चुपचाप देखते रहते हो| chupchap dekhte rahte ho.
चुपचाप देखते रहते हो जाने कैसा दौर गुज़र रहा है ये , खुदा का घर दहशत में है जन्नत लिपटी …
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अवैध रिश्ते रिश्तों के दरमियानकुछ दगाबाज पलते जो अपनों को ही अंधेरे में रख हर वक्त छलते।। अवैध रिश्ते कहां
कमज़ोर तू मां | kamjor tu maa
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December 10, 2022
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अप्सेंट रहता हूं पर हाजिरी लगती है| absent rahta hun par haziri lagti hai
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December 10, 2022
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व्यंग्य कविता-नियमों कानूनों की धौंस बताता हूं niyamo kanoono ki dhaus batata hun
December 10, 2022
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