Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

झंडा दिवस- सुधीर श्रीवास्तव

झंडा दिवस आज सशस्त्र सेना झंडा दिवस है सात दिसंबर उन्नीस सौ उनचास कोये मनाया गया था पहली बारतब से …


झंडा दिवस

झंडा दिवस- सुधीर श्रीवास्तव
आज सशस्त्र सेना झंडा दिवस है

सात दिसंबर उन्नीस सौ उनचास को
ये मनाया गया था पहली बार
तब से सशस्त्र सेना झंडा दिवस
देश हर साल मनाता बार बार।

यह दिवस है हमें एकजुटता दिखाने का
शहीदों और जाँबाज जवानों के प्रति
हम सबकी ओर से
उनके प्रति सम्मान दिखाने का।

इस दिन पूरे देश में धन जुटाया जाता
यह धन सैनिकों के कल्याण में
उपयोगार्थ लाया जाता है।
गतवर्ष हमनें
सैंतालीस करोड़ जुटाए थे
इस वर्ष दिसंबर माह हम
गौरव माह के रुप में मना रहे हैं।
हर भारतवासी प्राणप्रण से
यथा योगदान जरूर करे,
सैनिक और सैनिक परिवारों के प्रति
सम्मान का भाव प्रकटकर नमन करे।

ये दिन देश के लिए बहुत खास है
अपने सैनिकों पर हमें पूरा विश्वास है,
हम बेपरवाह न हो जायें
अपनी एकजुटता का उन्हें भी
आगे बढ़कर सदा ही एहसास करायें।

सैनिकों और उनके परिवारों को
अपनेपन और उनके साथ हर पल
खड़े होने का विश्वास दिलाएं,
सम्मान के भाव दिखाएं,
झंडा दिवस की सार्थकता का
विश्व में भारत का परचम लहराएं।

सुधीर श्रीवास्तव

गोण्डा, उ.प्र.

8115285921©मौलिक, स्वरचित


Related Posts

ख्वाहिशें- आकांक्षा त्रिपाठी

December 18, 2021

ख्वाहिशें मन को हसीन करने वाली ये ख्वाहिशें, जिंदगी के समंदर में गोता लगाती येमशरूफ ख्वाहिशें। चाहत,इच्छा,मन के भाव के

सपने- सुधीर श्रीवास्तव

December 18, 2021

सपने सपने देखिये सपने देखना अच्छी बात है,पर सपनों को पंख भी दीजिएउड़ने के लिए खुला आकाश दीजिए। सपनों को

श्रद्धांजलि जनरल विपिन रावत- सुधीर श्रीवास्तव

December 18, 2021

श्रद्धांजलि जनरल विपिन रावत नमन करता देश तुमको गर्व तुम पर देश को है,नम हैं आँखें भले हमारीविश्वास है कि

दरख्त और कुल्हाड़ी- सुधीर श्रीवास्तव

December 18, 2021

दरख्त और कुल्हाड़ी अरे बेशर्म मानवों! कितने बेहया हो तुममगर तुम्हें क्या फर्क पड़ता हैतुम आखिर सुनते ही किसकी हो।

विजय दिवस- सुधीर श्रीवास्तव

December 18, 2021

विजय दिवस शुरू हुआ जो युद्ध तीन दिसंबर उन्नीस सौ इकहत्तर कोभारत पाकिस्तान के बीच मेंछुडा़ रहे थे सैनिक भारत

काम की कीमत है इंसान की नहीं-जितेन्द्र ‘कबीर’

December 17, 2021

काम की कीमत है इंसान की नहीं बेकारी, बेरोजगारी के दिनों मेंना कमाने का तानाजब तब मार देने वाले घरवाले,इंसान

Leave a Comment