Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

चुनाव के पहले और बाद में

 चुनाव के पहले और बाद में जितेन्द्र ‘कबीर’ जनता के सामने विनम्र याचक मुद्रा में नेता लोकतंत्र के पर्व की  …


 चुनाव के पहले और बाद में

जितेन्द्र 'कबीर'
जितेन्द्र ‘कबीर’

जनता के सामने

विनम्र याचक मुद्रा में नेता

लोकतंत्र के पर्व की 

सबसे सार्थक तस्वीर है,

चुनाव के बाद भी अगर 

जनता और नेता की स्थितियों में

अदला-बदली न हो

तो लोकतंत्र किसी देश के लिए

सबसे अच्छी व्यवस्था हो जाती है,

यह अलग बात है कि हमारे देश में

चुनाव के तुरंत बाद

नेता शासक के रुआब में एवं

जनता याचक की मुद्रा में आ जाती है

और यही बात हमारे देश में

लोकतंत्र की खराब अवस्था को दर्शाती है।

चुनाव के समय 

नेता का लोगों के घर-घर जाकर

उनका हालचाल एवं समस्याएं 

सुनने-सुलझाने की कवायद

जनता में लोकतंत्र के प्रति उम्मीद जगाती है,

यह अलग बात है कि हमारे देश में

चुनाव के तुरंत बाद से जनता

नेताओं की प्राथमिकता से 

पूरी तरह गायब हो जाती है

और यही बात हमारे देश में

लोकतंत्र की खराब अवस्था को दर्शाती है।

                                  जितेन्द्र ‘कबीर’

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

चाह-तेज देवांगन

January 7, 2022

शीर्षक – चाह हम जीत की चाह लिए,गिरते, उठते पनाह लिए,निकल पड़े है, जीत की राह में,चाहे कंटक, सूल, खार

हे नववर्ष!-आशीष तिवारी निर्मल

January 6, 2022

हे नववर्ष! तुम भी दगा न करना आओ हे नववर्ष!तुम हमसे कोई दग़ा न करना बीते जैसे साल पुराने वैसी

लाऊं तो कैसे और कहां से-जयश्री बिरमी

January 6, 2022

लाऊं तो कैसे और कहां से कहां से लाऊ वो उत्साह जो हर साल आता थाकहां से लाऊं वह जोश

बहरूपिया-जयश्री बिरमी

January 6, 2022

बहरूपिया जब हम छोटे थे तो याद आता हैं कि एक व्यक्ति आता था जो रोज ही नया रूप बना

लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया- तमन्ना मतलानी

January 6, 2022

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात  लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया… कविता लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत

कोशिश-नंदिनी लहेजा

January 6, 2022

विषय-कोशिश कोशिश करना फ़र्ज़ तेरा, बन्दे तू करता चल।भले लगे समय पर तू, निश्चित पाएगा फल।रख विश्वास स्वयं पर, और

Leave a Comment