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ताजमहल या तेजोमहल

 “ताजमहल या तेजोमहल” इतने सालों बाद इस विवाद को जन्म देने का कारण समझ में नहीं आ रहा। ये कोई …


 “ताजमहल या तेजोमहल”

ताजमहल या तेजोमहल

इतने सालों बाद इस विवाद को जन्म देने का कारण समझ में नहीं आ रहा। ये कोई सियासी चाल है या धर्म और जात-पात पर देश में अशांति फैलाने वालों की चाल? आजकल आगरा का ताजमहल एक बार फिर तथाकथित विवादों से घिरा खबरों की सुर्खियां बना हुआ है।

“क्या जानें कौन सोया है संगमरमर की शानों शौकत के भीतर प्रेम की पराकाष्ठा, या भांग का भोगी भगवान महाकाल” गड़े मुर्दे उखाड़ना रहने दो जो भी रहता है ताज के भीतर सदियों से आराम से उसे सोने दो, दोनों ही प्यार का प्रतिक है। शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज की याद में दुनिया के सात अजूबों में गिनती होने वाला स्मारक बनवाया और भगवान शिव जो समग्र श्रृष्टि को चाहने वाले और उमा को बेइन्तहाँ प्यार करने वाले आशिकों में से एक है। कुरेदने से क्या फ़र्क पड़ता है ताज के भीतर की कहानी क्या है?

पर ना ज़िंदा इंसानों को जलन है मुर्दों की बस्ती से, इसीलिए मोहब्बत की निशानी कहा जाने वाला यह स्मारक अक्सर विवादों में घिरा रहता है। इस बार फिर से ताजमहल के तेजोमहल होने को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसमें ताज महल के गर्भगृह में बंद पड़े 22 कमरों को खोलने और जांच करने की मांग की जा रही है।

मांग की है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को इजाजत दी जाए कि वो ताजमहल के अंदर 22 कमरे खोलें, जिससे ये मालूम पड़े कि वहां हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां और शिलालेख छिपे हैं या नहीं? 

कहा जाता है कि इस्वींसन 1600 में आए यात्रियों ने अपनी यात्रा के वर्णन में मानसिंह के महल का जिक्र किया है।1651 का औरंगजेब का एक पत्र सामने आया जिसमें लिखा है कि अम्मी का मकबरा मरम्मत कराने की जरूरत है, तथ्यों के आधार पर अब पता लगाया जाए कि ताजमहल के बंद कमरों में क्या है?

क्या सही में ताजमहल के अंदर 22 कमरे हैं और हिंदू-देवी देवताओं की मूर्ति लगी हुई है? ताजमहल को लेकर क्या दावे किए जा रहे हैं और इन दावों को लेकर इतिहास के पन्नों में क्या लिखा है ये तो छानबीन के बाद ही पता चलेगा। कहा जाता है कि ताजमहल शब्द संस्कृत शब्द तेजोमहालय का ही एक रूप है, जो शिव मंदिर को दर्शाता है। इसमें अग्रेश्वर महादेव यानी आगरा के भगवान विराजमान हुआ करते थे। वहीं संगमरमर के चबूतरे पर चढ़ने से पहले जूते उतारने की परंपरा शाहजहां से पहले के समय से शुरू हुई थी जब ताज एक शिव मंदिर हुआ करता था। अगर ताज की उत्पत्ति एक मकबरे के रूप में हुई होती तो जूते उतारने की जरूरत नहीं होती क्योंकि कब्रिस्तान में जूते की जरूरत होती है। कुछ यात्रियों का कहना है कि मकबरे का आधार स्लैब सादे सफेद रंग में संगमरमर का तहखाना है, जबकि इसकी अधिरचना और दो मंजिलों पर अन्य तीन मकबरे जड़े हुए लता डिजाइनों से ढके हुए हैं। यह बताता है कि शिव की मूर्ति का संगमरमर का आसन अभी भी बना हुआ है और मुमताज का मकबरा नकली है।

चलो मान लें कि ताजमहल के भीतर एक मंदिर छुपा है, या देवी देवताओं की मूर्तियाँ गढ़ी भी गई है तो अब क्या? क्या दुनिया के सात अजूबे में से एक स्मारक को तोड़ दिया जाए, फिर से इसके उपर मंदिर खड़ा किया जाए? आख़िर अब इन सारी बातों का क्या मतलब है। देश विदेश में आकर्षण का प्रतिक है ताजमहल। उस वक्त के सियासती राजा मुगलों का सामना नहीं कर पाए तो जो जीता वही सिकंदर कहलाया और उस ज़माने में जो परिस्थितियां थी उस हिसाब से जो बन गया उसे अब जात-पात के नाम पर विवाद में घसिटते वैमनस्य फैलाने का मतलब क्या है। यूँ समझो की शाहजहाँ इस भूमि को प्यार की अमर निशानी और कलात्मक स्मारक दे गया। क्यूँ इस ऐतिहासिक इमारत को एक वर्ग की न मानते हम अपनी धरोहर समझे। आख़िर भारत की भूमि पर खड़ी बेनमून कृति है।

“सबा आजकल बहुत ज़हरीली चल रही है चिंगारियों को फूँको मत, उठ खड़े हुए शोले तो जलाकर पूरी कायनात को तबाह कर देगा।

ये लो अब इस ऐतिहासिक संगमरमर की इमारत ने दुनिया की सभी विश्व धरोहरों को पीछे छोड़ दिया है। ताज महल अब यूनेस्को विश्व धरोहर में सबसे ज्यादा सर्च की जाने वाली धरोहर बन चुका है तो क्यूँ न हम गर्व से कहे की ताजमहल हमारे देश की शान है।

भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर


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