Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

चापलूसी

चापलूसी आत्मप्रशंसा मानवीय अस्तित्व की पसंद होती है – कुछल चाटुकार इसी कमजोरी की सीढ़ी पर चढ़कर वांछित सिद्धि प्राप्त …


चापलूसी

चापलूसी
आत्मप्रशंसा मानवीय अस्तित्व की पसंद होती है – कुछल चाटुकार इसी कमजोरी की सीढ़ी पर चढ़कर वांछित सिद्धि प्राप्त करते रहते हैं

चापलूसी भी एक कला है जो स्वाभिमानी इंसान कभी नहीं सीख सकता – स्वाभिमानी होना भी एक गुण है जो चापलूस इंसान कभी नहीं हो सकता सराहनीय विचार – एडवोकेट किशन भावनानी

गोंदिया – भारत में हम दैनिक दिनचर्या में राजनीतिक सामाजिक इत्यादि अनेक क्षेत्रों में चापलूस शब्द अक्सर सुनते रहते हैं। अधिकतम बयानबाज़ी में चापलूस शब्द का उल्लेख किया जाता है। अभी एक बहुत बड़े नेता ने पार्टी से इस्तीफा देते हुए अपने पांच पृष्ठो की चिट्ठी में भी अनेक बार चापलूस शब्द का प्रयोग किया गया है। अक्सर हम देखते हैं कि किसी भी पार्टी या सामाजिक संस्था में से अलग होने वाला नेता समाजसेवी सेवक कार्यकर्ता ऐसा जरूर बयान देता है कि पार्टि, संस्था अब चापलूसों से घिर गई है मेरा उसमें काम करना कठिन हो गया था, या फलाना हमारा लीडर चापलूस लोगों की ही सुनता है!स्वाभिमानी इंसान का वहां मूल्य नहीं!! इसीलिए आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से चापलूस और स्वाभिमान इन दो शब्दों पर चर्चा करेंगे।

 
साथियों बात अगर हम चापलूसी की करें तो इसे झूठी प्रशंसा, चाटुकारिता, मक्खनबाजी, खुशामद,बढ़ई दिखावी आवभगत, चने के झाड़ पर चढ़ाना इत्यादि अनेक शब्दों का एक जुमला प्रसंग के रूप में परिभाषित कर सकते हैं। अगर हम किसी व्यक्ति की तारीफ में यही उपरोक्त शब्दों को एकीकृत कर अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं तो हमें अप्रत्यक्ष रूप से चापलूस बाज कहा जा सकता है। जबकि पूरी पारदर्शिता, सौ बात की एक बात, कड़वी सच्चाई, मुंह पर बोलना, बिना लाग लपेट के बोलना इत्यादि गुणों वाले व्यक्ति को स्वाभिमानी की संज्ञा दी जाती है और यह व्यक्तित्व चाटुकारिता पर सेर पर सवा सेर साबित होता है क्योंकि बड़े बुजुर्गों ने भी कहा है सच्चाई छुप नहीं सकतीबनावट के उसूलों से!! हालांकि कुछ अपवाद छोड़ दें तो वर्तमान परिस्थितियों में खासकर कुछएक खास क्षेत्रों में चापलूसी करना अधिक फायदेमंद होती जा रही है क्योंकि आज पारदर्शी व्यक्तित्व कड़वी सच्चाई आदि गुणों वाले व्यक्तित्व को उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत ने घेर लिया जाता है याने चापलूसी उस पारदर्शी व्यक्तित्व को चापलूस बताने में आगे होते हैं ऐसा मेरा मानना है।

 
साथियों बात अगर हम वर्तमान परिपेक्ष में चापलूसी की कला के विस्तार की कड़वी सच्चाई की करें तो कुछ लोगों से मैंने सवाल किया कि, इंसान चापलूस क्यों बनता है? इस सवाल का उत्तर मिला, क्योंकि चापलूस बनना आज के दौर में बहुत आवश्यक है, चाहे हम पसंद करें या न करें, जिंदगी में अगर आगे बढ़ना है तो चापलूसी के हर पाठ का अध्ययन बहुत एकाग्रता से करना होगानेता हो या अभिनेता,श्रोता हो या वक्ता हर किसी को पुचकारा जाना अच्छा लगता है, चापलूस पुचकारने का काम करता है ताकि उस का काम निकल सके।उसका क्या गया अगर उस ने दो शब्द मीठे बोल दिए। अगर हम खुद सोचें तो क्या हमको कड़वा बोलने या सच बोलने वाले पसंद आते हैं, हम ही तो चापलूसों की जमात में जा कर खड़े होते हैं। नेता हमेशा अपने साथ एक लंबी कतार ले कर चलता है जो ‘जय हो’ के नारे लगाते हैं।
 
