक़ूफ़ बंनाने का ड्रामा

September 24, 2023

ओबीसी के नाम पर बेवक़ूफ़ बंनाने का ड्रामा आंकड़ों का अध्यन करें तो हम पाएंगे कि देश के कुल केंद्रीय

संयुक्त राष्ट्र महासभा का 78 वां सत्र

September 24, 2023

संयुक्त राष्ट्र महासभा का 78 वां सत्र 26 सितंबर 2023 को समाप्त होगा – भारतीय उपलब्धियों का डंका बजा जी-4

भारत-कनाडा तल्खी बड़ी

September 23, 2023

भारत-कनाडा तल्खी बड़ी – तीन दिन में तीन एक्शन – पश्चिमी देश सतर्क भारत-कनाडा संबंधों में तपिश नए निचले स्तरपर

PreviousNext

Leave a Comment