Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh, satya_prakash

जनमत के चर्चा की प्रवृत्ति-सत्य प्रकाश सिंह

जनमत के चर्चा की प्रवृत्ति वर्तमान राजनीतिक चुनावी परिवेश में जनमत एक ऐसी विषयवस्तु है जिसके चारों ओर से आने …


जनमत के चर्चा की प्रवृत्ति

जनमत के चर्चा की प्रवृत्ति-सत्य प्रकाश सिंह
वर्तमान राजनीतिक चुनावी परिवेश में जनमत एक ऐसी विषयवस्तु है जिसके चारों ओर से आने वाला हवा का झोंका छेड़ देता है लेकिन इससे जो स्वर उत्पन्न होते हैं वह हमेशा संगीतात्मक नहीं होते। जनमत का स्वरूप सदैव कल्याणकारी होना चाहिए। जनमत का हर रूप या विचार जनमत नहीं हुआ करते , अफवाहों को भी हम जनमत नहीं कह सकते , जनमत के लिए आवश्यक हो कि वह जन कल्याणकारी व विवेकशील हो। जनमत निर्माण के मुख्य साधनों में प्रिंट मीडिया व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका होती परंतु स्वच्छ जनमत के निर्माण में सर्वाधिक बाधा इन्हीं की रही है। वर्तमान समय में “पीत पत्रकारिता” के दौर से गुजरती हुई मीडिया पक्षपातपूर्ण झूठी खबरे फैलाकर जनमानस को दिग्भ्रमित कर रही हैं। पीत पत्रकारिता ने ही अशिक्षा, गरीबी, भयंकर भुखमरी, भ्रष्टाचार जैसे ज्वलंत मुद्दों को दरकिनार करके विषमतायुक्त अभिव्यक्ति की ओर अग्रसर है। प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का नैतिक दायित्व बनता है कि शुद्ध जनमत के निर्माण में अपने कर्तव्यों का जिम्मेदारियों के साथ निर्वहन करें। वैसे तो शुद्ध जनमत के निर्माण के लिए लोगों में चर्चा की प्रवृत्ति होना बहुत ही आवश्यक है क्योंकि चर्चा के प्रवृति से ही अच्छे राजनीतिक गुण जनमानस के लिए निकलते हैं। समाचार पत्रों को जनमत निर्माण करने का प्रमुख धर्म ग्रंथ कहा जाता है समाचार पत्र ही जनमत की प्राण वायु होते हैं। इसलिए पत्रकारिता का प्रमुख कर्तव्य शुद्ध जनमत का निर्माण करना है। पाश्चात्य विचारक डेविड ह्यूम ने बहुत पहले ही कहा था “कोई भी शासन प्रणाली वह कितनी भी दूषित क्यों ना हो वह अपनी शक्ति के लिए जनमत पर निर्भर रहती है।” राजनीति का इतिहास साक्षी रहा है जनमत की अवहेलना करके आज तक की थी पर कोई शासन नहीं कर पाया। जनमत के निर्माण में प्रथा परंपराएं एवं पर्यावरण की भूमिका अत्यंत ही महत्वपूर्ण होती है। जनमत निर्माण के बाद वोटो को गिनना चाहिए ना कि तौलना चाहिए। सहभागिता मूलक लोकतंत्र में तो समाज के अंतिम व्यक्ति को भी सत्ता में भागीदारी मिलती है परंतु आधुनिक लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को जिम्मेदारी तो मिल जाती है परंतु सत्ता में भागीदारी नहीं प्राप्त होती। जनमत निर्माण में असली खिलाड़ी कौन है और असली अनाड़ी कौन है यह कहना अनुपयुक्त होगा क्या मीडिया सिर्फ रेफरी मात्र है। कुछ राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर जनमत संग्रह ,लोक निर्णय, उपक्रम, प्रत्यावर्तन का भी सहारा लेना चाहिए इन शब्दावलीयों का प्रयोग करना है यहां पर करना सर्वथा उचित है क्योंकि प्रतिनिधि प्रजातंत्र में अच्छे सरकार के निर्माण के लिए अच्छी बात होगी। नियमों का नियमन स्वतंत्रता पूर्वक होगा क्योंकि जनमत ही जनता का जनक और शिशु दोनों होता है।

स्वतंत्र स्तंभकार

सत्य प्रकाश सिंह
केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज प्रयागराज उत्तर प्रदेश


Related Posts

आत्मविश्वास तनावमुक्त परीक्षाओं की कुंजी है

April 18, 2022

 आत्मविश्वास तनावमुक्त परीक्षाओं की कुंजी है  परीक्षा का थोड़ा तनाव हमें सक्रिय, प्रेरित और हमारा ध्यान केंद्रित करता है परंतु

अपेक्षा और हम- अनिता शर्मा झाँसी

April 18, 2022

अपेक्षा और हम हर रिश्ता सुन्दर प्यारा सा है।हमारे अपने दिल के करीब रहते हैं।सभी प्यारी भावनाओं से जुड़े रहते

रिश्ते कितने अपने कितने पराये!-अनिता शर्मा झाँसी

April 18, 2022

रिश्ते कितने अपने कितने पराये! हम सब समाज और परिवार से जुड़े होते हैं।बहुत खूब प्यारे से परिवार के सदस्यों

महा आराधना पर्व हैं चैत्री नवरात्रि- जयश्री बिरमी

April 18, 2022

महा आराधना पर्व हैं चैत्री नवरात्रि सनातन धर्म के मूल में दोनों का –आस्था और अर्चना– अप्रतिम स्थान हैं।आराधना से

दिवास्वप्न या कुछ और?- जयश्री बिरमी

April 18, 2022

दिवास्वप्न या कुछ और? कोई कितना सफल हो सकता हैं ये तो शायद उनकी मेहनत करने पर निर्भर होता हैं,चाहे

कुदरती सौंदर्यता के रहस्य!

March 26, 2022

कुदरती सौंदर्यता के रहस्य! हर व्यक्ति अपनी त्वचा की देखभाल की दिनचर्या से बहुत प्यार करते हैं, और नहीं करते

Leave a Comment