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जो सबसे जरूरी है- जितेन्द्र ‘कबीर’

जो सबसे जरूरी है एक दृश्य अक्सर दिख जाता है मुझे अपने आस-पास… चार कंधों पर अपनी आखिरी यात्रा परनिकले …


जो सबसे जरूरी है

जो सबसे जरूरी है- जितेन्द्र 'कबीर'
एक दृश्य अक्सर दिख जाता है

मुझे अपने आस-पास…

चार कंधों पर अपनी आखिरी यात्रा पर
निकले इंसान को सम्मान देते लोग,
सभी शुभचिंतक नहीं रहते उनमें
होते हैं बहुत से वो भी
जिनसे रहा उसका उम्र भर मनमुटाव ही,

शवयात्रा में शामिल होते हैं
बहुत से जानने वाले लेकिन कई होते हैं
उस शख़्स के नाम, जाति, स्टेटस से
अनजान भी,
कुछ पुण्य कमाने की लालसा में वो
मृतक को देते हैं आखिरी प्रणाम भी,

यह दृश्य देखकर लगता है मुझे
कि हमारे समाज में मौत के समय
विभिन्न जातियों एवं समुदायों में एकता
इतनी भी दुर्लभ बात नहीं,

जानते हो कि दुर्लभ बात क्या है?
जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों पर
समस्त समुदायों एवं जातियों का
एक साथ खड़ा होना,
न्याय के लिए,
सच्चाई के लिए,
सामाजिक सद्भाव के लिए,
दुखी एवं वंचितों के लिए,
तरक्की एवं खुशहाली के लिए
और सबसे जरूरी इन्सानियत के लिए
सबका एक साथ खड़ा होना।

जितेन्द्र ‘कबीर’
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति-अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


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