Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

डॉलर बनाम रुपया

डॉलर बनाम रुपया ,डॉलर की मार रुपया लाचार डॉलर के आगे नतमस्तक होते रुपए से, पहले से मौजूद महंगाई डायन …


डॉलर बनाम रुपया ,डॉलर की मार रुपया लाचार

डॉलर बनाम रुपया

डॉलर के आगे नतमस्तक होते रुपए से, पहले से मौजूद महंगाई डायन को अपार सफलता शक्ति मिलने की संभावना

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 8 महीने के निचले स्तरपर पहुंचकर भी जनता को होने वाले फायदे को डालर नें चोट दी – एडवोकेट किशन भावनानी

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर वर्ष 2022 यह तीसरा वर्ष है जब दुनिया का करीब-करीब हर देश आर्थिक, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित कुछ क्षेत्रों में परेशानियों से मुकाबला कर रहे हैं पिछले दो वर्षों में तो कुछ समय पूरी दुनिया के लिए विभीषिका से गुजरे जब कोरोना महामारी का प्रलय उमड़ पड़ा था और मानवीय शक्तियों, व्यवस्थाओं, उपायों को ध्वस्त करते हुए अपनी प्रलयकारी तबाही का इतिहास यह महामारी रची गई। बड़ी मुश्किल से 2022 में हर देश अपनी अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर विकास की गति को पकड़ ही रहा था कि कोरोना महामारी के अन्य वेरिएंट्स ने हमला बोला और अब वैश्विक मंदी की चपेट से दुनिया मुकाबला कर रही है, क्योंकि रिकवरी अर्जित करने में अनेक रोड़े सामने आ रहे हैं हालात यह है कि वर्ष कंप्लीट होने में सिर्फ़ 3 माह बचे हैं लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका सहित अनेक देश आर्थिक मंदी की चपेट में आ चुके हैं, इसके साथ ही दशकों की रिकॉर्ड महंगाई और महंगे होते ब्याज भी चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने 0.75 फ़ीसदी ब्याज दर में बढ़ोतरी की जो इस कदर खतरनाक हो गई कि दुनिया भर की करेंसी डॉलर के आगे बौनी होने लग गई, जिसमें भारतीय रुपया 27 सितंबर 2022 को अपने रिकॉर्ड निचले स्तरपर गिरकर 81.63 पर बंद हुआ। हालांकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार मंदी के चलते कम हो रही है और आज पिछले 8 माह के सबसे निम्न स्तरपर लुढक कर 80 डालर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आया है जो जनवरी 2022 के बाद पहली बार इतने निचले स्तरपर हुआ है परंतु इस गैप को डॉलर के रिकॉर्ड स्तरपर रुपए को लाचार करने के कारण लाभ मिलने में कठिनाई होने को रेखांकित किया जा सकता है, क्योंकि जानकारों के अनुसार रुपया डॉलर के मुकाबले 82 पार जा सकता है।चूंकि स्थिति क्रिटिकल है इसलिए आज हम इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से डॉलर बनाम रुपए पर चर्चा करेंगे।

 
साथियों बात अगर हम डालर के मुकाबले कमजोर होते रुपए के प्रतिकूल प्रभाव की करें तो, रुपये के कमजोर होने का सबसे प्रतिकूल असर देश के आयात बिल पर पड़ेगा। जैसे-जैसे रुपया लुढ़क रहा है देश का आयात बिल बढ़ता जा रहा है। अब आयात करने के लिए कारोबारियों को पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे। आयात पर निर्भर कंपनियों का मार्जिन कम होगा। इसकी वसूली मूल्य वृद्धि कर की जाएगी। इससे पहले से मौजूद महंगाई और ज्यादा बढ़ेगी। ऐसा होने से पेट्रोलियम पदार्थों, विदेश भ्रमण और विदेशी सेवाओं का उपभोग करना महंगा हो जाएगा। रुपये के कमजोर होने से विदेश मुद्रा भंडार पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। इससे देश का खजाना खाली होगा। देश की आर्थिक स्थिति के लिहाज से यह सही नहीं है।

 

