Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

तुम्हारा प्रेम मेरी दुनिया है- जितेन्द्र ‘ कबीर ‘

तुम्हारा प्रेम मेरी दुनिया है तुम्हारा प्रेम…मेरे लिए पुल सरीखा है,जिस पर चलकरनिकल जाता हूं मैं अक्सरखोजने प्रेम के गहनतम …


तुम्हारा प्रेम मेरी दुनिया है

तुम्हारा प्रेम मेरी दुनिया है- जितेन्द्र ' कबीर '

तुम्हारा प्रेम…
मेरे लिए पुल सरीखा है,
जिस पर चलकर
निकल जाता हूं मैं अक्सर
खोजने प्रेम के गहनतम भावों को।
तुम्हारा प्रेम…
मेरे लिए बादल सरीखा है,
जो विचरण करते हैं
मन के आकाश में अक्सर
मुझ पर प्रेम का अमृत बरसाते हुए।
तुम्हारा प्रेम…
मेरे लिए समन्दर सरीखा है,
जिसमें पूरी तरह डूबकर
मैंने सीख लिया है
कविता में तैरने का नायाब हुनर।
तुम्हारा प्रेम…
मेरे लिए क्षितिज सरीखा है,
जहां दिखाई देती है
मिलती हुई सी अक्सर
प्रेम की पवित्रता और रूहानियत।
तुम्हारा प्रेम…
मेरी अलग दुनिया सरीखा है,
जहां अकेला होकर भी
तुम्हारे साथ होता हूं अक्सर
सपनों का इंद्रधनुष बनाते हुए।
जितेन्द्र ‘ कबीर ‘
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश 176314
संपर्क सूत्र- 7018558314
परिचय

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘ कबीर ‘
संप्रति – अध्यापक


Related Posts

मदर्स डे विशेष -माँ की दुआएं

May 6, 2022

मदर्स डे विशेष माँ की दुआएं घर से सफर करने निकलना हो । माँ को जहन में रख निकला करो

कविता-मां ही जन्नत

May 6, 2022

कविता-मां ही जन्नत न मैं मंदिर पुजू न मस्जिद और न ही गुरूद्वारा,मां के चरणों में ही समाई है देखो

कविता-समाज में और जागरूकता लाए !

May 6, 2022

समाज में और जागरूकता लाए ! समाज में जागरूकता लाए,सभी को शिक्षित बनाए,बेटियों को बराबरी का दर्जा दिलाए, समाज में

कविता – कोयले की किल्लत

May 6, 2022

कविता -कोयले की किल्लत कोयले नें राजनीतिक माहौल में गर्मी लाई कमीं दूर अपनी आइडिया समस्याएं बतलाईअंतरराष्ट्रीय बाजार की बात

मुस्कान के मरहम से नासूरों को सजाती हूँ”

May 4, 2022

मुस्कान के मरहम से नासूरों को सजाती हूँ सुकून को संभालना आसान नहीं बड़े नाज़ों से पालती हूँ, ज़ख़्मों के

कविता-आपनो राजस्थान!

May 2, 2022

 आपनो राजस्थान! रेतीली मरुस्थलीय भूमि,ऊंट पर बैठकर सवारी, जीवंत संस्कृति,जब ये यादे मानस पटल पर आती,रखता है विशिष्ट पहचानम्हारों रंगीलों

PreviousNext

Leave a Comment