Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh, Priyanka_saurabh

दफ्तरों के इर्द-गिर्द खुशियां टटोलते पति-पत्नी

 दफ्तरों के इर्द-गिर्द खुशियां टटोलते पति-पत्नी आज एकल परिवार और महिलाओं की नौकरी पर जाने से दांपत्य सुख के साथ-साथ …


 दफ्तरों के इर्द-गिर्द खुशियां टटोलते पति-पत्नी

दफ्तरों के इर्द-गिर्द खुशियां टटोलते पति-पत्नी

आज एकल परिवार और महिलाओं की नौकरी पर जाने से दांपत्य सुख के साथ-साथ पारिवारिक सुख जो होना चाहिए वह नहीं है। बच्चे किसी और पर आश्रित होने के कारण टीवी मोबाइल में घुसे रहते हैं। कामकाजी पति-पत्नी के मामलों में यह बात सामने आ रही है कि दोनों ऑफिस के बाद घर में मोबाइल पर व्यस्त हो जाते हैं। सोशल साइट्स पर चैटिंग करना भी घर टूटने का एक बड़ा कारण बन रहा है। ऐसे मामलों में एक-दूसरे का हस्तक्षेप भी पसंद नहीं आ रहा है। अपने-अपने मोबाइल में घुसे रहते हैं जबकि उन्हें तब दांपत्य सुख के साथ जीना चाहिए। ऐसे में भौतिक सुख सर्वोपरि हो जाता है। माना कि कुछ शादीशुदा महिलाएं अपवाद हो सकती है, पर शादीशुदा औरतों का नौकरी करना उनके परिवार को पूर्ण सुख दे पाता है या नहीं ये आज हमारे समाज की एक ज्वलंत व्यथा है।

-प्रियंका सौरभ

आज की स्थिति ठीक उल्टी है। जब से पुरुष और नारी में बराबरी की बात चल पड़ी है। समान अधिकारों की बात चल पड़ी है। उन्हें शिक्षित करने और फिर शादीशुदा औरतों को भी नौकरी करने की बात चल पड़ी है। तब से बौद्धिक सुख में अपार वृद्धि तो जरूर हुई है किंतु दोनों के बीच का आत्मिक सुख कहीं खो सा गया है।पति-पत्नी दोनों एक-दूजे में खुशी खोजने के बजाय अपने दफ्तरों के इर्द-गिर्द खुशियां टटोलने में लगे रहते हैं। इस तरह जाने-अनजाने खुशियां मिल भी जाती है। किंतु क्या उनका आत्मिक संबंध इतना मजबूत रहता है कि वह परिवार की मर्यादा बनाए रखने के साथ-साथ बच्चों का समुचित और सर्वांगीण विकास कर सके। यहां पर सोचने की बात यह है कि आज अधिकांश बच्चे क्यों बिगड़ रहे हैं? क्यों उनका संतुलित विकास नहीं हो पाता? क्यों वातानुकूलित रूम में बैठे दंपति अपने -अपने टीवी और मोबाइल खोल कर बैठ जाते हैं? और खो जाते हैं रंगीन ख्वाबों की दुनिया में। करीब का दांपत्य सुख क्यों बोरियत लगने लगा है? और क्यों बहुत जल्दी ही तो थकान में बदल जाता है, उनका अपना मधुर दांपत्य संबंध?

 क्यों आम जीवन में जी रहे दंपति के अपेक्षा नौकरीपेशा पति-पत्नी अभिमानी और संगीन भावनाओं के शिकार हो जाते हैं? शादीशुदा औरत और नौकरी के संदर्भ में सोचे समझे तो क्या शिक्षित औरतों को नौकरी की तभी जरूरत है जब पुरुष कमा कर उसे खिलाने-पिलाने और परिवार चलाने में असमर्थ साबित हो? ताकि नौकरी कर इससे शिक्षित औरतें घर परिवार को शिक्षित बना सकेगी और सही से अपने बच्चों की देखभाल भी कर सकेगी? या हम ये कहें कि यदि औरतों को इतना शौक है नौकरी करने का तब मर्द को चाहिए कि वह घर संभाले। दोनों के किसी भी एक के अभाव में घर और परिवार एक मकान मात्र रह जाता है या रोटी दाल सब्जी सब कुछ मिल जाता है किंतु संस्कार नहीं मिल पाते।

 कामकाजी पति-पत्नी की एक-दूसरे पर निर्भरता खत्म होती जा रही है। दोनों स्वतंत्र होकर फैसले लेते हैं, जिसमें कई बार ईगो भी टकराता है। साथ ही एक-दूसरे के लिए समय नहीं निकाल पाना भी भाग-दौड़ भरी जिंदगी में अलगाव का एक बहुत बड़ा कारण बन रहा है। अगर दोनों खुलकर बातचीत करेंगे तो उनके अंदर की बातें सामने आएंगी। वास्तव में यह तो सच ही कि अगर स्त्री को अपना परिवार बचाना है तो अपने बच्चों के साथ- साथ सबका ध्यान रखना ही होगा। दाई नौकर के भरोसे बच्चों को छोड़ेंगे तो बच्चा ऐसा नहीं होगा जैसा कि मां के साथ रहकर बनता है। आया एक  मां का दिल नहीं ला सकती। इसलिए शादीशुदा औरतों को ऐसे समय नौकरी करने नहीं जाना चाहिए ताकि वह प्यार में बच्चों को बढ़ा करें। ताकि भटकती युवा पीढ़ी इस समाज को नहीं मिले, उनका पति चिंतित काम पर जाए। शाम को प्यारी पत्नी और बच्चों का मुस्कुराता चेहरा देख वह भी प्रसन्न हो।