साथियों बात अगर हम डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपए के अनुकूल प्रभाव की करें तो एक विशेषज्ञ के अनुसार, रुपये के गिरने को हमेशा नकारात्मक दृष्टि से देखा जाता है, लेकिन तुलनात्मक रूप से यह उतना भी बुरा नहीं होता। बल्कि हमें इस आपदा को अवसर में तब्दील करना चाहिए। उन्होंने कहा कि रुपये के गिरने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हमारे उत्पाद सस्ते होते हैं जिससे भारतीय वस्तुओं की मांग बढ़ जाती है। भारतीय रुपये के लगातार कमजोर होने का एक सीधा लाभ हमें यह दिखाई पड़ रहा है कि भारत का निर्यात लगातार वृद्धि कर रहा है। इससे बाजार में निर्माण सेक्टर में बढ़ोतरी होगी और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। 
साथियों बात अगर हम डालर के मजबूत होने पर रुपए के अनुकूल और प्रतिकूल प्रभाव की तुलना करें तो, रुपये के कमजोर होने से दूसरी तरफ हमारे एक्सपोर्ट्स बेहतर करेंगे, क्योंकि रुपया कमजोर होने से बाहर वालों के लिए हमारा माल सस्ता हो जाता है, लिहाजा हमारा एक्सपोर्ट बढ़ जाएगा, एक्सपोर्ट बढ़ने से फॉरेन एक्सचेंज (विदेशी मुद्रा) की हमारी समस्या तो कम होगी, लेकिन हमारा इंपोर्ट कहीं ज्यादा बढ़ रहा है तो हमारा ट्रेड डेफिसिट (घाटा) बना हुआ है। ट्रेड डेफिसिट होने से हमारा रुपया और कमजोर हो जाएगा, इससे महंगाई बढ़ेगी, गरीब लोगों को इसकी मार ज्यादा झेलनी पड़ेगी, जिनकी नौकरी जा चुकी है उनके लिए मुसीबत और ही बढ़ेगी। कुछ ही समय पहले महंगाई की दर रिकॉर्ड स्तरपर पहुंच गई थी, जिसे कम करने के लिए सरकार ने तेल कंपनियों पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटाने के लिए दबाव बनाया था। खाद्य तेलों के आयात पर टैक्स कम कर राहत दी गई थी और तेल कंपनियोंसे यह लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए कहा गया था। लेकिन बदले हालात में सरकार के वे सभी प्रयास निष्फल साबित हो सकते हैं। आयात महंगा होने से ये सभी वस्तुएं एक बार फिर महंगी हो सकती हैं और आम उपभोक्ताओं को महंगाई की मार झेलनी पड़ सकती है।साथियों बात अगर हम इस मामले पर माननीय केंद्रीय वित्त मंत्री के बयान की करें तो, रुपये में आई बड़ी गिरावट के बाद रुपया अन्य मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले काफी मजबूत है। रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तरपर जाने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय स्थिति पर बहुत करीबी नजर रख रहे हैं। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि अगर कोई एक मुद्रा है जो खुद को संभालाने में सक्षम है और अन्य मुद्राओं की तुलना में उतार-चढ़ाव या अस्थिरता से बची हुई है, तो वह भारतीय रुपया है। हमने बहुत अच्छी तरह से वापसी की है। हमने काफी अच्छी तरह से इस स्थिति का सामना किया है।उन्होंने रुपये की गिरती कीमत के बारे में पूछे जाने पर कहा कि गिरावट के मौजूदा दौर में डॉलर के मुकाबले अन्य मुद्राओं की स्थिति पर भी अध्ययन करने की जरूरत है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 81.63 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया है। पिछले कुछ महीनों में लगातार ये गिरावट जारी है। 

About author

Kishan sanmukh

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

Related Posts

maa ko chhod dhaye kyo lekh by jayshree birmi

September 13, 2021

 मां को छोड़ धाय क्यों? मातृ भाषा में व्यक्ति अभिव्यक्ति खुल के कर सकता हैं।जिस भाषा सुन बोलना सीखा वही

Hindi maathe ki bindi lekh by Satya Prakash

September 13, 2021

हिंदी माथे की बिंदी कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, साक्षर से लेकर निरीक्षर तक भारत का प्रत्येक व्यक्ति हिंदी को

Jeevan aur samay chalte rahenge aalekh by Sudhir Srivastava

September 12, 2021

 आलेख        जीवन और समय चलते रहेंगें              कहते हैं समय और जीवन

Badalta parivesh, paryavaran aur uska mahatav

September 9, 2021

बदलता परिवेश पर्यावरण एवं उसका महत्व हमारा परिवेश बढ़ती जनसंख्या और हो रहे विकास के कारण हमारे आसपास के परिवेश

Jungle, vastavikta he jiski khoobsurati hai

September 9, 2021

 Jungle, vastavikta he jiski khoobsurati hai जंगल स्वतंत्रता का एक अद्वितीय उदाहरण है, जहां कोई नियम नहीं , जिसकी पहली

covid 19 ek vaishvik mahamaari

September 9, 2021

 Covid 19 एक वैश्विक महामारी  आज हम एक ऐसी वैश्विक आपदा की बात कर रहे है जिसने पूरे विश्व में

Leave a Comment