साथियों बात अगर हम व्यंग्य में चापलूसी कला की करें तो दरअसल, चापलूसी एक बहुत ही महान कला है। हर कोई इस में महारत हासिल नहीं कर सकता।इसमें पारंगत होने के लिए किसी डिगरी की जरूरत नहीं है!!बस, बेशर्मी पर उतर आइए, हर वक्त मुसकराते रहिए और सामने वाले के दुत्कारने के बावजूद ऐसे भोले और मासूम बन जाइए कि उसने जो आप के प्रति धारणा बनाई है, उस पर उसे ही भरोसा न रहे। वाह, क्या ताकत होती है चापलूस के पास, दूसरे का विश्वास ही डगमगा दिया, यह कमाल है तो बस शब्दों का, ऐसेऐसे जुमले फेंकते हैं कि सुनने वाला उन का कायल हो जाता है, आखिर चापलूस उस की तारीफ में कसीदे जो काढ़ रहे होते हैं।

 
साथियों चापलूस असल में हमारे हितैषी होते हैं, कैसे? अरे वे वही कहते हैं, जो हमारे मन को अच्छा लगता है, यानी वे हमको जब भी मिलते हैं खुश कर देते हैं तो हुए न वे हमारे हितैषी, उन्हें देखकर हम मानें या न मानें एक आंतरिक खुशी जरूर होती है। अपनी तारीफ सुन मनप्राण सब तृप्त हो जाते हैं, ऐसे में सिर्फ उन्हें ही दोष देना गलत है न, आखिर, उन्हें चापलूस बनाने में हमारी भी अधिकतम भूमिका है।

 
साथियों बात अगर हम चापलूसी और स्वाभिमानी की करें तो, वर्तमान दौर में चाहे वह क्लब हो या दफ्तर हो और तो और घर क्यों न हो सब जगह चाटुकारिता संस्कृति ने अपना शिकंजा कसा हुआ है।लोग इंसानियत भूलकर चाटुकारिता को अपना रहे हैं। वैसे भी देखा जाये तो चापलूसी भी एक प्रकार का कला है जो स्वाभिमानी इंसान कभी भी सीख नहीं सकेगा और न ही सीखने की कोशिश करेगा इसके विपरीत स्वाभिमानी होना बहुत बड़ी कला है जो चापलूस इंसान कभी बन ही नहीं सकता चाहे लाख कोशिश भी कर ले क्योकि उसके रगों में स्वाभिमानी व्यक्ति का खून दौड़ रहा होता है। आज हर क्षेत्र में चापलूसों का बोलबाला है। चाहे वह क्लब हो या अन्य दफ्तर हो या यूनियन हो सभी जगह इनके जैसे लोगों का बोलबाला दिखता है। ये चापलूस ऐसे जीव हैं जो आत्मग्लानि का बोध करा देते हैं, झूठी प्रशंसा का पहाड़ खड़ा कर, फिर उस में मोटेमोटे छेद कर देते हैं, अब झेलते रहें हम मिट्टी को। सत्ता बदलते ही चापलूसों का दल बदल जाता है। यानी जिसकी लाठी उस की भैंस. चापलूस उसी के पीछे जा कर खड़ा होगा जिस की हैसियत होगी। सम्मान जताने के लिए चापलूसों के हाथ हमेशा जुड़े रहते हैं और कमर झुकने को यों आतुर रहती है मानो रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया है। शर्म को तो सुबहशाम ये गोलगप्पे के पानी में घोल कर पी जाते हैं,जब ये चलते हैं तो अपने हाथ में पकड़े झोले में दोचार जुमले डालना नहीं भूलते।

 
साथियों बिना किसी डिग्री और ट्रेनिंग के चापलूसी की कला में महारत हासिल करने के लिए सिर्फ थोड़ी बेशर्मी भरी हंसी और काम के आदमी के सामने जीभ लपलपा देना काफी है, फिर देखिए, सामने वाला कैसे हथियार डालता है हमारे सामने, आखिर नेता, अभिनेता से ले कर आम इंसान तक, चापलूसी किसे नहीं भाती भाई, बिना किसी डिगरी और ट्रेनिंग के चापलूसी की कला में महारत हासिल करने के लिए सिर्फ थोड़ी बेशर्मी भरी हंसी और काम के आदमी के सामने जीभ लपलपा देना काफी है, फिर देखिए, सामने वाला कैसे हथियार डालता है आप के सामने, आखिर नेता, अभिनेता से ले कर आम इंसान तक को, चापलूसी किसे नहीं भाती।

