Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

जलियांवाला बाग-

 जलियांवाला बाग बैशाखी का पावन दिन तारीख तेरह अप्रैल उन्नीस सौ उन्नीस एक सभा हो रही थी रौलेट एक्ट का …


 जलियांवाला बाग

बैशाखी का पावन दिन

तारीख तेरह अप्रैल उन्नीस सौ उन्नीस

एक सभा हो रही थी

रौलेट एक्ट का विरोध हो रहा था।

अनायास ही एक अंग्रेज दरिंदा

जनरल डायर नाम था जिसका,

भीड़ पर चलवा दी गोलियां।

लोग नहीं कुछ समझ सके

जब तक कुछ वे समझ पाते,

चार सौ से ज्यादा तो मर ही गए

दो हजार से ज्यादा जख्मी हो गए।

कहीं चार सौ चौरासी तो कहीं 

तीन सौ अट्ठासी की सूची है।

पर ब्रिटिशराज के अभिलेखों में

केवल दौ सौ घायलों संग

तीन सौ उन्यासी शहीदों की

ब्रिटिश हूकूमत ने बात कबूल की थी,

पर कुछ का अनुमान ऐसा भी था

मरे तो थे एक हजार और

घायलों का आंकाड़ा दो हजार था।

स्वतंत्रता संग्राम पर इस घटना का

इस हत्याकांड का असर हुआ,

जलियांवाला बाग हत्याकांड

ब्रिटिश शासन के अंत का सूत्रधार बना।

उन्नीस सौ इकहत्तर में पहली बार 

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ ने 

जलियांवाला बाग स्मारक पर

शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी,

दो हजार तेरह में ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने

ब्रिटिश इतिहास में इसे शर्मनाक घटना

लिखकर ये स्वीकार की थी।

हम आज उन शहीदों को

शत नत नमन करते हैं,

ब्रिटिश हूकूमत को उनकी इस बेशर्मी पर

अब भी लानत भेजते हैं। 

सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उ.प्र.
8115285921


Related Posts

ख्वाहिशें- आकांक्षा त्रिपाठी

December 18, 2021

ख्वाहिशें मन को हसीन करने वाली ये ख्वाहिशें, जिंदगी के समंदर में गोता लगाती येमशरूफ ख्वाहिशें। चाहत,इच्छा,मन के भाव के

सपने- सुधीर श्रीवास्तव

December 18, 2021

सपने सपने देखिये सपने देखना अच्छी बात है,पर सपनों को पंख भी दीजिएउड़ने के लिए खुला आकाश दीजिए। सपनों को

श्रद्धांजलि जनरल विपिन रावत- सुधीर श्रीवास्तव

December 18, 2021

श्रद्धांजलि जनरल विपिन रावत नमन करता देश तुमको गर्व तुम पर देश को है,नम हैं आँखें भले हमारीविश्वास है कि

दरख्त और कुल्हाड़ी- सुधीर श्रीवास्तव

December 18, 2021

दरख्त और कुल्हाड़ी अरे बेशर्म मानवों! कितने बेहया हो तुममगर तुम्हें क्या फर्क पड़ता हैतुम आखिर सुनते ही किसकी हो।

विजय दिवस- सुधीर श्रीवास्तव

December 18, 2021

विजय दिवस शुरू हुआ जो युद्ध तीन दिसंबर उन्नीस सौ इकहत्तर कोभारत पाकिस्तान के बीच मेंछुडा़ रहे थे सैनिक भारत

काम की कीमत है इंसान की नहीं-जितेन्द्र ‘कबीर’

December 17, 2021

काम की कीमत है इंसान की नहीं बेकारी, बेरोजगारी के दिनों मेंना कमाने का तानाजब तब मार देने वाले घरवाले,इंसान

Leave a Comment