 दोनों साथ मिलकर बच्चों की देखरेख करेंगे तभी एक सुंदर समाज का निर्माण होगा। सपनों का भारत तैयार होगा। नौकरी करने के बाद शादीशुदा महिलाओं में आई अहम की भावना वर्तमान समाज के लिए घातक है। पति-पत्नी दोनों को समय नहीं है न एक दूजे के लिए और न बच्चों को देखने के लिए। ऐसे में आया के भरोसे अपने बच्चों का पालन करते हैं। आया जो खुद के बच्चों को छोड़कर आती है तब दूसरों के बच्चों से कितना प्यार करेगी? यह सोचने वाली बात है। बच्चों की परवरिश ठीक नहीं होने के कारण आज वृद्धाश्रम की संख्या बढ़ रही है। दादा-दादी, नाना-नानी सेबच्चों को बच्चों को प्यार के साथ संस्कार भी मिलेंगे और वृद्धाश्रम की संख्या घटने लगेगी।

आज एकल परिवार और महिलाओं की नौकरी पर जाने से दांपत्य सुख के साथ-साथ पारिवारिक सुख जो होना चाहिए वह नहीं है। बच्चे किसी और पर आश्रित होने के कारण टीवी मोबाइल में घुसे रहते हैं। कामकाजी पति-पत्नी के मामलों में यह बात सामने आ रही है कि दोनों ऑफिस के बाद घर में मोबाइल पर व्यस्त हो जाते हैं। सोशल साइट्स पर चैटिंग करना भी घर टूटने का एक बड़ा कारण बन रहा है। ऐसे मामलों में एक-दूसरे का हस्तक्षेप भी पसंद नहीं आ रहा है। स्वयं पति-पत्नी घरेलू काम या बच्चों पर कोई चर्चा नहीं कर पाते। अपने-अपने मोबाइल में घुसे रहते हैं जबकि उन्हें तब दांपत्य सुख के साथ जीना चाहिए। ऐसे में भौतिक सुख सर्वोपरि हो जाता है। माना कि कुछ शादीशुदा महिलाएं अपवाद हो सकती है, पर शादीशुदा औरतों का नौकरी करना उनके परिवार को पूर्ण सुख दे पाता है या नहीं ये आज हमारे समाज की एक ज्वलंत व्यथा है।

पति-पत्नी को एक-दूसरे को समय देना भी जरूरी है। अन्यथा रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच जाता है। पति-पत्नी के बीच ईगो भी एक बड़ा कारण बन रहा है। साथ ही ससुराल पक्ष कामकाजी बहू से अपेक्षाएं भी पूरी रखते हैं, जिससे घर में झगड़े की स्थिति बन रही है। हालांकि, ऐसे मामलों में काउंसलिंग कर पति-पत्नी के बीच की दूरियों को कम किया जा रहा है। इसलिए काम काजी पति-पत्नी एक-दूसरे से बातचीत जारी रखें और दोनों एक-दूसरे के लिए समय जरूर निकालें।

About author 

Priyanka saurabh

प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,
कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार
facebook – https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/
twitter- https://twitter.com/pari_saurabh

Related Posts

सौ क्विंटल के तीन फल , अरे कैसे ?

May 10, 2023

सौ क्विंटल के तीन फल , अरे कैसे ? अरे ! सच आज मैं बहुत बड़ी सोच मे उलझ गयी

The kerala story movie|द केरल स्टोरी – टैक्स फ़्री बनाम बैन

May 10, 2023

द केरल स्टोरी – टैक्स फ़्री बनाम बैन फिल्म में डिस्क्लेमर जोड़ा है कि फिल्म घटनाओं का काल्पनिक संस्करण है,

भारत में इतने मिग-21 क्रैश क्यों?

May 10, 2023

भारत में इतने मिग-21 क्रैश क्यों? मिग-21 रुस का तैयार एक फाइटर विमान है। इसका इंजन काफी पुराना है और

Blogger website पर पोस्ट कैसे लिखे? । Blog Kaise Likhe in detail

May 10, 2023

Blogger website पर पोस्ट कैसे लिखे? |Blog Kaise Likhe? पोस्ट लिखने  के लिए सबसे पहले गूगल पर blogger.com सर्च करें

राजनीति में धर्म आधारित लामबंदी साम्प्रदायिकता को दे रही चिंगारी

May 7, 2023

राजनीति में धर्म आधारित लामबंदी साम्प्रदायिकता को दे रही चिंगारी कब गीता ने ये कहा, बोली कहाँ कुरान। करो धर्म

भारत के नेतृत्व में जी-20, एससीओ सम्मिट 2023 का कुछलता से विस्तार

May 7, 2023

भारत के नेतृत्व में जी-20, एससीओ सम्मिट 2023 का कुछलता से विस्तार भारत की अध्यक्षता व मेज़बानी में शंघाई सहयोग

PreviousNext

Leave a Comment