Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

दिव्य प्रकाश।

दिव्य प्रकाश। ऐसा प्रकाश हम बने,दिव्य उजाला लेकर आए,अंधेरे है जीवन में बहुत घने,हम भी थोड़ी रोशनी बन जाए। अपने …


दिव्य प्रकाश।

ऐसा प्रकाश हम बने,
दिव्य उजाला लेकर आए,
अंधेरे है जीवन में बहुत घने,
हम भी थोड़ी रोशनी बन जाए।

अपने हुनर के सेज से,
कुछ नहीं तो अपने आसपास चमकाए,
प्रेम और दीनता के तेज से,
इंसानियत के दीए जलाएं।

अखंड नैतिकता की ज्योति हो,
जो कभी भुज ना पाए,
चमकदार माला पीरोती हो,
जो हमारे अस्तित्व को सजाए।

सकारात्मकता का चिराग बनकर,
स्वयं में उचित दृष्टिकोण लाए,
यज्ञ की आग सी जलकर,
समस्त नकारात्मकता को जलाए।

ऐसा प्रकाश हम बने,
दिव्य उजाला लेकर आए,
अंधेरे है जीवन में बहुत घने,
हम भी थोड़ी रोशनी बन जाए।

About author

स्वयं को पहचाने!
डॉ. माध्वी बोरसे।
(स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

क्यों एक ही दिन मां के लिए

May 8, 2022

क्यों एक ही दिन मां के लिए मोहताज नहीं मां तुम एक खास दिन कीतुम इतनी खास हो कि शायद

सशक्त मां, सशक्त विश्व!

May 8, 2022

सशक्त मां, सशक्त विश्व! अत्यंत बुरे अनुभवों में से एक जो एक बच्चा देख सकता है, वह परिवार या समाज

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास

May 8, 2022

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास  मां शब्द का विश्लेषण शायद कोई कभी नहीं कर पाऐगा, यह दो

मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं

May 7, 2022

“मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं” जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य

माँ तेरे इस प्यार को

May 7, 2022

माँ तेरे इस प्यार को तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो

बीते किस्से

May 7, 2022

बीते किस्से अपनी जिंदगी के कुछ नायाब किस्से मैं सुनाती हूंलोग कहते मुझे पागल , मैं तो कलम कि दीवानी

PreviousNext

Leave a Comment