Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Preeti Kumari Suman

तेरे इश्क में

तेरे इश्क में तेेरे नाम से ये शामआबाद हो गया कुछ लिखने जो हम बैठेखाली दवात हो गया तुझे सोचा …


तेरे इश्क में

तेेरे नाम से ये शाम
आबाद हो गया

कुछ लिखने जो हम बैठे
खाली दवात हो गया

तुझे सोचा तो
आंसु युं छलका
कि लिखा पन्ना
बर्बाद हो गया

घर से आए तो थे
वकील बनने
लेकिन तेरे इश्क में
जीना दुश्वार हो गया

चाय कि प्याली के जगह
अब हाथों में जाम हो गया

तेरे मेरे इश्क का किस्सा
भी अब आम हो गया

जबसे तेरे जुबान पे
किसी और का नाम हो गया

तुझे चाहा मैंने, तुझे सराहा मैने
मुझपे जुल्म तो तब हो गया

जब तु किसी और का
सरेआम हो गया

चंचल मन तुम थे
और खामखा इश्क

बदनाम हो गया
और इस तरह

हमारे इश्क के कसीदे
भी गुमनाम हो गया

तेरे इश्क में जिये वो पल
आज मेेरे लिए

मौत का फरमान हो गया
सच बताउ तो

तेरे इश्क में
जख्म से जादा
मरहम का नुकसान हो गया।

About author

Preeti Kumari Suman

प्रीती कुमारी सुमन
बोधगया, बिहार

Related Posts

दुनियादारी की बात- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 16, 2021

दुनियादारी की बात ज्यादातर मेहनती एवं फुर्तीले लोगपसंद नहीं करते अपने आस-पासआलसी और कामचोर लोगों को,कभी उनको डांट डपट करतो

मीरा भटक रही- डॉ इंदु कुमारी

December 16, 2021

मीरा भटक रही हे नाथ परवर दिगार करवाओ अपनी दीदारभक्तों की सुनो पुकारमीरा भटक रही संसार । मायाजाल क्यों बिछायासब

जो सबसे जरूरी है- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 16, 2021

जो सबसे जरूरी है एक दृश्य अक्सर दिख जाता है मुझे अपने आस-पास… चार कंधों पर अपनी आखिरी यात्रा परनिकले

काटब धान – डॉ इंदु कुमारी

December 16, 2021

काटब धान सखी रे हुलसायल मनमा आयल अगहन महीनमाधान काटी करब पबनियाचूड़ा कुट करब नेमनमा। कुल देवी के चढ़ायब नागुड़

छोड़ दो नफरत करना- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 16, 2021

छोड़ दो नफरत करना सिर्फ इसलिए कि कुछ बाघ नरभक्षी निकल जाते हैं,तो क्या दुनिया से उनका वजूदमिटा दिया जाना

मानव तन – डॉ इंदु कुमारी

December 16, 2021

 मानव तन अनमोल  यह तन पानी का बुलबुलामाया नगरी यह है संसारतारण हार प्रभु संग हैखोज लो बारम्बार बीता हुआ

Leave a Comment