Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

mainuddin_Kohri, poem

जरा सोचो इंसान – मईनुदीन कोहरी”नाचीज बीकानेरी”

जरा सोचो इंसान अपनी जुबां से किसी को कभी ना सताना।मौत भी आकर कहे तो बहाना ये बनाना।।सम्भल कर कदम …


जरा सोचो इंसान

जरा सोचो इंसान - मईनुदीन कोहरी"नाचीज बीकानेरी"
अपनी जुबां से किसी को कभी ना सताना।
मौत भी आकर कहे तो बहाना ये बनाना।।
सम्भल कर कदम रखना हसीन है ये जिंदगी।
जरा बच कर चलना बड़ा नाजुक है ये ज़माना।।
आदमी को अब तो आदमी मत कहिये जनाब।
आदमी चलती फिरती लाश है इसे ये समझना
मुक़्क़द्दर किसी का जब भी रूठे है इस जहाँ में।
बदन के कपड़ों को भी होता है ये हिसाब चुकाना।।
ग़ैरों की हिम्मत कहाँ अपने ही अपनों को गिराते।
अब तो आदत सी हो गई अपनों से दामन ये बचाना।।
परवरिश में भी अब तो अपनों का प्यार कहाँ ।
तहज़ीब की उम्मीद फिर क्यों करता है ये जमाना।।
रिश्तों में अब तो अपनेपन का असर है ही कहाँ।
वृद्धाश्रम में अब वृद्धजनों को रखने का है ये जमाना।।
जितना ईलमदार हुआ है आज का ये इन्सान।
“नाचीज”जरा सोचो कम नहीं हुआ नाहक ये सताना।।

मौलिक/अप्रकाशित
प्रेषक:-मईनुदीन कोहरी”नाचीज बीकानेरी”
मोहल्ला कोहरियांन बीकानेर
मो -9680868028


Related Posts

कविता – शिव और सावन

September 1, 2022

कविता – शिव और सावन सावन शिव हुए अवतरित धरती परसावन में निज ससुराल गएहुआ अर्घ्य और जलाभिषेक से स्वागत

सावन की बौछार

September 1, 2022

 सावन की बौछार सावन की बौछार यारतन – मन को भिगाती हैमस्त फुहारें इस सावन कीयाद किसी की दिलाती है

कविता -आधा

September 1, 2022

कविता -आधा जब भी इस दुनिया से मैं खुद को साझा करता हूँमानो लगता है मुझको के खुद को आधा

कविता – उलझ जाता हूँ मैं

September 1, 2022

कविता – उलझ जाता हूँ मैं किसी से बात कहनी होकिसी की बात सुननी होमानवता और मुझमें सेअगर मेरी जात

पर्यावरण संरक्षण

September 1, 2022

पर्यावरण संरक्षण अद्भुत सी सुंदरता है पर्यावरण में,चलो हम भी लाए, कुछ जिम्मेदारियां हमारे आचरण में,क्यों फैला रखा है हमने

अंतिम संदेश।(Last message)

August 31, 2022

अंतिम संदेश। जिंदगी का क्या भरोसा,कब हमारा आखरी पल हो,कभी खुद को तो कभी लोगों को कोसा,पर कौन जाने कि

PreviousNext

Leave a Comment