Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, lekh

‘ज़िंदगी अनमोल है जाया न कीजिए’

 ‘ज़िंदगी अनमोल है जाया न कीजिए’ भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर आज लोगों की मानसिकता देखकर आनंद फ़िल्म का राजेश खन्ना …


 ‘ज़िंदगी अनमोल है जाया न कीजिए’

भावना ठाकर 'भावु' बेंगलोर
भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर

आज लोगों की मानसिकता देखकर आनंद फ़िल्म का राजेश खन्ना जी द्वारा प्रस्तुत एक डायलोग याद आ रहा है कि “बाबू मोशाय ज़िंदगी बड़ी होनी चाहिए लंबी नहीं मैं मरने से पहले मरना नहीं चाहता” पर गौर कीजिए, हम लोग मरने से पहले मर रहे है। फ़ालतू की बातों में अपना वक्त जाया कर रहे है। कोई ज़िंदगी का महत्व नहीं समझता। आनन फ़ानन में उम्र काट कर निकल जाना है क्या? ज़रा रुकिए, सोचिए ज़िंदगी को हल्के में मत लीजिए। ईश्वर ने एक मौका दिया है इंसान के रुप में धरती पर हमें जो जन्म मिला है वो अपने आप में एक अलौकिक क्रिया है। उम्र की एक अवधि होती है, हममें से कोई नहीं जानता हमारी उम्र कितनी है। रात के सोए अगले दिन की सुबह देखेंगे या नहीं ये भी नहीं जानते। एक बार सीने के भीतर धड़क रहे मशीन ने धड़कना बंद कर दिया हमारा सारा खेल ख़त्म। ये जो देह, ये जो ज़िंदगी मिली है वो एक बार ख़त्म हो गई तो वापस कभी नहीं मिलेगी। पुनर्जन्म की बातें हमनें सिर्फ़ सुनी है वापस जन्म मिलता है या नहीं कोई नहीं जानता। क्यूँ हम किसी बीमार इंसान को बचाने में अपना सबकुछ दाँव पर लगा देते है? हम जानते है की ज़िंदगी कितनी कीमती है, एक बार जो हाथ से निकल गई फिर कभी नहीं मिलती। तो जो जितना वक्त हमारे हाथ में है उस एक-एक पल को क्यूँ न शांत चित्त से मोज में रहकर सबके साथ मिलजुल कर हंसी खुशी से बिताएं। तो आज अभी इसी वक्त से अपना सारा ध्यान ज़िंदगी को जश्न की तरह मनाने में लगा दीजिए। कुछ भी साथ नहीं जाएगा तो एक दूसरे के प्रति इतना वैमनस्य क्यूँ पालना। दुन्यवी एक-एक नज़ारों का लुत्फ़ उठाते, मुस्कान बांटते अपनी शख़्सीयत को दुनिया में प्रस्थापित करते क्यूँ न जिया जाएँ कि, जानें के बाद भी हमारी खुशबू अपनों के दिल में तरों ताज़ा रहे। 

ज़िंदगी बहुत हसीन है यारों जात-पात धर्म और परंपरा के नाम पर लड़ते झगड़ते मत बिताओ। क्यूँ न रिश्तेदारों और पास पड़ोसियों के साथ प्यार और अपनापन रखकर ज़िंदगी की पारी ऐसे खेलकर निकलें की वर्ल्ड रेकार्ड बन जाए, ज़माना याद करें हमारे वजूद को ऐसी छाप छोड़ जाएँ। 

असंख्य खुशियाँ बिखरी है हमारे आसपास उसे गले लगाईये। खुद का ख़याल रखिए आपके परिवार के लिए आप सबकुछ है, पैसों से सब खरीदा जा सकता है ज़िंदगी नहीं, बहुत अनमोल है ज़िंदगी इसे व्यर्थ की उलझनों में उलझकर मत गंवाईये। खुद को ढूँढिए, ईश्वर से मिलिए ज़िंदगी ढ़ोने का नाम नहीं ज़िंदगी उत्सव सी मनाने का नाम है। क्यूँ हम सरल सहज ज़िंदगी नहीं बीता सकते? राग-द्वेष, बैर-नफ़रत पालकर क्यूँ जीते है। भूल जाईये आसपास क्या हो रहा है। हर शै से खुशियाँ, प्यार और आनंद ढूँढिए और भाईचारा फैलाईये, क्यूँकि आनंद बक्षी साहब ने कहा है कि “ज़िंदगी के सफ़र में गुज़र जाते है जो मुकाम वो फिर नहीं आते, कुछ लोग एक रोज़ जो बिछड़ जाते हैं वो हजारों के आने से मिलते नहीं उम्र भर चाहे कोई पुकारा करे उनका नाम वो फिर नहीं आते” इसलिए खुद को जो ज़िंदगी मिली है उसको, परिवार को और दोस्तों को सहजकर रखिए और ज़िंदगी को जश्न की तरह मनाते भरपूर जी लीजिए। कल किसीने नहीं देखा आज का मजा लीजिए।

भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर


Related Posts

कागज के शेर-जयश्री बिरमी

December 20, 2021

कागज के शेर एकबार फिर कागजी जलजला आया हैं और पाकिस्तान ने एक नक्शा अपने सोशल मीडिया में दिखाया हैं

ओमिक्रान वेरिएंट – एतिहात बरतना -किशन सनमुखदास भावनानी

December 19, 2021

ओमिक्रान वेरिएंट – एतिहात बरतना और बूस्टर डोज़ का तात्कालिक संज्ञान लेना ज़रूरी ब्रिटेन और अमेरिका में छाए ओमिक्रान वेरिएंट

शिक्षा एक अलग जीवन का प्रवेश द्वार है-किशन सनमुखदास भावनानी

December 19, 2021

शिक्षा एक अलग जीवन का प्रवेश द्वार है! बच्चों के जीवन के शुरुआती वर्षों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आगे चलकर बच्चों

प्रेम में सब कुछ चलता हैं(व्यंग)-जयश्री बिरमी

December 19, 2021

प्रेम में सब कुछ चलता हैं (व्यंग) पुरानी फिल्में देख कई दृश्यों का हम मजाक उड़ाते थे।हीरो ने दौड़ती गड्डी

हमारी अंतरात्मा ही हमारी सच्ची मित्र है.-तमन्ना मतलानी

December 18, 2021

नन्हीं कड़ी में…आज की बात हमारी अंतरात्मा ही हमारी सच्ची मित्र है… संसार में आया हुआ प्रत्येक व्यक्ति सांसारिक मोह-माया

अपनीं सांस्कृतिक विरासत से संपर्क बनाए रखना ज़रूरी

December 18, 2021

युवाओं को अपनीं सांस्कृतिक विरासत से संपर्क बनाए रखना ज़रूरी – अपनी मातृभाषा में बोलने पर गर्व का अनुभव होना

Leave a Comment