साथियों बात अगर हम स्वाभिमानी व्यक्तियों की करें तो, आत्म-सम्मान के स्वस्थ स्तर वाले लोग।कुछ मूल्यों और सिद्धांतों में दृढ़ता से विश्वास करते हैं, और विरोध मिलने पर भी उनका बचाव करने के लिए तैयार हैं, अनुभव के आलोक में उन्हें संशोधित करने के लिए पर्याप्त सुरक्षित महसूस करते हैं। जो उन्हें सबसे अच्छा विकल्प लगता है, उसके अनुसार कार्य करने में सक्षम हैं, अपने स्वयं के निर्णय पर भरोसा करते हैं, और जब दूसरों को उनकी पसंद पसंद नहीं है तो दोषी महसूस नहीं करते हैं।अतीत में क्या हुआ, और भविष्य में क्या हो सकता है, इस बारे में अत्यधिक चिंता करने में समय न गँवाएँ। वे अतीत से सीखते हैं और भविष्य की योजना बनाते हैं, लेकिन वर्तमान में तीव्रता से जीते हैं।असफलताओं और कठिनाइयों के बाद झिझकते नहीं, समस्याओं को हल करने की उनकी क्षमता पर पूरा भरोसा है। जरूरत पड़ने पर वे दूसरों से मदद मांगते हैं।कुछ प्रतिभाओं, व्यक्तिगत प्रतिष्ठा या वित्तीय स्थिति में अंतर को स्वीकार करते हुए, खुद को हीन या श्रेष्ठ के बजाय दूसरों के लिए समान समझें।समझें कि वे दूसरों के लिए एक दिलचस्प और मूल्यवान व्यक्ति कैसे हैं, कम से कम उनके लिए जिनके साथ उनकी दोस्ती है।हेरफेर का विरोध करें, दूसरों के साथ तभी सहयोग करें जब यह उचित और सुविधाजनक लगे। विभिन्न आंतरिक भावनाओं और ड्राइव को स्वीकार करें और स्वीकार करें, या तो सकारात्मक या नकारात्मक, उन ड्राइव को दूसरों के सामने तभी प्रकट करें जब वे चुनते हैं।विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का आनंद लेने में सक्षम हैं। दूसरों की भावनाओं और जरूरतों के प्रति संवेदनशील हैं, आम तौर पर स्वीकृत सामाजिक नियमों का सम्मान करते हैं, और दूसरों के खर्च पर समृद्ध होने के अधिकार या इच्छा का दावा नहीं करते हैं।चुनौतियों के आने पर खुद को या दूसरों को नीचा दिखाए बिना समाधान खोजने और असंतोष की आवाज उठाने की दिशा में काम कर सकते हैं। 
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे के चापलूसी आत्म प्रशंसा मानवीय अस्तित्व की पसंद होती है कुशल चापलूस इसी कमजोरी की सीढ़ी पर चढ़कर वांछित सिद्धि प्राप्त करते रहते हैं चापलूसी भी एक कला है जो स्वाभिमानी इंसान कभी नहीं सीख सकता स्वाभिमानी होना भी एक कौन है जो चापलूस इंसान कभी नहीं हो सकता सराहनीय विचार है। 
-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

About author

Kishan sanmukhdas bhavnani
-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

Related Posts

भारत का दीपोत्सव 2022/15 लाख दीप जलाकर नया विश्व रिकॉर्ड बन गया।

October 24, 2022

 भारत का दीपोत्सव 2022 ,15 लाख दीप जलाकर नया विश्व रिकॉर्ड बन गया। दुनियां भारतीय दीपावली महोत्सव और दीपोत्सव देखकर

मां लक्ष्मी के आठ स्वरूप/maa -lakshmi-ke-aath-swaroop

October 23, 2022

दीपावली महोत्सव 2022 मां लक्ष्मी पूजा के उपलक्ष में मां लक्ष्मी के श्रीचरणों में समर्पित यह मेरी कविता कविता–मां लक्ष्मी

कविता-हमें लोकतंत्र न्याय बंधुत्व की सामूहिक विरासत मिली/Loktantra par kavita

October 22, 2022

कविता-हमें लोकतंत्र न्याय बंधुत्व की सामूहिक विरासत मिली हम अत्यंत सौभाग्यशाली हैं हमारी किस्मत खुली अहिंसात्मक सोच सच्चे उपयोग की

फ़िर नए वेरिएंट की रूप बदलकर तेजी से दस्तक/covid new variant

October 22, 2022

फ़िर नए वेरिएंट की रूप बदलकर तेजी से दस्तक नए वेरिएंट का खतरा बढ़ा – स्वास्थ्य मंत्रालय की हाई प्रोफाइल

मिशन लाइफ (Mission Life)

October 22, 2022

मिशन लाइफ (Mission Life) आओ जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में अपने सामर्थ्य के हिसाब से योगदान दें सुरक्षित पर्यावरण

दीपावली पर लेख /deepawali special article in hindi

October 22, 2022

दीपावली पर लेख /deepawali special article in hindi दीपोत्सव हजारों सालों से मनाया जाता हैं।कार्तिक माह में बारिशों के खत्म

Leave a Comment